मिडिल ईस्ट जंग के बीच ताइवान स्ट्रेट में हलचल, नया मोर्चा खोलने की तैयारी में चीन?
मिडिल ईस्ट में इजरायल-अमेरिका और ईरान के बीच ताबड़तोड़ हमले और पलटवार का दौर जारी है। इस बीच एशिया से ऐसी खबर सामने आई, जिस कारण टेंशन बढ़ गई है। ताइवान के रक्षा मंत्रालय ने रविवार सुबह 6 बजे अलर्ट जारी करते हुए बताया कि ताइवान के आसपास 7 चीनी पीएलए विमान देखे गए।

मिडिल ईस्ट में इजरायल-अमेरिका और ईरान के बीच ताबड़तोड़ हमले और पलटवार का दौर जारी है। इस बीच एशिया से ऐसी खबर सामने आई, जिस कारण टेंशन बढ़ गई है। दरअसल, ताइवान के रक्षा मंत्रालय ने रविवार सुबह 6 बजे (स्थानीय समय) अलर्ट जारी करते हुए बताया कि ताइवान के आसपास 7 चीनी पीएलए (पीपुल्स लिबरेशन आर्मी) विमान देखे गए। साथ ही 7 चीनी नौसैनिक जहाज भी क्षेत्रीय जलक्षेत्र में मौजूद पाए गए।
ताइवान के राष्ट्रीय रक्षा मंत्रालय (MND) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर कहा कि ताइवान के आसपास 7 पीएलए विमान और 7 पीएलएएन (पीपुल्स लिबरेशन आर्मी नेवी) जहाज आज सुबह 6 बजे (यूटीसी+8) तक डिटेक्ट किए गए। आरओसी (रिपब्लिक ऑफ चाइना) सशस्त्र बलों ने स्थिति पर पूरी नजर रखी और उचित जवाबी कार्रवाई की। हालांकि, मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि इस दौरान ताइवान के एयर डिफेंस आइडेंटिफिकेशन जोन (ADIZ) में कोई चीनी फाइटर प्लेन घुसपैठ नहीं कर सका।
इससे एक दिन पहले शनिवार को भी ताइवान ने चीनी गतिविधियों की सूचना दी थी। मंत्रालय के अनुसार, सुबह 6 बजे तक 2 पीएलए विमान, 6 नौसैनिक जहाज और 1 सरकारी जहाज ताइवान के आसपास सक्रिय थे। इनमें से 2 विमानों ने ताइवान के दक्षिण-पश्चिमी रक्षा क्षेत्र में प्रवेश किया था। ताइवान की सेना ने स्थिति पर पैनी नजर रखते हुए मजबूत जवाबी कदम उठाए।
दरअसल, हाल के दिनों में चीनी सैन्य गतिविधियां काफी कम रही हैं। फरवरी में पीएलए के ADIZ में घुसपैठ वाले विमानों की संख्या रिकॉर्ड कम रही, और फरवरी अंत से मार्च शुरुआत तक लगभग एक सप्ताह तक कोई चीनी विमान नहीं दिखा। लेकिन अब गतिविधियां फिर शुरू हो गई हैं, जिससे तनाव बढ़ गया है।
जानकारों का कहना है कि चीन ताइवान को अपना अभिन्न अंग मानता है और बीजिंग की नीति में यह दावा राष्ट्रीय एकता का हिस्सा है। ऐतिहासिक रूप से 1683 में किंग राजवंश से लेकर 1895 में जापान को सौंपे जाने, फिर द्वितीय विश्व युद्ध के बाद चीन को वापस मिलने और 1949 के गृहयुद्ध के बाद दोहरी संप्रभुता के दावों तक का सफर रहा है। आज ताइवान खुद को स्वतंत्र पहचान वाला लोकतांत्रिक देश मानता है, जबकि चीन इसे अलगाववाद मानकर सैन्य दबाव बनाए रखता है।
यूनाइटेड सर्विस इंस्टीट्यूशन ऑफ इंडिया जैसे थिंक टैंक के अनुसार, ताइवान मुद्दा संप्रभुता, आत्मनिर्णय और अंतरराष्ट्रीय कानून की गैर-हस्तक्षेप नीति की कड़ी परीक्षा है। क्या ये चीनी गतिविधियां मिडिल ईस्ट संकट के बीच ड्रैगन की नई रणनीति का हिस्सा हैं? दुनिया की नजरें ताइवान स्ट्रेट पर टिकी हैं।
लेखक के बारे में
Devendra Kasyapदेवेन्द्र कश्यप पिछले 13 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अगस्त 2025 से वह लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर के पद पर कार्यरत हैं। संस्थान की होम टीम का वह एक अहम हिस्सा हैं। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर उनकी पैनी नजर रहती है। वायरल कंटेंट के साथ-साथ लीक से हटकर और प्रभावशाली खबरों में उनकी विशेष रुचि है।
देवेन्द्र ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत वर्ष 2013 में महुआ न्यूज से की। करियर के शुरुआती दौर में उन्होंने बिहार की राजधानी पटना में रिपोर्टिंग की। इस दौरान राजनीति के साथ-साथ क्राइम और शिक्षा बीट पर भी काम किया। इसके बाद उन्होंने जी न्यूज (बिहार-झारखंड) में अपनी सेवाएं दीं। वर्ष 2015 में ईनाडु इंडिया के साथ डिजिटल मीडिया में कदम रखा। इसके बाद राजस्थान पत्रिका, ईटीवी भारत और नवभारत टाइम्स ऑनलाइन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में कार्य किया।
मूल रूप से बिहार के भोजपुरी बेल्ट रोहतास जिले के रहने वाले देवेन्द्र कश्यप ने अपनी प्रारंभिक और उच्च शिक्षा पटना से प्राप्त की। उन्होंने पटना विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान में स्नातक की डिग्री हासिल की और MCU भोपाल से पत्रकारिता में डिप्लोमा किया। वर्तमान में वह उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में प्रवास कर रहे हैं।
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