Explainer: आधी रात 2 घंटे तक US केशम द्वीप पर बरसाता रहा मिसाइल और बारूद; आखिर इतना खास क्यों ईरान का ये ठिकाना?

लाइव हिन्दुस्तान, वॉशिंगटन
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केशम द्वीप पर अमेरिकी सैन्य कार्रवाई की खबर फैलते ही वैश्विक बाजार में हड़कंप मच गया है। इससे तेल की कीमतों में उछाल आया है। हमलों के बाद वैश्विक तेल बेंचमार्क 'ब्रेंट क्रूड' की कीमतों में 8% से अधिक की तेजी दर्ज की गई है।

US Iran War
पश्चिम एशिया में ईरान-अमेरिका युद्ध गहरा गया है।

पश्चिम एशिया में छिड़ी जंग और विकराल हो गई है। अमेरिका ने जॉर्डन में अमेरिकी सैनिकों पर कथित बैलिस्टिक मिसाइल हमले के जवाब में ईरान के खिलाफ बड़े पैमाने पर हवाई हमले किए हैं। गुरुवार, 30 जुलाई 2026 की सुबह अमेरिकी सेना ने ईरान के रणनीतिक रूप से सबसे महत्वपूर्ण केशम द्वीप पर एक बड़ा सैन्य ऑपरेशन चलाया है। अमेरिकी सेंट्रल कमान (सेंटकॉम) के अनुसार, इन हमलों में इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (IRGC) के दर्जनों ठिकानों को निशाना बनाया गया है।

सेंटकॉम ने दावा किया कि यह कार्रवाई ईरान द्वारा जॉर्डन स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों तथा होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों को निशाना बनाये जाने के जवाब में की गई है। वहीं, ईरान के सरकारी मीडिया ने दावा किया है कि अमेरिकी हमलों में क़ेशम द्वीप पर एक परिवार के तीन लोगों की मौत हो गयी, जिनमें दो वर्ष का एक बच्चा भी शामिल है। सरकारी मीडिया के अनुसार, देश के दक्षिणी और पश्चिमी हिस्सों के अन्य स्थानों पर भी हमले किए गए हैं।

दो घंटे तक बरसाया बारूद और मिसाइल

CENTCOM के अनुसार, यह ऑपरेशन गुरुवार आधी रात करीब दो घंटे तक रात के 12 बजे से लेकर 2 बजे तक चला। इस दौरान अमेरिकी विमानों ने ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स के दर्जनों ठिकानों को मिसाइलों, ड्रोनों और बम गिराकर नेस्तनाबूद कर दिया। इन लक्ष्यों में सैन्य कमांड सेंटर, ड्रोन ठिकाने, तटीय निगरानी केंद्र और IRGC की समुद्री युद्ध क्षमताएं शामिल थीं। ईरानी सरकारी मीडिया के मुताबिक, द्वीप पर हुए इन हमलों में तीन लोगों की मौत हुई है।

क्यों खास है केशम द्वीप?

दरअसल, केशम द्वीप महज एक जमीन का टुकड़ा नहीं, बल्कि यह ईरान का सबसे बड़ा द्वीप है और यह होर्मुज जलडमरूमध्य (स्ट्रेट) में स्थित है, जो दुनिया के सबसे अहम रणनीतिक समुद्री रास्तों में से एक है। यह जलडमरूमध्य फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ता है। यह वह जगह है जहाँ से दुनिया के कुल तेल और लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) का लगभग पाँचवां हिस्सा (~20%) गुजरता है। इसे IRGC का "प्राइमरी डिनायल हब" भी कहा जाता है, जहाँ से ईरान समुद्री यातायात पर नजर रखता है और उसे नियंत्रित करने की क्षमता रखता है। इसके अलावा यहाँ ईरान के पास अंडरग्राउंड "मिसाइल सिटी", रडार सिस्टम और घातक फास्ट-अटैक बोट्स का जाल बिछा हुआ है।

टकराव का मुख्य केंद्र बना

मौजूदा टकराव से पहले, दुनिया का लगभग पांचवां हिस्सा तेल और लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) की खेप इसी रास्ते से गुजरती थी, जिससे यह वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बहुत महत्वपूर्ण हो गया। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान द्वारा इस जलमार्ग पर नियंत्रण का दावा करने और खाड़ी देशों के समर्थन वाले ओमान के उस प्रस्ताव को खारिज करने के बाद, जिसमें समुद्री आवाजाही के संयुक्त प्रबंधन की बात कही गई थी, होर्मुज जलडमरूमध्य इस टकराव का मुख्य केंद्र बन गया है।

बड़ी चोट देने की चाल

इसके अलावा इस द्वीप पर सिद्ध हर्रा (Hara) मैंग्रोव वन स्थित हैं, जो प्रवासी पक्षियों का प्रमुख प्रजनन स्थल हैं। बड़ी बात यह भी है कि केशम द्वीप एक प्रमुख मुक्त व्यापार क्षेत्र (Free Trade Zone) है, जो क्षेत्रीय और अंतर्राष्ट्रीय समुद्री व्यापार को बढ़ावा देता है। अमेरिका ने इस पर हमला करके ईरान को बड़ी चोट देने की चाल चली है।

आपकी जेब पर पड़ेगा सीधा असर, भारत पर क्या प्रभाव

केशम द्वीप पर अमेरिकी सैन्य कार्रवाई की खबर फैलते ही वैश्विक बाजार में हड़कंप मच गया है। इससे तेल की कीमतों में उछाल आया है। हमलों के बाद वैश्विक तेल बेंचमार्क 'ब्रेंट क्रूड' की कीमतों में 8% से अधिक की तेजी दर्ज की गई है। माना जा रहा है कि इसका असर भारत पर भी पड़ेगा क्योंकि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों (क्रूड ऑयल और गैस) का एक बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से आयात करता है। यहाँ तनाव बढ़ने का सीधा मतलब है पेट्रोल-डीजल के दामों में बढ़ोतरी और महंगाई का झटका। यह हमला केवल केशम द्वीप तक सीमित नहीं है। अमेरिका और सऊदी अरब की सेनाओं ने पूर्वी इराक में भी ईरान समर्थित समूहों पर हमले किए हैं। वहीं जॉर्डन ने दावा किया है कि उसने गुरुवार को ईरान की ओर से दागी गई पांच मिसाइलों को हवा में ही मार गिराया है।

अमेरिका और सऊदी अरब ने पहली बार संयुक्त रूप से हमले किए

हाल के दिनों में अमेरिका और सऊदी अरब ने पहली बार संयुक्त रूप से इराक में ईरान समर्थित समूहों के ठिकानों पर भी हमले किये हैं। अप्रैल में हुए युद्धविराम के जून में टूटने के बाद से अमेरिका और ईरान के बीच लगातार जवाबी सैन्य कार्रवाई का सिलसिला जारी है। इस दौरान अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों की नाकाबंदी की और विभिन्न ठिकानों पर हमले किये, जबकि ईरान ने पश्चिम एशिया में अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किये तथा होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजरानी को भी निशाना बनाया। इस बीच, समाचार वेबसाइट एक्सियोस ने एक अमेरिकी अधिकारी के हवाले से दावा किया कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सऊदी अरब के रक्षा मंत्री प्रिंस खालिद बिन सलमान से मुलाकात की, जिन्होंने क्षेत्र में तनाव कम करने की सऊदी अरब की इच्छा से उन्हें अवगत कराया। व्हाइट हाउस ने इस संबंध में कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की है। (एजेंसी इनपुट्स के साथ)

Pramod Praveen

लेखक के बारे में

Pramod Praveen

प्रमोद कुमार प्रवीण देश-विदेश की समसामयिक घटनाओं और राजनीतिक हलचलों पर चिंतन-मंथन करने वाले और पैनी पकड़ रखने वाले हैं। ईटीवी से पत्रकारिता में करियर की शुरुआत की। कुल करीब दो दशक का इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम करने का अनुभव रखते हैं। संप्रति लाइव हिन्दुस्तान में विगत तीन से ज्यादा वर्षों से समाचार संपादक के तौर पर कार्यरत हैं और अमूमन सांध्यकालीन पारी में बहुआयामी पत्रकारीय भूमिका का निर्वहन कर रहे हैं। हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप से पहले NDTV, जनसत्ता, ईटीवी, इंडिया न्यूज, फोकस न्यूज, साधना न्यूज और ईटीवी में कार्य करने का अनुभव है। कई संस्थानों में सियासी किस्सों का स्तंभकार और लेखक रहे हैं। विश्वविद्यालय स्तर से लेकर कई अकादमिक, शैक्षणिक और सामाजिक संगठनों द्वारा विभिन्न मंचों पर अकादमिक और पत्रकारिता में उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित भी हुए हैं। रुचियों में फिल्में देखना और पढ़ना-पढ़ाना पसंद, सामाजिक और जनसरोकार के कार्यों में भी रुचि है।

अकादमिक योग्यता: भूगोल में जलवायु परिवर्तन जैसे गंभीर और संवेदनशील विषय पर पीएचडी उपाधिधारक हैं। इसके साथ ही पत्रकारिता एवं जनसंचार में स्नातकोत्तर भी हैं। पीएचडी शोध का विषय- 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन-एक भौगोलिक अध्ययन' रहा है। शोध के दौरान करीब दर्जन भर राष्ट्रीय और अंततराष्ट्रीय सम्मेलनों में शोध पत्र पढ़ने और प्रस्तुत करने का अनुभव है। भारतीय विज्ञान कांग्रेस में भी शोध पोस्टर प्रदर्शनी का चयन हो चुका है। शोध पर आधारित एक पुस्तक के लेखक हैं। पुस्तक का नाम 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन' है। पत्रकारिता में आने से पहले महाविद्यालय स्तर पर शिक्षण कार्य भी कर चुके हैं।

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