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30 मई, 2020|1:00|IST

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जान जोखिम में डाल नालों में उतर रहे मजदूर

नगर निगम में करीब 3 हजार कर्मचारियों की सुरक्षा दांव पर है। ये कर्मचारी निगम के नाला सफाई का काम कर रहे हैं। निगम आयुक्त हिमांशु शर्मा ने इन कर्मचारियों को नालों की सफाई के लिए सुरंगनुमा गंदगी में उतारने का फरमान तो जारी कर दिया, लेकिन उनकी सुरक्षा की व्यवस्था नहीं की गई, जिसकी वजह से किसी भी कर्मचारी के साथ अगर हादसा होता है तो एक तरफ निगम तो दूसरी ओर निजी एजेंसी के जिम्मेदारों के पास जवाब नहीं होगा। जानकारी के अनुसार निगम के जिम्मेदार र्चुंनदा कर्मचारियों को सुरक्षा किट और सफाई के साजो सामान उपलब्ध कराकर फोटो मुख्यालय तक भेज दे रहे हैं, जबकि सच्चाई यह है कि नालों की सफाई में उतरे कर्मचारियों की सुरक्षा में किसी प्रकार का एहतियात नहीं बरता जा रहा है। एजेंसियों ने इस दिशा में निगम के आयुक्त को पत्र भेज रखा है।
फोटो खिंचवाने में सफाई वर्दी में एसआई
निगम के कुछ अंचल कार्यालयों पर दैनिक सफाई मजदूर और सफाई इंस्पेक्टर को सफाई किट तो दिया जा रहा है, लेकिन वास्तव में ये सफाई कर्मी कभी नालों में उतरते ही नहीं हैं। नालों के भीतर गंदगी में घुसकर सफाई का पूरा काम ऐसे अज्ञात कर्मचारी कर रहे हैं, जिन्हें हर रोज 400 से 450 रुपए की मजदूरी पर निजी एजेंसियों के माध्यम से रखा गया है, लेकिन निगम के अभिलेखों में इन सफाई कर्मियों का कहीं से जिक्र नहीं है।

हताहत होने पर लावारिस होगा परिवार
नालों की सफाई के दौरान कर्मचारियों के अक्सर फिसलकर गिरने और दम घुटने से मौत होने की संभावना बनी रहती है। कर्मचारी बॉक्स नालों के भीतर 25 से 30 फिट दूरी तक भीतर ही भीतर आगे बढ़ जा रहे हैं और उनके लिए आक्सीजन, डेविज लाइट और दूसरी सुविधाओं का इंतजाम नहीं किया गया है। नालों की सफाई में जुटे कर्मचारियों का इंश्योरेंस तक नहीं कराया गया है। अगर कोई भी कर्मचारी हताहत होता है तो या तो उसके घर के लोग लावारिस हो जाएंगे या फिर कर्मचारी अपंग हो जाएगा।

नाला सफाई के लिए कर्मचारियों के गहराई में उतरने की जरूरत नहीं है। वैसे भी निगम की ओर से साबुन, तौलिया आदि सामान उपलब्ध कराया गया है। अगर कहीं इसका अनुपालन नहीं हो रहा है तो निगम सुविधा उपलब्ध कराएगा।
-सीता साहू,महापौर पटना।

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  • Web Title:Workers descending in drains putting their lives at risk