अमेरिका से तनातनी के बीच बड़ा दांव, डेनमार्क की पीएम ने अचानक किया चुनाव का ऐलान
डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिक्सन ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ग्रीनलैंड पर दबाव बढ़ाने के बीच संसद में गुरुवार को अचानक आम चुनाव की घोषणा कर दी। देश में अब 24 मार्च 2026 को संसदीय चुनाव होंगे, जो मूल समयसीमा अक्टूबर 2026 से सात महीने पहले हैं।

डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिक्सन ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ग्रीनलैंड पर दबाव बढ़ाने के बीच संसद में गुरुवार को अचानक आम चुनाव की घोषणा कर दी। देश में अब 24 मार्च 2026 को संसदीय चुनाव होंगे, जो मूल समयसीमा अक्टूबर 2026 से सात महीने पहले हैं। फ्रेडरिक्सन ने संसद में विशेष बयान देते हुए कहा कि उन्होंने राजा फ्रेडरिक को सिफारिश की है और चुनाव की तारीख तय हो गई है। उन्होंने इसे डेनमार्क और यूरोप के लिए निर्णायक मोड़ बताया, जिसमें सुरक्षा, संप्रभुता और अमेरिका के साथ संबंधों की चुनौतियां मुख्य मुद्दे होंगे।
प्रधानमंत्री ने कहा कि यह जल्द ही वसंत होगा और डेनिश लोग जल्द ही मतदान करने जा रहे हैं। इस दौरान उन्होंने जोर दिया कि अगले चार सालों में डेनमार्क और यूरोप को खुद पर भरोसा कर मजबूत होना होगा, अमेरिका के साथ संबंधों को नए सिरे से परिभाषित करना होगा, महाद्वीप में शांति के लिए सैन्य क्षमता बढ़ानी होगी और यूरोपीय एकता बनाए रखनी होगी।
बताया जा रहा है कि यह फैसला ग्रीनलैंड विवाद से मिले 'ग्रीनलैंड बाउंस' का फायदा उठाने की रणनीति माना जा रहा है। ट्रंप ने हाल में ग्रीनलैंड को नियंत्रित करने या खरीदने की अपनी पुरानी मांग दोहराई और इसके लिए दबाव बनाया, जिसके जवाब में फ्रेडरिक्सन ने दृढ़ रुख अपनाया। इससे उनकी लोकप्रियता और सोशल डेमोक्रेट्स पार्टी में उछाल आया है।
हाल के ओपिनियन पोल में उनकी पर्सनल रेटिंग और पार्टी का समर्थन बढ़ा है, खासकर स्थानीय चुनावों में मिली नाकामी के बाद। डेनमार्क ने जर्मनी, फ्रांस समेत यूरोपीय साझेदारों के साथ आर्कटिक सुरक्षा मजबूत की है और ग्रीनलैंड में यूरोपीय सेनाओं की तैनाती बढ़ाई है। 2019 से सत्ता में काबिज फ्रेडरिक्सन 2022 से एक दुर्लभ क्रॉस-ब्लॉक गठबंधन का नेतृत्व कर रही हैं, जिसमें उनकी सोशल डेमोक्रेट्स, मॉडरेट्स और लिबरल्स शामिल हैं। उन्होंने प्रवासन नीति में सख्त रुख अपनाकर अन्य यूरोपीय नेताओं से अलग पहचान बनाई है और मजबूत सीमा नियंत्रण की वकालत की है।
बता दें कि ग्रीनलैंड आर्कटिक क्षेत्र का विशाल द्वीप है, डेनिश साम्राज्य का हिस्सा है लेकिन घरेलू मामलों में स्वायत्त है। ट्रंप ने हाल में फिर से इस द्वीप को खरीदने या नियंत्रित करने की अपनी 2019 वाली मांग दोहराई है, जिससे डेनमार्क पर दबाव बढ़ा है। इस मुद्दे ने डेनमार्क की राजनीति पर छाया हुआ है। डेनमार्क ने जर्मनी, फ्रांस जैसे यूरोपीय साझेदारों के साथ आर्कटिक सुरक्षा सहयोग मजबूत किया है। यूरोपीय सेनाएं ग्रीनलैंड में तैनात की जा रही हैं, जिससे फ्रेडरिक्सन की अंतरराष्ट्रीय छवि मजबूत हुई है और उनकी सरकार को संप्रभुता व यूरोपीय एकता के रक्षक के रूप में स्थापित किया है।
लेखक के बारे में
Devendra Kasyapदेवेन्द्र कश्यप पिछले 13 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अगस्त 2025 से वह लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर के पद पर कार्यरत हैं। संस्थान की होम टीम का वह एक अहम हिस्सा हैं। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर उनकी पैनी नजर रहती है। वायरल कंटेंट के साथ-साथ लीक से हटकर और प्रभावशाली खबरों में उनकी विशेष रुचि है।
देवेन्द्र ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत वर्ष 2013 में महुआ न्यूज से की। करियर के शुरुआती दौर में उन्होंने बिहार की राजधानी पटना में रिपोर्टिंग की। इस दौरान राजनीति के साथ-साथ क्राइम और शिक्षा बीट पर भी काम किया। इसके बाद उन्होंने जी न्यूज (बिहार-झारखंड) में अपनी सेवाएं दीं। वर्ष 2015 में ईनाडु इंडिया के साथ डिजिटल मीडिया में कदम रखा। इसके बाद राजस्थान पत्रिका, ईटीवी भारत और नवभारत टाइम्स ऑनलाइन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में कार्य किया।
मूल रूप से बिहार के भोजपुरी बेल्ट रोहतास जिले के रहने वाले देवेन्द्र कश्यप ने अपनी प्रारंभिक और उच्च शिक्षा पटना से प्राप्त की। उन्होंने पटना विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान में स्नातक की डिग्री हासिल की और MCU भोपाल से पत्रकारिता में डिप्लोमा किया। वर्तमान में वह उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में प्रवास कर रहे हैं।
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