कहां गए 10 अमेरिकी वैज्ञानिक? पहली बार वाइट हाउस ने तोड़ी चुप्पी, सबकुछ बताया
बुधवार को प्रेस ब्रीफिंग के दौरान जब पत्रकार पीटर डूसी ने प्रेस सचिव करोलाइन लेविट से अति-गोपनीय परियोजनाओं में काम कर रहे वैज्ञानिकों की रहस्यमय मौतों और लापता होने के बारे में सवाल किया, तो लेविट ने कहा कि मैंने इस रिपोर्ट को देखा है, लेकिन संबंधित एजेंसियों से अभी बात नहीं की है।

2023 से अब तक अमेरिका के कम से कम 9 से 10 शीर्ष वैज्ञानिकों के रहस्यमय ढंग से लापता होने या संदिग्ध परिस्थितियों में मौत के मामलों ने पूरे अमेरिकी सुरक्षा एवं खुफिया तंत्र में हड़कंप मचा दिया है। ये वैज्ञानिक परमाणु हथियार, उन्नत एयरोस्पेस प्रौद्योगिकी और संलयन अनुसंधान जैसे अत्यंत संवेदनशील क्षेत्रों से जुड़े थे। अब इस पर पहली बार वाइट हाउस की ओर से प्रतिक्रिया सामने आई है।
बुधवार को प्रेस ब्रीफिंग के दौरान जब पत्रकार पीटर डूसी ने प्रेस सचिव करोलाइन लेविट से अति-गोपनीय परियोजनाओं में काम कर रहे वैज्ञानिकों की रहस्यमय मौतों और लापता होने के बारे में सवाल किया, तो लेविट ने कहा कि मैंने इस रिपोर्ट को देखा है, लेकिन संबंधित एजेंसियों से अभी बात नहीं की है। मैं निश्चित रूप से उनसे बात करूंगी और आपको जवाब दिलाऊंगी। अगर यह सच है, तो यह निश्चित रूप से ऐसा मामला है जिसकी जांच इस सरकार और प्रशासन के लिए जरूरी होगी।
दरअसल, ये घटनाएं मुख्य रूप से लॉस एलामोस नेशनल लेबोरेटरी, नासा जेट प्रोपल्शन लेबोरेटरी (JPL) और एमआईटी प्लाज्मा साइंस एंड फ्यूजन सेंटर जैसी उच्च सुरक्षा वाली संस्थाओं से जुड़ी हैं। ये केंद्र परमाणु हथियार विकास, उन्नत प्रणोदन प्रणालियों और अगली पीढ़ी की ऊर्जा प्रौद्योगिकियों पर काम करते हैं।
रिपोर्टों के अनुसार, कई लापता वैज्ञानिक अपने घर से सिर्फ पैदल निकले और फोन, बटुआ, चाबियां जैसी जरूरी चीजें घर पर ही छोड़ गए। कुछ मामलों में वैज्ञानिकों की अचानक या हिंसक मौत भी दर्ज की गई है। पूर्व एफबीआई अधिकारी और विशेषज्ञों का मानना है कि गोपनीय जानकारी तक पहुंच रखने वाले इन वैज्ञानिकों पर जासूसी, टार्गेटेड अपहरण या अन्य खतरे की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
अब इन मामलों में सेवानिवृत्त एयर फोर्स मेजर जनरल विलियम नील मैककैसलैंड का 27 फरवरी 2026 को अल्बुकर्क से लापता होना भी शामिल है। वे राइट-पैटरसन एयर फोर्स बेस से जुड़े थे, जो उन्नत एयरोस्पेस रिसर्च का केंद्र माना जाता है। वाइट हाउस की प्रतिक्रिया पर सवाल उठ रहे हैं।
दूसरी ओर सोशल मीडिया पर कई यूजर्स पूछ रहे हैं कि क्या संघीय एजेंसियां इन मामलों को गंभीरता से ले रही हैं या उन्हें दबाने की कोशिश हो रही है। वहीं एक यूजर ने लिखा कि क्या इसका मतलब यह है कि वे अब इसकी जांच नहीं कर रहे? इसमें एक जनरल भी शामिल है।
लेखक के बारे में
Devendra Kasyapदेवेन्द्र कश्यप पिछले 13 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अगस्त 2025 से वह लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर के पद पर कार्यरत हैं। संस्थान की होम टीम का वह एक अहम हिस्सा हैं। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर उनकी पैनी नजर रहती है। वायरल कंटेंट के साथ-साथ लीक से हटकर और प्रभावशाली खबरों में उनकी विशेष रुचि है।
देवेन्द्र ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत वर्ष 2013 में महुआ न्यूज से की। करियर के शुरुआती दौर में उन्होंने बिहार की राजधानी पटना में रिपोर्टिंग की। इस दौरान राजनीति के साथ-साथ क्राइम और शिक्षा बीट पर भी काम किया। इसके बाद उन्होंने जी न्यूज (बिहार-झारखंड) में अपनी सेवाएं दीं। वर्ष 2015 में ईनाडु इंडिया के साथ डिजिटल मीडिया में कदम रखा। इसके बाद राजस्थान पत्रिका, ईटीवी भारत और नवभारत टाइम्स ऑनलाइन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में कार्य किया।
मूल रूप से बिहार के भोजपुरी बेल्ट रोहतास जिले के रहने वाले देवेन्द्र कश्यप ने अपनी प्रारंभिक और उच्च शिक्षा पटना से प्राप्त की। उन्होंने पटना विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान में स्नातक की डिग्री हासिल की और MCU भोपाल से पत्रकारिता में डिप्लोमा किया। वर्तमान में वह उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में प्रवास कर रहे हैं।
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