सस्ता आटा नहीं दे पा रहा पाकिस्तान, पीओके में बवाल; विधानसभा की 12 सीटें रद्द करने की भी मांग
पाकिस्तानी मीडिया के मुताबिक, सरकार ने अब JAAC के चार वांटेड नेताओं की गिरफ्तारी के लिए जानकारी देने वाले को 1 करोड़ रुपये (पाकिस्तानी) का इनाम देने की घोषणा की

Clash in PoK: पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में पिछले कुछ दिनों से तनाव चरम पर है। स्थानीय प्रशासन द्वारा जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) के खिलाफ की जा रही सख्त कार्रवाई के बाद स्थिति हिंसक हो चुकी है। सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारियों के बीच हुई झड़पों में कई लोगों की मौत, बड़े पैमाने पर गिरफ्तारियों और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ती चिंताओं ने इस संकट को और गहरा कर दिया है। यह ताजा विवाद तब और बढ़ गया जब पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर की सरकार ने JAAC को एक गैर-कानूनी संगठन घोषित करते हुए उस पर प्रतिबंध लगा दिया। सरकार ने आरोप लगाया कि यह संगठन सार्वजनिक व्यवस्था और सुरक्षा के लिए खतरा बन चुका है।
पाकिस्तानी मीडिया के मुताबिक, सरकार ने अब JAAC के चार वांटेड नेताओं की गिरफ्तारी के लिए जानकारी देने वाले को 1 करोड़ रुपये (पाकिस्तानी) का इनाम देने की घोषणा की है। वांटेड नेताओं में शौकत नवाज मीर, उमर नजीर कश्मीरी, मेहरान अरशद ख्वाजा और सरदार अमन के नाम शामिल हैं।
सस्ते आटे की मांग से शुरू हुआ था आंदोलन
PoK में जारी यह अशांति अचानक पैदा नहीं हुई है। JAAC ने शुरुआत में बुनियादी आर्थिक मुद्दों को लेकर जनसमर्थन जुटाया था। शुरुआती मांगों में सब्सिडी वाला सस्ता आटा, सस्ती बिजली और बढ़ती जीवन यापन लागत यानी की महंगाई से राहत शामिल है। धीरे-धीरे इस आंदोलन का दायरा बढ़ा और प्रदर्शनकारियों ने प्रशासनिक जवाबदेही और बड़े संवैधानिक सुधारों की मांग शुरू कर दी।
12 रिफ्यूजी सीटों को खत्म करने का मुख्य विवाद
वर्तमान में प्रदर्शनों और गुस्से की सबसे बड़ी वजह PoJK विधानसभा की 12 आरक्षित सीटें हैं। ये सीटें 1947 के बाद पाकिस्तान के मुख्य भूभाग में जाकर बसने वाले जम्मू-कश्मीर के शरणार्थियों के लिए आरक्षित हैं। JAAC का तर्क है कि इन 12 सीटों का इस्तेमाल पाकिस्तान की मुख्य राजनीतिक पार्टियां मुजफ्फरबाद में अपनी मर्जी की सरकार बनाने और राजनीतिक हेरफेर करने के लिए करती आई हैं, इसलिए इन सीटों को तुरंत खत्म किया जाना चाहिए।
मुजफ्फरबाद, मीरपुर और कोटली में पूर्ण बंद
पाकिस्तानी अखबार डॉन के अनुसार, मंगलवार को मुजफ्फरबाद में पूरी तरह से शटडाउन देखा गया। बाजार पूरी तरह बंद रहे, सड़कों पर सन्नाटा पसरा रहा और भारी संख्या में दंगा नियंत्रण पुलिस और अर्धसैनिक बलों को तैनात किया गया था। इस कड़ी कार्रवाई के बावजूद मीरपुर, कोटली और अन्य जिलों में सैकड़ों प्रदर्शनकारियों ने रैलियां निकालीं और हड़ताल की।
हिंसक झड़पें
रावलकोट और अन्य क्षेत्रों में स्थिति तब और बिगड़ गई जब प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच हिंसक झड़पें हुईं। इन झड़पों में आम नागरिकों और सुरक्षाकर्मियों दोनों की जान गई है, जिसके बाद इस्लामाबाद से अतिरिक्त संघीय अर्धसैनिक बलों को इस क्षेत्र में भेजा गया है। PoK के प्रधानमंत्री फैसल मुमताज राठौर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर बातचीत की अपील की है। उन्होंने कहा कि विवादों का हल टकराव से नहीं बल्कि बातचीत से होना चाहिए। उन्होंने तर्क दिया कि संवैधानिक बदलाव विधायी प्रक्रियाओं के जरिए ही हो सकते हैं, केवल सड़कों पर विरोध प्रदर्शन से नहीं।
ब्रिटेन के ब्रैडफोर्ड में कश्मीरी प्रवासियों ने पाकिस्तानी वाणिज्य दूतावास के बाहर विरोध प्रदर्शन किया और अत्यधिक बल प्रयोग का आरोप लगाया। ब्रैडफोर्ड ईस्ट के सांसद इमरान हुसैन के नेतृत्व में दर्जनों ब्रिटिश सांसदों ने ब्रिटेन सरकार से इस मामले में राजनयिक हस्तक्षेप करने का अनुरोध किया है, जहां संचार पाबंदियां और गिरफ्तारियां की जा रही हैं।
लेखक के बारे में
Himanshu Jhaबिहार के दरभंगा जिले से ताल्लुक रखने वाले हिमांशु शेखर झा डिजिटल मीडिया जगत का एक जाना-माना नाम हैं। विज्ञान पृष्ठभूमि से होने के बावजूद (BCA और MCA), पत्रकारिता के प्रति अपने जुनून के कारण उन्होंने IGNOU से पत्रकारिता में डिप्लोमा किया और मीडिया को ही अपना कर्मक्षेत्र चुना।
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