240 घंटे की डील: इजरायल-लेबनान सीजफायर से ईरान युद्ध पर क्या पड़ेगा असर? हो सकती है वार्ता

Ankit Ojha लाइव हिन्दुस्तान
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इजरायल और लेबनान के बीच अस्थायी युद्धविराम से ईरान और अमेरिका की वार्ता में मदद मिल सकती है। हालांकि अगर 10 दिन के बाद यह युद्धविराम आगे नहीं बढ़ा तो जानकारों को इसका कोई खास फायदा नहीं नजर आ रहा है। 10 दिन के इस समय में लेबनान आगे की रणनीति पर विचार कर सकता है।

240 घंटे की डील: इजरायल-लेबनान सीजफायर से ईरान युद्ध पर क्या पड़ेगा असर? हो सकती है  वार्ता

इस्लामाबाद में ईरान अमेरिका की वार्ता फेल होने के बाद अब डोनाल्ड ट्रंप ने इजरायल और लेबनान के बीच 10 दिन के सीजफायर का ऐलान करते हुए 10वां युद्ध रुकवाने का दावा किया है। ट्रंप ने कहा कि लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ औन और इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बीच यह सीधा समझौता करवाया गया है। प ने बताया कि मंगलवार को दोनों देशों ने वॉशिंगटन डीसी में 34 वर्षों में पहली बार मुलाकात की, जिसमें अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो भी मौजूद थे। बैठक में इज़रायल की ओर से अमेरिका में इज़रायल के राजदूत येचियल लेइटर शामिल हुए, जबकि लेबनान की ओर से राजदूत नादा हमादेह मोवाद ने बैठक में हिस्सा लिया था।

क्या हैं इस युद्धविराम के मायने

इजरायल की शर्त रही है कि लेबनान की सरकार हिजबुल्लाह का निरस्त्रीकरण करवाए। इसी को लेकर वह लगातार लेबनान में हमला करता रहा है। हालांकि स्थायी युद्धविराम की वजह केवल 240 घंटों के लिए समझौता किया गया है। इसका उद्देश्य एक कूलिंग ऑफ पीरियड देना है ताकि लेबनान भी सांस ले सके और विचार कर सके कि आगे की रणनीति क्या हो सकती है। इजरायली हमलों में लेबनान में लगातार लोगों की जान जा रही थी। ऐसे में 10 दिन कम से कम नरसंहार रुकेगा और आगे की रणनीति पर विचार किया जा सकेगा। जानकारों का कहना है है कि 10 दिन तक अगर कोई बड़ा हमला नहीं होता है तो लेबनान के राष्ट्रपति औरन और प्रधानमंत्री नावाफ सलाम को सोचने समझने का वक्त मिलेगा कि हिजबुल्लाह के निरस्त्रीकरण पर क्या रणनीति अपनाई जा सकती है।

अमेरिका और ईरान की बातचीत में भी मिलेगी मदद

बताया जा रहा है कि अमेरिका और ईरान के बीच बीतचीत फिर से हो सकती है। ईरान ने शर्त रखी थी कि बातचीत से पहले अमेरिका को इजरायल और लेबनान के बीच सीजफायर करवाना होगा। ऐसे में संभव है कि इस सीजफायर के बाद अमेरिका और ईरान के बीच दोबारा वार्ता शुरू हो। बता दें कि हिजबुल्लाह भी अमेरिका के सामने एक चुनौती है. अगर हिजबुल्लाह का निरस्त्रीकरण होता है तो समंदर में भी अणेरिका की पकड़ और मजबूत होगी।

डोनाल्ड ट्रंप की तरफ से ऐलान किए गए इस सीजफायर का लेबनान के राष्ट्रपति ने भी स्वागत किया है। हालांकि हिजबुल्लाह का बयान सामने नहीं आया है। ऐसे में सीजफायर को लेकर कई आशंकाएं बनी हुई हैं। हिजबुल्लाह सीजफायर के बाद भी इजरायल में रॉकेट अटैक कर सकता है। अगर ऐसा हुआ तो इजरायल भी जवाब देगाऔर फिर यह सीजफायर सफल नहीं हो पाएगा। वहीं इस सीजफायर के बाद इजरायल और लेबनान दोनों तरफ लोग अपने घरों की ओर लौटने का मन बना रहे हैं। वहीं अगर 10 दिन के बाद इसे आगे ना बढ़ाया गया तो उनके लिए मुसीबत खड़ी हो जाएगी।

Ankit Ojha

लेखक के बारे में

Ankit Ojha

विद्यालयी जीवन से ही कलात्मक अभिव्यक्ति, विचारशील स्वभाव और मिलनसार व्यक्तित्व और सामान्य के अंदर डुबकी लगाकर कुछ खास खोज लाने का कौशल पत्रकारिता के लिए अनुकूल साबित हुआ। अंकित ओझा एक दशक से डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में लगातार सक्रिय हैं। उत्तर प्रदेश के बाराबंकी के रहने वाले अंकित ओझा समाचारों की दुनिया में तथ्यों के महत्व के साथ ही संवेदनशीलता के पक्ष को साधने में निपुण हैं। पिछले चार साल से हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप के 'लाइव हिन्दुस्तान' के लिए चीफ कॉन्टेंट प्रड्यूसर पद पर कार्य कर रहे हैं। इससे पहले 'टाइम्स ऑफ इंडिया' और 'इंडियन एक्सप्रेस' ग्रुप के साथ भी कार्य कर चुके हैं।


राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय, राज्य और सामाजिक सरोकारों की खबरों के संपादन में लंबा अनुभव होने के साथ ही अपने-आसपास की घटनाओं में समाचार तत्व निकालने की अच्छी समझ है। घटनाओं और समाचारों से संबंधित फैसले लेने और त्वरित समाचार प्रकाशित करने में विशेष योग्यता है। इसके अलावा तकनीक और पाठकों की बदलती आदतों के मुताबिक सामग्री को रूप देने के लिए निरंतर सीखने में विश्वास करते हैं। अंकित ओझा की रुचि राजनीति के साथ ही दर्शन, कविता और संगीत में भी है। लेखन और स्वरों के माध्यम से लंबे समय तक आकाशवाणी से भी जुड़े रहे। इसके अलावा ऑडियन्स से जुड़ने की कला की वजह से मंचीय प्रस्तुतियां भी सराही जाती हैं।


अकादमिक योग्यताः अंकित ओझा ने प्रारंभिक शिक्षा नवोदय विद्यालय से पूरी करने के बाद जामिया मिल्ल्लिया इस्लामिया से पत्रकारिता में ही ग्रैजुएशन किया है। इसके बाद भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC) से पोस्ट ग्रैजुएट डिप्लोमा और कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में एमए किया है। जामिया में अध्ययन के दौरान ही इटैलियन और उर्दू भाषा में भी कोर्स किए हैं। इसके अलावा पंजाबी भाषा की भी अच्छी समझ रखते हैं। विश्वविद्यालय में NCC का 'C सर्टिफिकेट' भी प्राप्त किया है। IIMC और ऑक्सफर्ड से स्वास्थ्य पत्रकारिता का सर्टिफिकेट भी प्राप्त किया है।

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