AI आसान बना देगी मेडिकल रिपोर्ट्स, मरीज भी समझ लेंगे क्या है समस्या; शोध में दावा

Feb 17, 2026 03:56 pm ISTDeepak Mishra लाइव हिन्दुस्तान, लंदन
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पिछले कुछ वक्त में आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस का दखल बढ़ा है। इसी कड़ी में अब मेडिकल फील्ड में भी अब एआई वरदान साबित होने वाला है। यूनिवर्सिटी ऑफ शेफील्ड की स्टडी के मुताबिक बहुत जल्द ही एआई की मदद से मरीज कठिन मेडिकल स्कैन रिपोर्ट्स को पढ़ने में सक्षम होंगे।

AI आसान बना देगी मेडिकल रिपोर्ट्स, मरीज भी समझ लेंगे क्या है समस्या; शोध में दावा

पिछले कुछ वक्त में आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस का दखल बढ़ा है। इसी कड़ी में अब मेडिकल फील्ड में भी अब एआई वरदान साबित होने वाला है। यूनिवर्सिटी ऑफ शेफील्ड की स्टडी के मुताबिक बहुत जल्द ही एआई की मदद से मरीज कठिन मेडिकल स्कैन रिपोर्ट्स को पढ़ने में सक्षम होंगे। इसकी बदौलत वह ज्यादा सटीकता के साथ मेडिकल रिपोर्ट्स को पढ़ सकेंगे। अध्ययन में पाया गया कि जब एक्स-रे, सीटी और एमआरआई स्कैन की रेडियोलॉजी रिपोर्टों को चैटजीपीटी जैसे उन्नत एआई सिस्टम का उपयोग करके री-राइट किया गया, तो मरीजों के लिए उन्हें समझना दोगुना आसान हो गया।

विश्लेषण से पता चला कि यह इतना आसान हो गया, जिसे 11-13 साल का स्कूली छात्र भी आसानी से समझ सकता है। शोध के निष्कर्षों से सुझाव मिलता है कि एआई की सहायता से मिली डिटेल रिपोर्ट्स मेडिकल रिपोर्ट्स के साथ एक मानक साथी बन सकती हैं। यह स्वास्थ्य प्रणाली, जिसमें नेशनल हेल्थ सर्विस (एनएचएस) भी शामिल है, में पारदर्शिता और विश्वास बढ़ाने में मदद कर सकती हैं।

इसके लिए शोधकर्ताओं ने 2022 से 2025 के बीच प्रकाशित 38 स्टडीज का अध्ययन किया। इसमें 12 हजार से ज्यादा रेडियोलॉजिकल रिपोर्ट्स को एआई की मदद से सरल किया गया। दोबारा लिखी गई इन रिपोर्ट्स को मरीजों, आम लोगों ने भी पढ़ा। इस दौरान पाया गया कि मरीजों को रिपोर्ट्स बेहतर ढंग से समझ में आईं। बता दें कि रेडियोलॉजी रिपोर्ट्स परंपरागत रूप से मरीजों नहीं, बल्कि डॉक्टरों के लिए लिखा जाता है। हालांकि अब इस बात पर जोर दिया जा रहा है कि इन रिपोर्ट्स को इस तरह से बनाया जाए, ताकि मरीज भी इसे आसानी से पढ़ और समझ सकें।

इस स्टडी के मुख्य लेखक, डॉ. समीर अलाबेड, सीनियर क्लीनिकल रिसर्च फेलो, यूनिवर्सिटी ऑफ शेफ़ील्ड और शेफ़ील्ड टीचिंग हॉस्पिटल्स एनएचएस फाउंडेशन ट्रस्ट में मानद सलाहकार कार्डियो रेडियोलॉजिस्ट हैं। इन सभी ने कहा कि इन रिपोर्टों की मूल समस्या यह है कि इन्हें मरीजों के दृष्टिकोण से नहीं लिखा गया है। ये अक्सर तकनीकी शब्दावली और संक्षिप्त रूपों से भरी होती हैं जिन्हें आसानी से गलत समझा जा सकता है, जिससे अनावश्यक चिंता, गलत आश्वासन और भ्रम उत्पन्न होता है। ऐसे में कम पढ़े-लिखे मरीजों या ऐसे मरीज, जिनकी अंग्रेजी ठीक नहीं है, उन्हें बहुत नुकसान होता है। इसका नुकसान यह होता है कि डॉक्टर का समय मरीजों को रिपोर्ट्स समझाने में चला जाता है। जबकि यह समय मरीजों की देखभाल और उपचार में लगना चाहिए।

Deepak Mishra

लेखक के बारे में

Deepak Mishra
दीपक मिश्र मीडिया इंडस्ट्री में करीब 17 साल का अनुभव रखते हैं। खेल, सिनेमा और राजनीति पर प्रमुखता से काम किया है। खासतौर पर खेल की खबरों से जुनून की हद तक मोहब्बत है। 2011 में क्रिकेट वर्ल्ड कप और 2014 में फीफा फुटबॉल वर्ल्ड कप प्रमुखता से कवर कर चुके हैं। फोटोग्राफी और मोबाइल वीडियो स्टोरी के साथ-साथ पॉडकास्ट में विशेष रुचि रखते हैं। दैनिक जागरण-आई नेक्स्ट के साथ काम करते हुए कई वीडियो स्टोरीज पर काम किया। इसी दौरान आईपीएल पर पॉडकास्ट के साथ एक अन्य पॉडकास्ट ‘शहर का किस्सा’ भी कर चुके हैं। पूर्वांचल विश्वविद्यालय जौनपुर से मास्टर ऑफ मास कम्यूनिकेशन की पढ़ाई के बाद आज अखबार के साथ पत्रकारिता की शुरुआत हुई। इसके बाद दैनिक जागरण-आई नेक्स्ट और पत्रिका अखबार में काम किया है। आई नेक्स्ट की डिजिटल विंग में काम करते हुए कई नए और रोचक प्रयोग किए। लाइव हिन्दुस्तान में चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर के तौर पर काम कर रहे हैं। और पढ़ें

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