बकरी चोरी के विवाद में 48 लोगों की हत्या, गांव में ही बन गए बंकर; 9 साल बाद हुई सुलह

Ankit Ojha लाइव हिन्दुस्तान
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पाकिस्तान के उत्तरी सिंध में शिकारपुर के एक गांव में बकरी चोरी का विवाद 9 साल से चल रहा है। इस विवाद में अब तक कम से कम 48 लोगों की जान जा चुकी है। अब दावा किया जा रहा है कि दोनों समुदायों में सुलह हो गई है। 

बकरी चोरी के विवाद में 48 लोगों की हत्या, गांव में ही बन गए बंकर; 9 साल बाद हुई सुलह

पाकिस्तान के उत्तरी सिंध में के शिकारपुर में छोटी सी बात से शुरू हुआ झगड़ा इतना बढ़ा कि बीते 9 सालों में कम से कम 48 लोगों की हत्या हो चुकी है। इसके बाद भी विवाद अबतक पूरी तरह से थमा नहीं है। जिस तरह से दो देशों के बीच एक बफऱ जोन बनाया जाता है, वैसे ही यहां दो समुदायों ने अपने-अपने इलाकों के बीच में एक ब़र्डर बना दिया है जहां कोई आता जाता नहीं है।

बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक इन दोनों समुदायों के बीच पंचायतों के जरिए कई बार सुलह करवाने की कोशिश की गई है। बीते दिनों भी पंचायत के माध्यम से सुलह का दावा किया गया है. इसके बाद भी यह दुश्मनी खत्म नहीं हो रही है। रिपोर्ट में बताया गया कि यहां रहने वाले लोगों की जिंदगी भी इस विवाद की वजह से तबाह हो रही है। यह विवाद जलालपुर गांव का है जहां 200 से ज्यादा घर हैं।

बकरी चोरी से शुरू हुआ था झगड़ा

रिपोर्ट में दावा किया गया कि एक ग्रामीण ने बताया कि केवल उसके गुट के 23 से ज्यादा लोग इस विवाद में मारे गए हैं। स्थायनी लोगों के मुताबिक यहां दो समुदाय रहते हैं। एक है जुनेजो और दूसरा है कल्होड़ा। कल्होड़ा समुदाय पर जुनेजा ने बकरी चोरी का आरोप लगाया। इसके बाद उधर से भी यही आरोप लगाया गया। बाद में जब पंचायत बुलाई गई तो जिसकी बकरी चोरी हुई थी उसने एक शख्स को माफ करने से इनकार कर दिया। यहीं से झगड़ा बढ़ने लगा।

लाखों के हथियार रखते हैं ग्रामीण

झगड़ा इतना बढ़ा कि हथियार और गोला-बारूद चलने लगे। दोनों समुदायों के लोगों ने लाखों के हथियार इकट्ठा कर लिए। दोनों समुदायों में झगड़ा बढ़ा तो हत्याएं होने लगीं। दोनों ओर बंकर बना दिए गए। यहां बोरियां रख दी गईं जहां पर बैठकर लोग हथियार लेकर पहरेदारी कररते थे। गांव में अब भी लोगों के घरों में एलएमजी, आरपीीजी मोर्टार मिल जाएंगे।

कल्होड़ा समुदाय के लोगों का कहना है कि चोर जुनेजो समुदाय का था जो कि बाद में मारा गया था। लोगों का कहना है कि अब हालात काफी सुधर गए हैं और विवाद कम होता है। यहां रहने वाले लोगों के खिलाफ थाने में भी केस दर्ज हैं। ऐसे में उन्हें गिरफ्तारी का भी डर सताता रहता है। बता दें कि उत्तरी सिंध के इलाकों में समुदायों और उनके मुखिया की बड़ी धाक होती है। वहीं मवेशियों को भी काफी महत्व दिया जाता है। यहां शादी के मसले पर भी अकसर दुश्मनी हो जाती है।

क्या है जिरगा व्यवस्था

झगड़े निपटाने के लिए यहां के लोग पंचायत पर ज्यादा विश्वास करते हैं। इसे जिरगे कहा जाता है। जिरगे लोगों को सजा भी सुना सकता है। यहां के लोगों का मामला है कि कोर्ट जाने पर किसी विवाद का निपटारा होने में सालों लग जाते हैं। ऐसे में जिरगा का रुख करना ज्यादा अच्छा रहता है।

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लेखक के बारे में

Ankit Ojha

विद्यालयी जीवन से ही कलात्मक अभिव्यक्ति, विचारशील स्वभाव और मिलनसार व्यक्तित्व और सामान्य के अंदर डुबकी लगाकर कुछ खास खोज लाने का कौशल पत्रकारिता के लिए अनुकूल साबित हुआ। अंकित ओझा एक दशक से डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में लगातार सक्रिय हैं। उत्तर प्रदेश के बाराबंकी के रहने वाले अंकित ओझा समाचारों की दुनिया में तथ्यों के महत्व के साथ ही संवेदनशीलता के पक्ष को साधने में निपुण हैं। पिछले चार साल से हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप के 'लाइव हिन्दुस्तान' के लिए चीफ कॉन्टेंट प्रड्यूसर पद पर कार्य कर रहे हैं। इससे पहले 'टाइम्स ऑफ इंडिया' और 'इंडियन एक्सप्रेस' ग्रुप के साथ भी कार्य कर चुके हैं।


राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय, राज्य और सामाजिक सरोकारों की खबरों के संपादन में लंबा अनुभव होने के साथ ही अपने-आसपास की घटनाओं में समाचार तत्व निकालने की अच्छी समझ है। घटनाओं और समाचारों से संबंधित फैसले लेने और त्वरित समाचार प्रकाशित करने में विशेष योग्यता है। इसके अलावा तकनीक और पाठकों की बदलती आदतों के मुताबिक सामग्री को रूप देने के लिए निरंतर सीखने में विश्वास करते हैं। अंकित ओझा की रुचि राजनीति के साथ ही दर्शन, कविता और संगीत में भी है। लेखन और स्वरों के माध्यम से लंबे समय तक आकाशवाणी से भी जुड़े रहे। इसके अलावा ऑडियन्स से जुड़ने की कला की वजह से मंचीय प्रस्तुतियां भी सराही जाती हैं।


अकादमिक योग्यताः अंकित ओझा ने प्रारंभिक शिक्षा नवोदय विद्यालय से पूरी करने के बाद जामिया मिल्ल्लिया इस्लामिया से पत्रकारिता में ही ग्रैजुएशन किया है। इसके बाद भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC) से पोस्ट ग्रैजुएट डिप्लोमा और कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में एमए किया है। जामिया में अध्ययन के दौरान ही इटैलियन और उर्दू भाषा में भी कोर्स किए हैं। इसके अलावा पंजाबी भाषा की भी अच्छी समझ रखते हैं। विश्वविद्यालय में NCC का 'C सर्टिफिकेट' भी प्राप्त किया है। IIMC और ऑक्सफर्ड से स्वास्थ्य पत्रकारिता का सर्टिफिकेट भी प्राप्त किया है।

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