फिर भड़की ईरान-अमेरिका जंग? US सेना ने बोला हमला, होर्मुज से सटे बंदर अब्बास में धमाके

Pramod Praveen लाइव हिन्दुस्तान
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अमेरिकी सेना का कहना है कि उसने आत्मरक्षा के लिए ये हमले किए हैं, जिनमें मिसाइल लॉन्च साइटों और बारूदी सुरंगें बिछाने वाली नावों को निशाना बनाया गया है। होर्मुज समुद्री मार्ग से सटे बंदर अब्बास में धमाके सुनाई दिए हैं।

फिर भड़की ईरान-अमेरिका जंग? US सेना ने बोला हमला, होर्मुज से सटे बंदर अब्बास में धमाके

कई दिनों से थमी ईरान-अमेरिका जंग के फिर से शुरू होने के संकेत हैं। अमेरिकी सेना ने सोमवार को दक्षिणी ईरान में हमले किए हैं। इससे पश्चिम एशिया में फिर से तनाव बढ़ गया है। अमेरिकी सेना का कहना है कि उसने आत्मरक्षा के लिए ये हमले किए हैं, जिनमें मिसाइल लॉन्च साइटों और बारूदी सुरंगें बिछाने वाली नावों को निशाना बनाया गया है। फॉक्स न्यूज की रिपोर्ट में कहा गया है कि होर्मुज समुद्री मार्ग से सटे बंदर अब्बास में धमाके सुनाई दिए हैं। खबर है कि वहां ईरानी नावें समंदर में बारूदी सुरंगें बिछा रही थीं। इस घटना के बाद ईरान ने अपने एयर डिफेंस मिसाइल सिस्टम को अलर्ट कर दिया है।

अमेरिकी सेना ने ये हमले ऐसे समय में किए हैं, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर कहा है कि ईरान के साथ बातचीत काफी अच्छे ढंग से आगे बढ़ रही है। इसी बीच, अमेरिकी सेंट्रल कमांड के प्रवक्ता कैप्टन टिम हॉकिन्स ने कहा कि अमेरिकी सेना ने दक्षिणी ईरान में हमले इसलिए किए हैं ताकि ईरानी सेनाओं से अपने सैनिकों को होने वाले खतरों से बचाया जा सके। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिकी कि सेना चल रहे संघर्ष-विराम के दौरान संयम बरत रही है।

अब्राहम अकॉर्ड पर टिके ट्रंप

बता दें कि डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को अपने ट्रूथ सोशल पर एक पोस्ट में कहा था कि युद्ध समाप्त करने के लिए ईरान के साथ शांति वार्ता अच्छी तरह से आगे बढ़ रही है। हालांकि, अमेरिकी अधिकारियों ने कहा कि ईरान अपने सर्वोच्च नेता से परामर्श के लिए जिस जटिल संचार नेटवर्क का इस्तेमाल कर रहा है, उसके चलते अंतिम फैसले में कुछ समय लग सकता है। ट्रंप ने 'ट्रुथ सोशल' पर एक पोस्ट में कहा कि ईरान के साथ शांति वार्ता में मध्यस्थता कर रहे देशों को अब्राहम समझौते पर हस्ताक्षर करने चाहिए, जो इजरायल और अरब देशों के बीच राजनयिक, आर्थिक एवं सुरक्षा संबंध स्थापित करने से संबंधित है। उन्होंने कहा कि ईरान का इस समझौते पर हस्ताक्षर करना सम्मान की बात होगी।

पांच मुस्लिम देशों पर ट्रंप का दबाव

ट्रंप ने कहा, "अमेरिका की ओर से इस बेहद जटिल पहेली को सुलझाने के लिए किए गए सभी प्रयासों के बाद, इन सभी देशों के लिए यह अनिवार्य होना चाहिए कि वे कम से कम अब्राहम समझौते पर हस्ताक्षर करें।" हालांकि, उन्होंने कहा कि अगर एक-दो देश के पास ऐसा न करने का कोई कारण हो तो इसे स्वीकार किया जा सकता है। अमेरिका-ईरान शांति वार्ता के मध्यस्थों में से संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) और बहरीन पहले ही अब्राहम समझौते पर दस्तखत कर चुके हैं। ट्रंप चाहते हैं कि सऊदी अरब, कतर, पाकिस्तान, तुर्किये, मिस्र और जॉर्डन भी इस समझौते पर हस्ताक्षर करें।

मोजतबा खामेनेई अज्ञात स्थान पर गए

इस बीच, अमेरिकी अधिकारियों ने कहा कि ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई एक अज्ञात स्थान से काम कर रहे हैं, जिसका बाहरी दुनिया से बहुत सीमित संपर्क है। उन्होंने कहा कि खामेनेई से केवल संदेशवाहकों के एक जटिल नेटवर्क के माध्यम से संपर्क किया जा सकता है। अधिकारियों के मुताबिक, जब अमेरिका अपनी प्रस्तावित शर्तों का विवरण भेजता है, तो ईरानी अधिकारियों को उन्हें सर्वोच्च नेता तक पहुंचाने में समय लगता है, जिससे संभावित प्रतिक्रिया में देरी होती है।

ट्रंप प्रशासन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने रविवार को कहा कि ईरान के सर्वोच्च नेता मसौदा समझौते की मौजूदा रूपरेखा पर सहमत हो गए हैं। इसके बाद ट्रंप ने 'ट्रुथ सोशल' पर एक पोस्ट में कहा कि उन्हें अगले कुछ दिनों में अंतिम निर्णय होने की उम्मीद है।

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लेखक के बारे में

Pramod Praveen

प्रमोद कुमार प्रवीण देश-विदेश की समसामयिक घटनाओं और राजनीतिक हलचलों पर चिंतन-मंथन करने वाले और पैनी पकड़ रखने वाले हैं। ईटीवी से पत्रकारिता में करियर की शुरुआत की। कुल करीब दो दशक का इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम करने का अनुभव रखते हैं। संप्रति लाइव हिन्दुस्तान में विगत तीन से ज्यादा वर्षों से समाचार संपादक के तौर पर कार्यरत हैं और अमूमन सांध्यकालीन पारी में बहुआयामी पत्रकारीय भूमिका का निर्वहन कर रहे हैं। हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप से पहले NDTV, जनसत्ता, ईटीवी, इंडिया न्यूज, फोकस न्यूज, साधना न्यूज और ईटीवी में कार्य करने का अनुभव है। कई संस्थानों में सियासी किस्सों का स्तंभकार और लेखक रहे हैं। विश्वविद्यालय स्तर से लेकर कई अकादमिक, शैक्षणिक और सामाजिक संगठनों द्वारा विभिन्न मंचों पर अकादमिक और पत्रकारिता में उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित भी हुए हैं। रुचियों में फिल्में देखना और पढ़ना-पढ़ाना पसंद, सामाजिक और जनसरोकार के कार्यों में भी रुचि है।

अकादमिक योग्यता: भूगोल में जलवायु परिवर्तन जैसे गंभीर और संवेदनशील विषय पर पीएचडी उपाधिधारक हैं। इसके साथ ही पत्रकारिता एवं जनसंचार में स्नातकोत्तर भी हैं। पीएचडी शोध का विषय- 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन-एक भौगोलिक अध्ययन' रहा है। शोध के दौरान करीब दर्जन भर राष्ट्रीय और अंततराष्ट्रीय सम्मेलनों में शोध पत्र पढ़ने और प्रस्तुत करने का अनुभव है। भारतीय विज्ञान कांग्रेस में भी शोध पोस्टर प्रदर्शनी का चयन हो चुका है। शोध पर आधारित एक पुस्तक के लेखक हैं। पुस्तक का नाम 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन' है। पत्रकारिता में आने से पहले महाविद्यालय स्तर पर शिक्षण कार्य भी कर चुके हैं।

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