कर्मचारियों की बल्ले-बल्ले, अब 8 घंटे की शिफ्ट, हफ्ते में सिर्फ 5 दिन काम; यहां लागू हुआ नया लेबर कानून

Feb 25, 2026 04:01 pm ISTDevendra Kasyap लाइव हिन्दुस्तान
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आज के दौर में जहां काम का बोझ बढ़ता जा रहा है और वर्क-लाइफ बैलेंस की बातें जोर-शोर से हो रही हैं, मैक्सिको ने एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। क्लाउडिया शीनबाम के नेतृत्व वाली सरकार ने श्रमिकों के हित में बड़ा फैसला लिया है

कर्मचारियों की बल्ले-बल्ले, अब 8 घंटे की शिफ्ट, हफ्ते में सिर्फ 5 दिन काम; यहां लागू हुआ नया लेबर कानून

आज के दौर में जहां काम का बोझ बढ़ता जा रहा है और वर्क-लाइफ बैलेंस की बातें जोर-शोर से हो रही हैं, मैक्सिको ने एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। क्लाउडिया शीनबाम के नेतृत्व वाली सरकार ने श्रमिकों के हित में बड़ा फैसला लिया है। देश की कार्य सप्ताह को 48 घंटे से घटाकर 40 घंटे करने का विधेयक संसद में पारित हो गया है। बताया जा रहा है कि यह सुधार न सिर्फ कार्य घंटों में कमी लाएगा, बल्कि श्रमिकों को प्रति सप्ताह एक अनिवार्य सवैतनिक अवकाश भी सुनिश्चित करेगा। धीरे-धीरे लागू होने वाला यह बदलाव 2027 से शुरू होगा और 2030 तक पूरी तरह 40 घंटे का कार्य सप्ताह स्थापित कर देगा, वो भी बिना वेतन या अन्य लाभों में कटौती के।

सर्वसम्मति से नए श्रम सुधार को मंजूरी

मैक्सिको में क्लाउडिया शीनबाम के नेतृत्व वाली सरकार ने सर्वसम्मति से नए श्रम सुधार को मंजूरी दे दी है, जो मैक्सिकन कार्य सप्ताह को कम करने की अनुमति देगा। राष्ट्रपति शीनबाम द्वारा समर्थित इस सुधार से मौजूदा 48 घंटे के कार्य सप्ताह को धीरे-धीरे घटाकर 40 घंटे कर दिया जाएगा, साथ ही प्रति सप्ताह एक अनिवार्य सवैतनिक अवकाश का प्रावधान भी मजबूत होगा। यह श्रम सुधार विधेयक 500 सदस्यीय निचले सदन (चैंबर ऑफ डेप्युटीज) में कुल 469 वोटों से पक्ष में पारित हो गया। इससे पहले मैक्सिकन सीनेट ने भी इसे सर्वसम्मति से मंजूरी दी थी। इस प्रस्ताव को सबसे पहले राष्ट्रपति शीनबाम ने दिसंबर 2025 में पेश किया था। हालांकि, व्यापारिक नेताओं के विरोध और पैरवी के कारण इस पर चर्चा कई हफ्तों तक टलती रही।

नए सुधार में क्या है?

ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, यह सुधार 2027 से लागू होना शुरू होगा और 2030 तक हर दो साल में कार्य घंटों में कमी की जाएगी। मैक्सिको में 48 घंटे के कार्य सप्ताह को घटाकर 40 घंटे कर दिया जाएगा, जिसका मतलब है कि पांच दिन का कार्य सप्ताह संभव हो सकेगा। वर्तमान में मैक्सिकन श्रमिकों को साप्ताहिक सवैतनिक अवकाश नहीं मिलता है। एक दिन छुट्टी हर छह कार्य दिवसों पर होती है।

शीनबाम द्वारा समर्थित इस विधेयक के तहत श्रमिकों को हर छह कार्य दिवसों में एक अनिवार्य सवैतनिक अवकाश मिलेगा। इस प्रस्ताव में संवैधानिक संशोधन की मांग की गई है, जिसमें 18 वर्ष से कम उम्र के श्रमिकों को ओवरटाइम काम से प्रतिबंधित किया जाएगा। ओवरटाइम के लिए अन्य बदलाव: प्रति सप्ताह ओवरटाइम की सीमा 12 घंटे तक होगी (प्रतिदिन अधिकतम 4 घंटे तक वितरित)। दोगुने ओवरटाइम (डबल टाइम) के लिए नियमित प्रति घंटा वेतन से 100% अधिक मुआवजा देना होगा। तिगुने ओवरटाइम के मामले में नियोक्ताओं को 200% अधिक भुगतान करना होगा।

इस सुधार के साथ मैक्सिको उन अन्य लैटिन अमेरिकी देशों जैसे चिली और कोलंबिया में शामिल हो गया है, जिन्होंने साप्ताहिक कार्य घंटे कम किए हैं। इसके अलावा, ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला दा सिल्वा ने भी अक्टूबर में अपने पुनर्निर्वाचन अभियान से पहले इसी तरह के प्रस्ताव का समर्थन किया था।

व्यावसायिक समूहों का विरोध

यह सुधार शीनबाम सरकार की श्रमिक-समर्थक नीतियों का हिस्सा है, लेकिन कई व्यावसायिक समूहों ने इसका विरोध किया है। उन्होंने दावा किया है कि इन बदलावों से श्रम लागत बढ़ेगी और देश की कुल उत्पादकता प्रभावित होगी। विपक्षी सांसदों ने भी आलोचना की है, जिसमें उन्होंने विधेयक में हर सप्ताह दो दिन की छुट्टी शामिल करने की मांग की है।

Devendra Kasyap

लेखक के बारे में

Devendra Kasyap

देवेन्द्र कश्यप पिछले 13 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अगस्त 2025 से वह लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर के पद पर कार्यरत हैं। संस्थान की होम टीम का वह एक अहम हिस्सा हैं। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर उनकी पैनी नजर रहती है। वायरल कंटेंट के साथ-साथ लीक से हटकर और प्रभावशाली खबरों में उनकी विशेष रुचि है।

देवेन्द्र ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत वर्ष 2013 में महुआ न्यूज से की। करियर के शुरुआती दौर में उन्होंने बिहार की राजधानी पटना में रिपोर्टिंग की। इस दौरान राजनीति के साथ-साथ क्राइम और शिक्षा बीट पर भी काम किया। इसके बाद उन्होंने जी न्यूज (बिहार-झारखंड) में अपनी सेवाएं दीं। वर्ष 2015 में ईनाडु इंडिया के साथ डिजिटल मीडिया में कदम रखा। इसके बाद राजस्थान पत्रिका, ईटीवी भारत और नवभारत टाइम्स ऑनलाइन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में कार्य किया।

मूल रूप से बिहार के भोजपुरी बेल्ट रोहतास जिले के रहने वाले देवेन्द्र कश्यप ने अपनी प्रारंभिक और उच्च शिक्षा पटना से प्राप्त की। उन्होंने पटना विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान में स्नातक की डिग्री हासिल की और MCU भोपाल से पत्रकारिता में डिप्लोमा किया। वर्तमान में वह उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में प्रवास कर रहे हैं।

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