पत्नी ‘गुलाम’, पति ‘मालिक’; इस मुस्लिम देश में घरेलू हिंसा को मिल गया कानूनी लाइसेंस
सबसे चिंताजनक बात यह है कि अगर कोई महिला अपने साथ हुई गंभीर हिंसा साबित भी कर दे, तो आरोपी को न्यूनतम 15 दिन की जेल ही हो सकती है। जानकारों ने इस पर चिंता जाहिर की है।

अफगानिस्तान में महिलाओं की दयनीय हालत छिपी नहीं है। 2021 में तालिबान के सत्ता संभालने के बाद से यहां महिलाओं के अधिकारों का लगातार दोहन हुआ है। तालिबानी हुकूमत ने देश में महिलाओं के पढ़ने, लिखने, बाहर जाने, यहां तक कि सार्वजनिक जगहों पर हंसने तक पर प्रतिबंध लगा दिया है। इस बीच अब अफगानिस्तान में महिलाओं के खिलाफ हिंसा को भी कानूनी लाइसेंस दे दिया गया है। तालिबान के सर्वोच्च नेता हिबतुल्लाह अखुंदजादा ने हाल ही में 90 पन्नों वाली नई दंड संहिता पर हस्ताक्षर किए हैं। यह कानून महिलाओं के लिए सजा से कम नहीं है।
नए नियमों को आधिकारिक रूप से ‘दे महाकुमु जजाई उसूलनामा’ का नाम दिया गया है। तालिबान सरकार द्वारा पूरे देश में लागू किए जाने वाले इस कानून के तहत सजा की प्रकृति इस आधार पर तय की जाएगी कि पीड़ित व्यक्ति ‘आजाद’ है या ‘गुलाम’। इस व्यवस्था में समाज को ऊंचे और निचले दर्जे में बांटने की बात कही गई है।
ऊपरी श्रेणी में धार्मिक नेता और मुल्ला शामिल होंगे, जबकि निचली श्रेणी के लोगों पर शारीरिक दंड को अधिक स्वीकार्य माना गया है। इसमें महिलाओं को व्यवहारिक रूप से 'गुलाम' की श्रेणी में रखा गया है और पति को 'स्वामी' का दर्जा दिया गया है।
नए नियमों के तहत गंभीर अपराधों की सुनवाई इस्लामी मौलवियों द्वारा की जाएगी। कम गंभीर मामलों में ‘ताज़ीर’ नाम की वैकल्पिक सजा लागू होगी, जिसके तहत पति अपनी पत्नी को दंड दे सकता है। हालांकि पत्नी पर शारीरिक हिंसा के मामलों में न्याय की स्पष्ट व्यवस्था नहीं दी गई है। अगर कोई महिला घरेलू हिंसा की शिकायत करना चाहती है, तो उसे धार्मिक जज के सामने गंभीर शारीरिक चोट का सबूत पेश करना होगा। साथ ही उसे पूरी तरह ढका हुआ पहनावा पहनना होगा और एक पुरुष संरक्षक की मौजूदगी जरूरी होगी, जो अधिकतर मामलों में उसका पति ही होता है। सबसे चिंताजनक बात यह है कि अगर कोई महिला अपने साथ हुई गंभीर हिंसा साबित भी कर दे, तो आरोपी को न्यूनतम 15 दिन की जेल ही हो सकती है।
विश्लेषकों का मानना है कि इस कानून से महिलाओं के खिलाफ हिंसा बेलगाम हो सकती है। काबुल की एक महिला कानूनी सलाहकार ने टाइला न्यूज को बताया कि महिलाओं के लिए न्याय पाना अब बेहद लंबी और मुश्किल प्रक्रिया हो जाएगी। उन्होंने एक मामले का जिक्र किया, जिसमें एक महिला को जेल में बंद अपने पति से मिलने के दौरान बिना पुरुष संरक्षक के जाने पर पीटा गया। महिला ने सार्वजनिक रूप से कहा कि वह इस प्रक्रिया से गुजरने से बेहतर मौत को समझती है।
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