IAEA को न्यूक्लियर साइट के पास फटकने भी ना देंगे, US-ईरान जंग के बीच तेहरान ने खड़ा किया नया बखेड़ा
ईरान के विदेश मंत्रालय ने हालिया अमेरिकी हमलों की निंदा करते हुए कहा कि इनसे महीनों की कूटनीतिक कोशिशों को नुकसान पहुंचा है। मंत्रालय ने कहा, कि अमेरिकी सरकार ने होर्मुज़ में ज़रूरी इंतज़ाम लागू करने की ईरान की प्रक्रिया में खुलेआम बाधा डाली है।

अमेरिका और ईरान के बीच फिर से शुरू हुई जंग के बीच तेहरान ने आज (सोमवार, 13 जुलाई को)दो टूक लहजे में कहा है कि वह अपने कुछ परमाणु केंद्रों पर अंतरराष्ट्रीय निरीक्षण फिर से शुरू करने के लिए सहमत नहीं होगा। ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई से जब सवाल किया गया कि क्या ईरान संयुक्त राष्ट्र की परमाणु निगरानी संस्था अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के निरीक्षकों को परमाणु स्थलों तक फिर से पहुँचने की अनुमति देगा, तो उन्होंने कहा कि ईरान इस अनुरोध को स्वीकार नहीं करेगा।
यह रुख ईरान और अमेरिका के बीच एक समझौता ज्ञापन (MoU) के तहत चल रही बातचीत के बावजूद सामने आया है, जिसमें ईरान के परमाणु कार्यक्रम के भविष्य पर बातचीत की बात कही गयी है। हालाँकि, यह समझौता किसी भी पक्ष को विशिष्ट उपायों या समय-सीमा के लिए बाध्य नहीं करता है।गौरतलब है कि अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा था कि उन्हें उम्मीद है कि कुछ ही दिनों में IAEA का ईरान में परमाणु केंद्रों का निरीक्षण फिर से शुरू हो जाएगा।
अमेरिका की उम्मीदों पर पानी
हालांकि, बाद में ईरानी अधिकारियों ने अमेरिका की इस उम्मीद पर सवाल उठाए। ईरान के एक वरिष्ठ वार्ताकार ने कहा कि निरीक्षण से संबंधित कोई भी व्यवस्था केवल अमेरिका के साथ एक व्यापक समझौते के हिस्से के रूप में ही अंतिम रूप दी जाएगी। आईएईए ने पहले ओबामा प्रशासन के दौरान बातचीत के जरिए हुए 2015 के परमाणु समझौतेके तहत ईरानी परमाणु सुविधाओं का नियमित निरीक्षण किया था और निगरानी कैमरे संचालित किये थे। इस समझौते को आधिकारिक तौर पर 'संयुक्त व्यापक कार्य योजना' (जेसीपीओए) के रूप में जाना जाता है।
तेहरान के ऐलान ने पश्चिमी सरकारों की चिंताएँ बढ़ाईं
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा अपने पहले कार्यकाल के दौरान अमेरिका को समझौते से बाहर करने के बाद ईरान ने निगरानी को धीरे-धीरे सीमित कर दिया था। तब से ईरान ने अपनी यूरेनियम संवर्धन गतिविधियों का काफी विस्तार किया है। पहली बार हथियार-ग्रेड के करीब सामग्री का उत्पादन किया है और अपने परमाणु कार्यक्रम की दिशा को लेकर पश्चिमी सरकारों के बीच चिंताएँ बढ़ा दी हैं।
लेखक के बारे में
Pramod Praveenप्रमोद कुमार प्रवीण देश-विदेश की समसामयिक घटनाओं और राजनीतिक हलचलों पर चिंतन-मंथन करने वाले और पैनी पकड़ रखने वाले हैं। ईटीवी से पत्रकारिता में करियर की शुरुआत की। कुल करीब दो दशक का इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम करने का अनुभव रखते हैं। संप्रति लाइव हिन्दुस्तान में विगत तीन से ज्यादा वर्षों से समाचार संपादक के तौर पर कार्यरत हैं और अमूमन सांध्यकालीन पारी में बहुआयामी पत्रकारीय भूमिका का निर्वहन कर रहे हैं। हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप से पहले NDTV, जनसत्ता, ईटीवी, इंडिया न्यूज, फोकस न्यूज, साधना न्यूज और ईटीवी में कार्य करने का अनुभव है। कई संस्थानों में सियासी किस्सों का स्तंभकार और लेखक रहे हैं। विश्वविद्यालय स्तर से लेकर कई अकादमिक, शैक्षणिक और सामाजिक संगठनों द्वारा विभिन्न मंचों पर अकादमिक और पत्रकारिता में उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित भी हुए हैं। रुचियों में फिल्में देखना और पढ़ना-पढ़ाना पसंद, सामाजिक और जनसरोकार के कार्यों में भी रुचि है।
अकादमिक योग्यता: भूगोल में जलवायु परिवर्तन जैसे गंभीर और संवेदनशील विषय पर पीएचडी उपाधिधारक हैं। इसके साथ ही पत्रकारिता एवं जनसंचार में स्नातकोत्तर भी हैं। पीएचडी शोध का विषय- 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन-एक भौगोलिक अध्ययन' रहा है। शोध के दौरान करीब दर्जन भर राष्ट्रीय और अंततराष्ट्रीय सम्मेलनों में शोध पत्र पढ़ने और प्रस्तुत करने का अनुभव है। भारतीय विज्ञान कांग्रेस में भी शोध पोस्टर प्रदर्शनी का चयन हो चुका है। शोध पर आधारित एक पुस्तक के लेखक हैं। पुस्तक का नाम 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन' है। पत्रकारिता में आने से पहले महाविद्यालय स्तर पर शिक्षण कार्य भी कर चुके हैं।
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