
150 विमान, 30 मिनट में मादुरो गिरफ्तार; कैसे वेनेजुएला में घुसकर राष्ट्रपति को उठा ले गया अमेरिका
राष्ट्रपति ट्रंप ने स्पष्ट कर दिया है कि वेनेजुएला में एक सुरक्षित और उचित सत्ता हस्तांतरण होने तक अमेरिका ही देश को चलाएगा। हालांकि, उन्होंने इसके लिए कोई निश्चित समयसीमा नहीं दी है।
वेनेजुएला में एक ऐतिहासिक घटनाक्रम में अमेरिकी विशेष बलों ने राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को एक गुप्त सैन्य अभियान के बाद गिरफ्तार कर लिया है। अमेरिका ने इस मिशन को 'ऑपरेशन एब्सोल्यूट रिजॉल्व' नाम दिया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस सफलता की पुष्टि करते हुए कहा कि अब वेनेजुएला में सत्ता परिवर्तन तक अमेरिका देश का नियंत्रण संभालेगा। अमेरिकी ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के चेयरमैन जनरल डैन केन के अनुसार, यह मिशन 2 जनवरी की रात को अंजाम दिया गया। इस ऑपरेशन की बारीकियों ने पूरी दुनिया को हैरान कर दिया है।
इस मिशन में F-22, F-35, F-18 लड़ाकू विमानों, B-1 बमवर्षक विमानों और ड्रोन्स समेत 150 से अधिक विमान शामिल थे। राष्ट्रपति ट्रंप ने रात 10:46 बजे (ईस्टर्न टाइम) मिशन को हरी झंडी दी। ठीक रात 1:01 बजे (कराकस समय अनुसार रात 2:01 बजे) अमेरिकी फोर्स मादुरो के परिसर में उतरी। मादुरो एक किले जैसे सुरक्षित महल में थे। ट्रंप ने बताया कि अमेरिकी सैनिकों ने इस महल के हूबहू ढांचे पर महीनों तक अभ्यास किया था।

30 मिनट में मिशन पूरा, भारी धमाकों से गूंजा कराकस
अमेरिकी राष्ट्रपति ने मार-ए-लागो से दिए बयान में कहा कि जब यह हमला हुआ तो कराकस की लाइटें बंद थीं। यह डार्क और घातक मिशन था। सैनिकों के पास भारी 'ब्लोटॉर्च' थे ताकि वे सुरक्षित कमरों के दरवाजे काटकर अंदर घुस सकें, लेकिन मादुरो को सुरक्षित कमरे तक पहुंचने का मौका ही नहीं मिला। 30 मिनट से भी कम समय में मादुरो को पकड़ लिया गया। इस दौरान कराकस में कम से कम सात बड़े विस्फोट सुनाई दिए।
वेनेजुएला अब अमेरिका के नियंत्रण में
राष्ट्रपति ट्रंप ने स्पष्ट कर दिया है कि वेनेजुएला में एक सुरक्षित और उचित सत्ता हस्तांतरण होने तक अमेरिका ही देश को चलाएगा। हालांकि, उन्होंने इसके लिए कोई निश्चित समयसीमा नहीं दी है। अमेरिकी न्याय विभाग ने पुष्टि की है कि मादुरो और उनकी पत्नी सीलिया फ्लोर्स पर 'नार्को-टेररिज्म' के गंभीर आरोप हैं, जिसके तहत उन पर अमेरिका में मुकदमा चलेगा।
जनरल केन ने बताया कि इस मिशन में किसी भी अमेरिकी सैनिक की जान नहीं गई है और न ही कोई सैन्य उपकरण खोया है। वहीं वेनेजुएला के अधिकारियों का दावा है कि इस हमले में उनके कुछ सैनिक और नागरिक मारे गए हैं, हालांकि उन्होंने सटीक संख्या नहीं बताई।
खुफिया एजेंसियों का महाजाल
इस मिशन की सफलता के पीछे CIA, NSA और NGA जैसी शीर्ष खुफिया एजेंसियों का हाथ था। जनरल केन ने बताया कि यह ऑपरेशन दशकों के अनुभव और थल सेना, वायु सेना, नौसेना और स्पेस फोर्स के बेजोड़ तालमेल का नतीजा था। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि इस मिशन में विफलता का कोई विकल्प नहीं था, क्योंकि एक भी चूक पूरे अभियान को खतरे में डाल सकती थी।

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