Explainer: बलूचिस्तान आजाद, PoK में कोहराम: अब पाक ने चला गिलगित-बाल्टिस्तान पर जहरीला 'पांचवां' दांव; क्या प्लान?
इस प्रस्ताव में संघीय सरकार से संविधान में संशोधन करने, गिलगित-बाल्टिस्तान को पूर्ण प्रांतीय दर्जा देने और पाकिस्तान की नेशनल असेंबली और सीनेट में इसका प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने का आग्रह किया गया है।

पड़ोसी देश पाकिस्तान इन दिनों चौतरफा संकटों से घिरा हुआ है। बावजूद इसके वह अपनी खुराफातों से बाज नहीं आ रहा है। इसी कड़ी में पाकिस्तान ने एक बार फिर अपनी आंतरिक विफलताओं को छिपाने के लिए एक खतरनाक और 'नापाक' दांव खेला है। बलूचिस्तान में आजादी की गूंज और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में भड़की विद्रोह की आग के बीच, शहबाज सरकार ने विवादास्पद कदम उठाते हुए अब गिलगित-बाल्टिस्तान को पांचवां प्रांत बनाने का प्लान बनाया है। यह कदम हाल ही में हुए उन चुनावों के बाद उठाया गया है, जिनमें धांधली के गंभीर आरोप लगे थे और बिलावल भुट्टो की पीपीपी और प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की पीएमएल-एन ने मिलकर बंदरबांट वाली गठबंधन सरकार बनाई है।
बड़ी बात यह है कि यह इलाका विवादित क्षेत्र में आता है और वहां की विधानसभा ने संवैधानिक मान्यता की मांग करते हुए सर्वसम्मति से एक प्रस्ताव पारित किया है। इस प्रस्ताव में संघीय सरकार से संविधान में संशोधन करने, गिलगित-बाल्टिस्तान को पूर्ण प्रांतीय दर्जा देने और पाकिस्तान की नेशनल असेंबली और सीनेट में इसका प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने का आग्रह किया गया है। इस प्रस्ताव को अब पाकिस्तान की संसद के पास भेजा जाएगा। अगर संसद संविधान संशोधन को मंजूरी देती है तो गिलगित-बाल्टिस्तान को औपचारिक रूप से पाकिस्तान का प्रांत बनाने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
ध्यान भटकाने की नापाक कोशिश
गौर करने वाली बात यह है कि यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब पाकिस्तान कई घरेलू चुनौतियों का सामना कर रहा है, जिसमें बलूचिस्तान में बिगड़ती सुरक्षा स्थिति और खैबर पख्तूनख्वा में उग्रवादी हमलों में बढ़ोत्तरी शामिल है। विदेश नीति के मोर्चे पर भी पाकिस्तान अब सऊदी अरब और ईरान के झगड़े में पिस रहा है और उसे खुद पर हमला होने की आशंका गहरा रही है। ऐसे में विशेषज्ञों का मानना है कि यह पाकिस्तान की एक सोची-समझी 'डाइवर्जनरी टैक्टिक' है। बता दें कि गिलगित-बाल्टिस्तान का इलाका हिमालय, काराकोरम और हिंदूकुश पर्वत श्रृंखलाओं में फैला हुआ है और इसमें K2 सहित दुनिया की कई सबसे ऊंची चोटियां और ग्लेशियर शामिल हैं।
पाक सेना की उड़ी है नींद
एक तरफ बलूचिस्तान में आजादी के ऐलान वाले वायरल पत्रों ने सेना की नींद उड़ा रखी है, तो दूसरी तरफ खैबर पख्तूनख्वा में आतंकी हमलों की बाढ़ आई हुई है। अपनी गिरती अर्थव्यवस्था और सुरक्षा व्यवस्था को संभालने में नाकाम रही पाक सरकार अब इस विवादित मुद्दे को हवा देकर जनता का ध्यान भटकाना चाहती है। आलोचकों ने सरकार पर आरोप लगाया है कि वह लंबे समय से लंबित प्रस्ताव को फिर से शुरू करके जनता का ध्यान इन आंतरिक संकटों से हटाने की कोशिश कर रही है। पाकिस्तान में वर्तमान में चार प्रांत हैं: पंजाब, सिंध, बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा। वहीं, गिलगित-बाल्टिस्तान सीमित स्व-शासन ढांचे के तहत शासित होता है और उसे देश के प्रांतों जैसा संवैधानिक दर्जा प्राप्त नहीं है। लिहाजा, पाकिस्तान ने उसे पांचवें प्रांत के रूप में मान्यता देने के लिए ही यह चाल चली है।
2019 के बाद फिर तेज हुई कोशिश
गिलगित-बाल्टिस्तान को पाकिस्तान का पांचवां प्रांत बनाने का मुद्दा नया नहीं है। 2019 में भारत द्वारा अनुच्छेद 370 और 35A हटाने के बाद पाकिस्तान ने पहली बार इस दिशा में पहल की थी, लेकिन तत्कालीन इमरान खान सरकार इसे आगे नहीं बढ़ा सकी थी। अब हालिया विधानसभा चुनाव के बाद बनी पीपीपी और पीएमएल-एन गठबंधन सरकार ने इस प्रस्ताव को फिर से संसद में भेज दिया है।
भारत का करारा जवाब: "था, है और रहेगा हमारा!"
पाकिस्तान की इस हिमाकत पर भारत ने बेहद कड़ा और आक्रामक रुख अपनाया है। विदेश मंत्रालय ने दो टूक शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा है कि "गिलगित-बाल्टिस्तान समेत पूरा जम्मू-कश्मीर और लद्दाख भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा था, है और हमेशा रहेगा।" नई दिल्ली ने पाकिस्तान द्वारा अपने नियंत्रण वाले इलाकों का दर्जा बदलने की कोशिशों का बार-बार विरोध किया है और कहा है कि ऐसे एकतरफा कदमों का कोई कानूनी आधार नहीं है। शुक्रवार को पत्रकारों से बात करते हुए विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत का हमेशा से यह रुख रहा है कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के केंद्र शासित प्रदेश "भारत का अभिन्न हिस्सा थे, हैं और हमेशा रहेंगे।"
लेखक के बारे में
Pramod Praveenप्रमोद कुमार प्रवीण देश-विदेश की समसामयिक घटनाओं और राजनीतिक हलचलों पर चिंतन-मंथन करने वाले और पैनी पकड़ रखने वाले हैं। ईटीवी से पत्रकारिता में करियर की शुरुआत की। कुल करीब दो दशक का इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम करने का अनुभव रखते हैं। संप्रति लाइव हिन्दुस्तान में विगत तीन से ज्यादा वर्षों से समाचार संपादक के तौर पर कार्यरत हैं और अमूमन सांध्यकालीन पारी में बहुआयामी पत्रकारीय भूमिका का निर्वहन कर रहे हैं। हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप से पहले NDTV, जनसत्ता, ईटीवी, इंडिया न्यूज, फोकस न्यूज, साधना न्यूज और ईटीवी में कार्य करने का अनुभव है। कई संस्थानों में सियासी किस्सों का स्तंभकार और लेखक रहे हैं। विश्वविद्यालय स्तर से लेकर कई अकादमिक, शैक्षणिक और सामाजिक संगठनों द्वारा विभिन्न मंचों पर अकादमिक और पत्रकारिता में उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित भी हुए हैं। रुचियों में फिल्में देखना और पढ़ना-पढ़ाना पसंद, सामाजिक और जनसरोकार के कार्यों में भी रुचि है।
अकादमिक योग्यता: भूगोल में जलवायु परिवर्तन जैसे गंभीर और संवेदनशील विषय पर पीएचडी उपाधिधारक हैं। इसके साथ ही पत्रकारिता एवं जनसंचार में स्नातकोत्तर भी हैं। पीएचडी शोध का विषय- 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन-एक भौगोलिक अध्ययन' रहा है। शोध के दौरान करीब दर्जन भर राष्ट्रीय और अंततराष्ट्रीय सम्मेलनों में शोध पत्र पढ़ने और प्रस्तुत करने का अनुभव है। भारतीय विज्ञान कांग्रेस में भी शोध पोस्टर प्रदर्शनी का चयन हो चुका है। शोध पर आधारित एक पुस्तक के लेखक हैं। पुस्तक का नाम 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन' है। पत्रकारिता में आने से पहले महाविद्यालय स्तर पर शिक्षण कार्य भी कर चुके हैं।
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