ईरान जंग के बीच US-इजरायल में भी ठनी? नेतन्याहू सरकार ने अमेरिकी मिलिट्री विमानों की लैंडिंग क्यों रोकी
एयरपोर्ट अथॉरिटी ने चेतावनी दी है कि अगर अमेरिकी सैन्य विमानों को जल्द नहीं हटाया गया, तो एयरपोर्ट पर जगह की कमी के कारण हजारों उड़ानें प्रभावित हो सकती हैं और लगभग 50 हजार टिकट रद्द होने की नौबत आ सकती है।

ईरान और अमेरिका में फिर से शुरू हुई जंग के बीच इजरायल और अमेरिका के बीच भी ठन गई है। इज़राइल ने राजधानी तेल अवीव के बेन गुरियन इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर अब अमेरिकी मिलिट्री रिफ्यूलिंग एयरक्राफ्ट को लैंड करने से रोक दिया है। हालांकि, अमेरिका उस एयरपोर्ट पर तैनात अपने रिफ्यूलिंग टैंकर विमानों को हटाना चाहता है लेकिन इजरायल ने उस एयरपोर्ट पर अब कोई भी अमेरिकी विमान की लैंडिंग पर रोक लगा दी है। यह ईरान के साथ नए विवाद के बीच हुआ है। । इस एयरपोर्ट पर पहले से ही 30 अमेरिकी एयर फोर्स के विमान (रिफ्यूलर) पार्क किए हुए हैं।
कान न्यूज़ की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इजराइल एयरपोर्ट्स अथॉरिटी ने एक आपातकालीन निर्देश जारी किया है, जिसमें US के और रिफ्यूलिंग एयरक्राफ्ट को लैंड करने से रोकने की बात कही गई है। माना जा रहा है कि यह फैसला इजरायल की परिवहन मंत्री मिरी रेगेव के ऑफिस से आया है। अब इस कदम से इज़रायल के ट्रांसपोर्ट मिनिस्ट्री और डिफेंस मिनिस्ट्री के बीच भी मतभेद शुरू हो गए हैं। दोनों पक्ष एयरक्राफ्ट की हैंडलिंग को लेकर एक-दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं क्योंकि ईरान के साथ अमेरिका का विवाद फिर से बढ़ गया है।
सिविलियन फ्लाइट्स विवाद के केंद्र में
इजरायल ने चेतावनी दी है कि अगर और अमेरिकी विमानों की लैंडिंग की इजाजत दी गई, तो गर्मी की छुट्टियों के दौरान लगभग 50,000 यात्रियों की फ्लाइट्स रद्द हो सकती हैं। इस एयरपोर्ट पर पहले से ही लगभग 30 अमेरिकी रिफ्यूलिंग एयरक्राफ्ट खड़े हैं। ट्रांसपोर्ट मिनिस्ट्री ने कथित तौर पर कहा है कि अगर कुछ एयरक्राफ्ट नहीं हटाए गए, तो जुलाई के लिए बुक किए गए करीब 50,000 एयरलाइन टिकट फ्लाइट कैंसल होने से प्रभावित हो सकते हैं।
ट्रांसपोर्ट मिनिस्टर मिरी रेगेव ने कथित तौर पर आदेश दिया है कि एयरपोर्ट पर अमेरिकी रिफ्यूलिंग एयरक्राफ्ट की संख्या 20 से ज़्यादा नहीं होनी चाहिए। ट्रांसपोर्ट मिनिस्ट्री ने डिफेंस मिनिस्ट्री पर ईरान के साथ दुश्मनी फिर से शुरू होने के बाद एयरक्राफ्ट की वापसी की तैयारी करने में नाकाम रहने का भी आरोप लगाया है।
US ने पहले ही एयरक्राफ्ट हटाना शुरू कर दिया था
टाइम्स ऑफ़ इज़राइल की रिपोर्ट के अनुसार, इज़राइल एयरपोर्ट्स अथॉरिटी ने कहा कि ईरान के साथ हालिया तनाव के बीच यूनाइटेड स्टेट्स ने बेन गुरियन एयरपोर्ट से अपने रिफ्यूलिंग एयरक्राफ्ट को हटाने पर रोक लगा दी है।अधिकारियों ने चेतावनी दी कि अगर इज़राइल के मुख्य इंटरनेशनल एयरपोर्ट से और अमेरिकी एयरक्राफ्ट नहीं हटाए गए, तो जुलाई के पीक ट्रैवल सीज़न के दौरान 50,000 तक फ्लाइट बुकिंग खतरे में पड़ सकती हैं। इस महीने की शुरुआत में, यूनाइटेड स्टेट्स ने अपने कुछ मिलिट्री रिफ्यूलिंग एयरक्राफ्ट वापस भेजना शुरू कर दिया था, जब ईरान के खिलाफ US-इज़राइल युद्ध को हमेशा के लिए खत्म करने के मकसद से एक मेमोरेंडम ऑफ़ अंडरस्टैंडिंग पर साइन करने के बाद तनाव कम होता दिख रहा था।
लेखक के बारे में
Pramod Praveenप्रमोद कुमार प्रवीण देश-विदेश की समसामयिक घटनाओं और राजनीतिक हलचलों पर चिंतन-मंथन करने वाले और पैनी पकड़ रखने वाले हैं। ईटीवी से पत्रकारिता में करियर की शुरुआत की। कुल करीब दो दशक का इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम करने का अनुभव रखते हैं। संप्रति लाइव हिन्दुस्तान में विगत तीन से ज्यादा वर्षों से समाचार संपादक के तौर पर कार्यरत हैं और अमूमन सांध्यकालीन पारी में बहुआयामी पत्रकारीय भूमिका का निर्वहन कर रहे हैं। हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप से पहले NDTV, जनसत्ता, ईटीवी, इंडिया न्यूज, फोकस न्यूज, साधना न्यूज और ईटीवी में कार्य करने का अनुभव है। कई संस्थानों में सियासी किस्सों का स्तंभकार और लेखक रहे हैं। विश्वविद्यालय स्तर से लेकर कई अकादमिक, शैक्षणिक और सामाजिक संगठनों द्वारा विभिन्न मंचों पर अकादमिक और पत्रकारिता में उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित भी हुए हैं। रुचियों में फिल्में देखना और पढ़ना-पढ़ाना पसंद, सामाजिक और जनसरोकार के कार्यों में भी रुचि है।
अकादमिक योग्यता: भूगोल में जलवायु परिवर्तन जैसे गंभीर और संवेदनशील विषय पर पीएचडी उपाधिधारक हैं। इसके साथ ही पत्रकारिता एवं जनसंचार में स्नातकोत्तर भी हैं। पीएचडी शोध का विषय- 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन-एक भौगोलिक अध्ययन' रहा है। शोध के दौरान करीब दर्जन भर राष्ट्रीय और अंततराष्ट्रीय सम्मेलनों में शोध पत्र पढ़ने और प्रस्तुत करने का अनुभव है। भारतीय विज्ञान कांग्रेस में भी शोध पोस्टर प्रदर्शनी का चयन हो चुका है। शोध पर आधारित एक पुस्तक के लेखक हैं। पुस्तक का नाम 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन' है। पत्रकारिता में आने से पहले महाविद्यालय स्तर पर शिक्षण कार्य भी कर चुके हैं।
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