पत्नी ‘गुलाम’, पति ‘मालिक’; इस मुस्लिम देश में घरेलू हिंसा को मिल गया कानूनी लाइसेंस

Feb 18, 2026 11:48 am ISTJagriti Kumari लाइव हिन्दुस्तान
share Share
Follow Us on

सबसे चिंताजनक बात यह है कि अगर कोई महिला अपने साथ हुई गंभीर हिंसा साबित भी कर दे, तो आरोपी को न्यूनतम 15 दिन की जेल ही हो सकती है। जानकारों ने इस पर चिंता जाहिर की है।

पत्नी ‘गुलाम’, पति ‘मालिक’; इस मुस्लिम देश में घरेलू हिंसा को मिल गया कानूनी लाइसेंस

अफगानिस्तान में महिलाओं की दयनीय हालत छिपी नहीं है। 2021 में तालिबान के सत्ता संभालने के बाद से यहां महिलाओं के अधिकारों का लगातार दोहन हुआ है। तालिबानी हुकूमत ने देश में महिलाओं के पढ़ने, लिखने, बाहर जाने, यहां तक कि सार्वजनिक जगहों पर हंसने तक पर प्रतिबंध लगा दिया है। इस बीच अब अफगानिस्तान में महिलाओं के खिलाफ हिंसा को भी कानूनी लाइसेंस दे दिया गया है। तालिबान के सर्वोच्च नेता हिबतुल्लाह अखुंदजादा ने हाल ही में 90 पन्नों वाली नई दंड संहिता पर हस्ताक्षर किए हैं। यह कानून महिलाओं के लिए सजा से कम नहीं है।

नए नियमों को आधिकारिक रूप से ‘दे महाकुमु जजाई उसूलनामा’ का नाम दिया गया है। तालिबान सरकार द्वारा पूरे देश में लागू किए जाने वाले इस कानून के तहत सजा की प्रकृति इस आधार पर तय की जाएगी कि पीड़ित व्यक्ति ‘आजाद’ है या ‘गुलाम’। इस व्यवस्था में समाज को ऊंचे और निचले दर्जे में बांटने की बात कही गई है।

ऊपरी श्रेणी में धार्मिक नेता और मुल्ला शामिल होंगे, जबकि निचली श्रेणी के लोगों पर शारीरिक दंड को अधिक स्वीकार्य माना गया है। इसमें महिलाओं को व्यवहारिक रूप से 'गुलाम' की श्रेणी में रखा गया है और पति को 'स्वामी' का दर्जा दिया गया है।

नए नियमों के तहत गंभीर अपराधों की सुनवाई इस्लामी मौलवियों द्वारा की जाएगी। कम गंभीर मामलों में ‘ताज़ीर’ नाम की वैकल्पिक सजा लागू होगी, जिसके तहत पति अपनी पत्नी को दंड दे सकता है। हालांकि पत्नी पर शारीरिक हिंसा के मामलों में न्याय की स्पष्ट व्यवस्था नहीं दी गई है। अगर कोई महिला घरेलू हिंसा की शिकायत करना चाहती है, तो उसे धार्मिक जज के सामने गंभीर शारीरिक चोट का सबूत पेश करना होगा। साथ ही उसे पूरी तरह ढका हुआ पहनावा पहनना होगा और एक पुरुष संरक्षक की मौजूदगी जरूरी होगी, जो अधिकतर मामलों में उसका पति ही होता है। सबसे चिंताजनक बात यह है कि अगर कोई महिला अपने साथ हुई गंभीर हिंसा साबित भी कर दे, तो आरोपी को न्यूनतम 15 दिन की जेल ही हो सकती है।

विश्लेषकों का मानना है कि इस कानून से महिलाओं के खिलाफ हिंसा बेलगाम हो सकती है। काबुल की एक महिला कानूनी सलाहकार ने टाइला न्यूज को बताया कि महिलाओं के लिए न्याय पाना अब बेहद लंबी और मुश्किल प्रक्रिया हो जाएगी। उन्होंने एक मामले का जिक्र किया, जिसमें एक महिला को जेल में बंद अपने पति से मिलने के दौरान बिना पुरुष संरक्षक के जाने पर पीटा गया। महिला ने सार्वजनिक रूप से कहा कि वह इस प्रक्रिया से गुजरने से बेहतर मौत को समझती है।

Jagriti Kumari

लेखक के बारे में

Jagriti Kumari

जागृति को छोटी उम्र से ही खबरों की दुनिया ने इतना रोमांचित किया कि पत्रकारिता को ही करियर बना लिया। 2 साल पहले लाइव हिन्दुस्तान के साथ करियर की शुरुआत हुई। उससे पहले डिग्री-डिप्लोमा सब जर्नलिज्म और मास कम्युनिकेशन में। भारतीय जन संचार संस्थान (IIMC), नई दिल्ली से पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा और संत जेवियर्स कॉलेज रांची से स्नातक के बाद से खबरें लिखने का सिलसिला जारी। खबरों को इस तरह से बताना जैसे कोई बेहद दिलचस्प किस्सा, जागृति की खासियत है। अंतर्राष्ट्रीय संबंध और अर्थव्यवस्था की खबरों में गहरी रुचि। लाइव हिन्दुस्तान में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान शानदार कवरेज के लिए इंस्टा अवॉर्ड जीता और अब बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर रोजाना कुछ नया सीखने की ललक के साथ आगे बढ़ रही हैं। इसके अलावा सिनेमा को समझने की जिज्ञासा है।

और पढ़ें

लेटेस्ट   Hindi News ,    बॉलीवुड न्यूज,   बिजनेस न्यूज,   टेक ,   ऑटो,   करियर , और   राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।