ईरान से तनाव के बीच दूसरे देशों में फंस गए 2 लाख इजरायली, सरकार पर क्यों भड़कीं एयरलाइन्स
ईरान से तनाव के बीच कम से कम 2 लाख इजरायली नागरिक दूसरे देशों में फंस गए हैं। एयरलाइन कंपनियां भी सरकार के फैसले से नाखुश हैं।
ईरान के साथ तनाव के बीच कम से कम दो लाख इजरायली देश के बाहर ही फंस गए हैं। इसरार और अरकिया एयरलान के हेड ने कहा है कि इजरायली सरकार अपने लोगों को वापस लाने के प्रयास ठीक से नहीं कर पा रही है। ऐसे में लोगों को वापस लाने में सप्ताहभर से ज्यादा का समय लग सकता है। बता दें कि इजरायली सरकार ने विमानों की आवाजाही पर प्रतिबंध लगा दिया है। ऐसे में गुरुवार तक बाहर से भी कोई फ्लाइट नहीं आ पाएगी। ऐसे में बाहर फंसे लोगों को वापस लाने का काम ही नहीं शुरू हो पाएगा।
इजरायल को डर है कि ईरान ऐसी जगहों पर हमला कर सकता है जहां भारी भीड़ हो। ऐसे में बेन गुरियन एयरपोर्ट पर भीड़ इकट्ठी होने से रोकने के लिए विमानों की आवाजाही पर रोक लगा दी गई। वहीं एयरलाइन्स के चीफ ने सरकार की आलोचना करते हुए कहा है कि इस तरह से तो लोगों को वापस लाने में कई हफ्ते लग जाएंगे।
इसरार एयरलाइन के सीईओ उरी सिरकिस ने कहा कि सप्ताह के आखिरी में लोगों को वापस लाने का काम शुरू हो पाएगा। उन्होंने कहा कि 30 जून तक फ्लाइट ऑपरेशन को बंद करने का आदेश दिया गया है। उन्होंने कहा कि हम अब भी दुश्मन कै पेटर्न और टारगेट को समझने की कोशिश कर रहे हैं। इसरार एयरलाइन ने कहा कि जैसे ही रेस्क्यू ऑपरेशना का ऐलान किया जाता है लोग कंपनी की वेबसाइट पर जाकर टिकट बुक कर सकते हैं।
अरकिया एयरलाइन के सीईओ ने कहा कि रेस्क्यू फ्लाइट को भी एक घंटे में केवल दो को ही उतरने का आदेश दिया गया है। ऐसे में इजरायलियों को वापस लाने में कई सप्ताह लग सकते हैं। उन्होंने कहा कि कंपनी के पास सैकड़ों लोगों के फोन रोज आते हैं। कई छोटे बच्चे बाहर फंसे हैं। बहुत सारे लोग दूसरे देशों में होटल में रहने को मजबूर हैं। कई लोगों के पास पैसा खत्म हो गया है। इस तरह से लोगों को काफी दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार को समझना चाहिए कि मौजूदा समस्या एक राष्ट्रीय समस्या बन गई है। बता दें कि ईरान के हमले से बचने के लिए इजरायली एयरलाइन्स के विमानों को साइप्रस में शिफ्ट कर दिया गया था।
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Ankit Ojhaविद्यालयी जीवन से ही कलात्मक अभिव्यक्ति, विचारशील स्वभाव और मिलनसार व्यक्तित्व और सामान्य के अंदर डुबकी लगाकर कुछ खास खोज लाने का कौशल पत्रकारिता के लिए अनुकूल साबित हुआ। अंकित ओझा एक दशक से डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में लगातार सक्रिय हैं। उत्तर प्रदेश के बाराबंकी के रहने वाले अंकित ओझा समाचारों की दुनिया में तथ्यों के महत्व के साथ ही संवेदनशीलता के पक्ष को साधने में निपुण हैं। पिछले चार साल से हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप के 'लाइव हिन्दुस्तान' के लिए चीफ कॉन्टेंट प्रड्यूसर पद पर कार्य कर रहे हैं। इससे पहले 'टाइम्स ऑफ इंडिया' और 'इंडियन एक्सप्रेस' ग्रुप के साथ भी कार्य कर चुके हैं।
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अकादमिक योग्यताः अंकित ओझा ने प्रारंभिक शिक्षा नवोदय विद्यालय से पूरी करने के बाद जामिया मिल्ल्लिया इस्लामिया से पत्रकारिता में ही ग्रैजुएशन किया है। इसके बाद भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC) से पोस्ट ग्रैजुएट डिप्लोमा और कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में एमए किया है। जामिया में अध्ययन के दौरान ही इटैलियन और उर्दू भाषा में भी कोर्स किए हैं। इसके अलावा पंजाबी भाषा की भी अच्छी समझ रखते हैं। विश्वविद्यालय में NCC का 'C सर्टिफिकेट' भी प्राप्त किया है। IIMC और ऑक्सफर्ड से स्वास्थ्य पत्रकारिता का सर्टिफिकेट भी प्राप्त किया है।
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