ईरान-अमेरिका संघर्ष अभी सुलझा भी नहीं, दूसरे युद्ध की आहट; चीन ने भेजे दो-दो युद्धपोत
China Taiwan Tension: इस वक्त दुनिया भर में युद्ध और वर्चस्व की जंग तेज होती जा रही है। एक ओर ईरान और अमेरिका के बीच तनाव चरम पर है, वहीं दूसरी ओर चीन ताइवान पर अपना दबदबा बढ़ाने में लगा हुआ है।

इस वक्त दुनिया भर में युद्ध और वर्चस्व की जंग तेज होती जा रही है। एक ओर ईरान और अमेरिका के बीच तनाव चरम पर है, वहीं दूसरी ओर चीन ताइवान पर अपना दबदबा बढ़ाने में लगा हुआ है। ताइवान की रक्षा मंत्रालय ने दावा किया है कि चीन के दो युद्धपोत पेंघु द्वीप समूह के निकट समुद्री क्षेत्र में देखे गए। इस घटना के तुरंत बाद ताइवान ने सतर्कता बढ़ा दी है, और अलर्ट जारी कर दिया। माना जा रहा है कि चीन की यह गतिविधि ताइवान स्ट्रेट में अपनी सैन्य मौजूदगी को और मजबूत करने की रणनीति है। फिलहाल इसको लेकर इलाके में तनाव बढ़ गया है।
ताइवान के रक्षा मंत्रालय ने सोमवार देर रात जारी बयान में बताया कि पेंघु द्वीपों के दक्षिण-पश्चिमी जल क्षेत्र में एक चीनी विध्वंसक (डिस्ट्रॉयर) और एक फ्रिगेट घुस आए थे। रक्षा मंत्रालय के अनुसार, इन चीनी जहाजों की निगरानी के लिए ताइवानी नौसेना और वायुसेना को तैनात कर दिया गया है। ताइवानी सशस्त्र बलों ने चीनी गठन पर सख्त नजर रखी और उचित जवाबी कार्रवाई भी की। हालांकि, जवाबी कार्रवाई के बारे में अधिक जानकारी नहीं दी गई। मंत्रालय ने दोनों चीनी युद्धपोतों की हवाई मार्ग से ली गई रंगीन तस्वीरें भी जारी की हैं, लेकिन सटीक स्थान को लेकर कोई जानकारी नहीं दी।
चीन की लगातार घुसपैठ
दरअसल, चीन ताइवान को अपना अभिन्न अंग मानता है और लोकतांत्रिक रूप से शासित इस द्वीप के चारों ओर लगभग रोजाना युद्धपोत तथा लड़ाकू विमान भेजता रहता है। ताइवान सरकार की बार-बार निंदा के बावजूद चीन अपनी इन सैन्य गतिविधियों को जारी रखे हुए है। गौरतलब है कि ताइवान रक्षा मंत्रालय सामान्य तौर पर चीनी सैन्य विमानों की दैनिक गतिविधियों की जानकारी नियमित रूप से जारी करता है, लेकिन युद्धपोतों के संचालन पर कम ही विस्तृत जानकारी देता है। विस्तृत बयान केवल तभी जारी किया जाता है, जब विमानवाहक पोत शामिल होते हैं।
चीनी दावों पर ताइवान का पलटवार
इस महीने की शुरुआत में चीन के रक्षा मंत्रालय ने कहा था कि ताइवान के आसपास उसकी नियमित सैन्य गतिविधियां 'पूरी तरह न्यायसंगत और उचित' हैं तथा तनाव के लिए ताइपे सरकार जिम्मेदार है। हालांकि, ताइवान बीजिंग के संप्रभुता के दावों को पूरी तरह खारिज करता है और स्पष्ट रूप से कहता है कि ताइवान का भविष्य तय करने का अधिकार केवल द्वीप के लोगों को है। वहीं, अभी तक चीन के रक्षा मंत्रालय ने इस घटना पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है।
लेखक के बारे में
Devendra Kasyapदेवेन्द्र कश्यप पिछले 13 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अगस्त 2025 से वह लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर के पद पर कार्यरत हैं। संस्थान की होम टीम का वह एक अहम हिस्सा हैं। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर उनकी पैनी नजर रहती है। वायरल कंटेंट के साथ-साथ लीक से हटकर और प्रभावशाली खबरों में उनकी विशेष रुचि है।
देवेन्द्र ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत वर्ष 2013 में महुआ न्यूज से की। करियर के शुरुआती दौर में उन्होंने बिहार की राजधानी पटना में रिपोर्टिंग की। इस दौरान राजनीति के साथ-साथ क्राइम और शिक्षा बीट पर भी काम किया। इसके बाद उन्होंने जी न्यूज (बिहार-झारखंड) में अपनी सेवाएं दीं। वर्ष 2015 में ईनाडु इंडिया के साथ डिजिटल मीडिया में कदम रखा। इसके बाद राजस्थान पत्रिका, ईटीवी भारत और नवभारत टाइम्स ऑनलाइन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में कार्य किया।
मूल रूप से बिहार के भोजपुरी बेल्ट रोहतास जिले के रहने वाले देवेन्द्र कश्यप ने अपनी प्रारंभिक और उच्च शिक्षा पटना से प्राप्त की। उन्होंने पटना विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान में स्नातक की डिग्री हासिल की और MCU भोपाल से पत्रकारिता में डिप्लोमा किया। वर्तमान में वह उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में प्रवास कर रहे हैं।
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