प्लेन में आए मच्छर, एयरपोर्ट पर मचा कहर; जर्मनी में मलेरिया से 2 कर्मचारियों की मौत पर बवाल

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'एयरपोर्ट मलेरिया' एक बेहद दुर्लभ स्थिति है, जिसमें मलेरिया प्रभावित क्षेत्रों, जैसे सब-सहारा अफ्रीका से आने वाली उड़ानों के जरिए मच्छर ऐसे देशों के हवाई अड्डों तक पहुंच जाते हैं, जहां इसके मामले नहीं होते।

Germany Airport malaria
यह संक्रमण किसी अंतरराष्ट्रीय विमान में बैठकर आए एनोफिलीज मच्छर के काटने से फैला है।

जर्मनी के सबसे व्यस्त फ्रैंकफर्ट एयरपोर्ट पर एक दुर्लभ 'एयरपोर्ट मलेरिया' (Airport Malaria) का प्रकोप सामने आया है। एयरपोर्ट ऑपरेटर 'फ्रापोर्ट' और स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार, जुलाई से अब तक कुल 6 कर्मचारी संक्रमित पाए गए थे, जिनमें से 2 कर्मचारियों की मौत हो चुकी है। अधिकारियों का मानना है कि यह संक्रमण किसी अंतरराष्ट्रीय विमान में बैठकर आए एनोफिलीज मच्छर के काटने से फैला है।

'एयरपोर्ट मलेरिया' क्या है?

'एयरपोर्ट मलेरिया' एक बेहद दुर्लभ स्थिति है, जिसमें मलेरिया प्रभावित क्षेत्रों, जैसे सब-सहारा अफ्रीका से आने वाली उड़ानों के जरिए मच्छर ऐसे देशों के हवाई अड्डों तक पहुंच जाते हैं, जहां मलेरिया का प्रकोप या तो एकदम नहीं या बेहद कम है। ये मच्छर फिर वहां काम करने वाले या रहने वाले लोगों को काट लेते हैं।

रॉबर्ट कोच इंस्टीट्यूट (RKI) के अनुसार, संक्रमित हुए कर्मचारियों ने हाल ही में किसी मलेरिया प्रभावित देश की यात्रा नहीं की थी, जिससे यह साफ हुआ कि उन्हें संक्रमण एयरपोर्ट परिसर में ही मिला।

गैर-स्थानिक देशों में डॉक्टरों की तरफ से शुरुआती स्तर पर मलेरिया का शक न जता पाना मौत का एक बड़ा कारण बनता है। पहला मामला सामने आने पर मरीज की मृत्यु के बाद ही मलेरिया की पुष्टि हो सकी थी।

क्या जर्मनी में नहीं हैं मच्छर या मलेरिया?

ऐसा नहीं है, जर्मनी में भी मच्छर होते हैं और कई प्रकार के हैं। हालांकि, जर्मनी में मलेरिया फैलाने वाले एनोफिलीज (Anopheles) मच्छर भी पाए जाते हैं, लेकिन स्थानीय रूप से मलेरिया का खतरा बहुत कम है, क्योंकि जर्मनी में मलेरिया लगभग खत्म हो चुका है।

साल 2024 तक के आंकड़े बताते हैं कि पूरे जर्मनी में मच्छरों की 53 प्रजातियां हैं, जिसमें 9 प्रजातियां मलेरिया फैलाने वाले मच्छरों की हैं, जो अलग-अलग हिस्सों में फैले हैं। हालांकि, इनका असर बेहद न के बराबर है।

दरअसल 19वीं-20वीं सदी में जर्मनी में मलेरिया स्थानिक (endemic) था, खासकर दलदली इलाकों में। 1950-1960 में मलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम के बाद स्थानीय मलेरिया खत्म हो गया।

अगर वर्तमान हालात पर नजर डालें, तो जर्मनी में स्थानीय रूप से मलेरिया नहीं फैलता है। हर साल 1,000 ज्यादा मलेरिया के केस यात्रियों से आते हैं, लेकिन स्थानीय स्तर पर यह नहीं फैलता। एयरपोर्ट मलेरिया की बात करें, तो यह बहुत दुर्लभ है। 1969-2024 तक पूरी दुनिया में इसके 145 मामले हैं, जिनमें 9 जर्मनी में हैं।

वर्तमान स्थिति और बचाव के उपाय

6 में से 2 कर्मचारियों की मौत के बाद बाकी बचे 4 अन्य कर्मचारियों का अस्पताल में इलाज चल रहा है और वे खतरे से बाहर हैं।

एयरपोर्ट परिसर में जगह-जगह खास तरह की मच्छरदानी लगाई गई हैं। पकड़े गए मच्छरों की प्रजाति और उत्पत्ति का पता लगाने के लिए सैंपल को एंटवर्प (बेल्जियम) स्थित 'इंस्टीट्यूट ऑफ ट्रॉपिकल मेडिसिन' में जांच के लिए भेजा गया है।

फ्रैंकफर्ट स्वास्थ्य विभाग के निदेशक पीटर टिनेमैन ने साफ किया है कि मलेरिया एक इंसान से दूसरे इंसान में संपर्क के जरिए नहीं फैलता। इसलिए सामान्य यात्रियों या शहर के निवासियों के लिए कोई खतरा नहीं है।

स्वास्थ्य विभाग और फ्रापोर्ट ने हवाई अड्डे के सभी कर्मचारियों के लिए चेतावनी जारी की है कि अगर उन्हें बुखार, सिरदर्द या फ्लू जैसे लक्षण दिखाई दें, तो वे तुरंत डॉक्टर को सूचित करें कि वे एयरपोर्ट पर काम करते हैं।

Shubham Sharma

लेखक के बारे में

Shubham Sharma
शुभम शर्मा साल 2017 से पत्रकारिता और मीडिया जगत में काम कर रहे हैं। टीवी में इनपुट असाइनमेंट से शुरुआत करते हुए डिजिटल मीडिया की दुनिया में कदम रखा। ग्राउंड रिपोर्टिंग से लेकर डेस्क तक का अनुभव। TV9 भारतवर्ष और मनीकंट्रोल हिंदी (Network 18) जैसे बड़े संस्थानों के बाद अब लाइव हिंदुस्तान में बतौर चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर खबरों को आप तक पहुंचाने के काम कर रहे हैं। और पढ़ें

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