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जिसने हराया वही बना सहारा: चुनाव में हराया तो भी प्रतिद्वंद्वी का रख रहे मान

1 / 2पार्षद अभिषेक कुमार और पूर्व पार्षद आरती देवी

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2 / 2वार्ड 9 में आज भी आरती के किये कार्यों की कहानी बयां करते हैं ये शिलापट्ट।

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वर्ष 2002 से  लगातार 15 साल तक वार्ड 9 की पार्षद रहीं आरती देवी। 2017 में पार्षद चुनाव हुए तो अभिषेक और आरती आमने-सामने रहे। एक दूसरे को हराने की पूरी कोशिश की, लेकिन वार्ड 9 से अभिषेक कुमार पार्षद बने। चुनाव के बाद आरती की आर्थिक स्थिति ऐसी हो गई कि वह दूसरे के घरों में चौका-बर्तन करने को मजबूर हो गईं। जब अभिषेक ने यह देखा तो वे खुद मदद के लिए आगे आए। चुनावी विरोध भूलकर उन्होंने पूर्व पार्षद के सम्मान के लिए हर महीने 4 हजार रुपए देने का वादा किया, जिसे वह अब पूरा भी कर रहे हैं। 

कभी जिन सड़कों का विकास किया आज वहीं दर-दर भटक रही  है एक पार्षद। जिन घरों के सामने चापाकल लगवाए आज उन्हीं घरों में चाकरी करने को मजबूर हंै एक पार्षद। 15 साल तक जिसे कोई नहीं हरा पाया, आज वही अपनी आर्थिक परिस्थितियों से हारती जा रही हंै। यह कहानी है राजधानी की वार्ड 9 से पार्षद रहीं आरती देवी की। 2007 में चुनाव हारने के बाद किसी तरह से घर चला लेकिन दो साल बाद अब स्थिति ऐसी हो गई है कि घर का खर्च तक नहीं चल पा रहा। जिस राज्य और देश में विधायक और सांसदों को 12 तरह के भत्ते दिए जा रहे हैं, चुनाव हारने के बाद हर महीने 50 हजार पेंशन दी जा रही है, वहीं पूर्व पार्षदों के लिए कुछ नहीं है। ऐसे में नगर निकाय की व्यवस्था पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।  

19 महीने चक्कर काटने के बाद करने लगीं चाकरी
वार्ड नंबर नौ की पूर्व पार्षद आरती देवी कहतीं हैं कि कम पढ़े लिखे होने के कारण उन्हें सरकारी मदद की बहुत अधिक जानकारी नहीं मिलती है। लेकिन, सरकार की ओर से तीन हजार पेंशन की बात किसी ने बता दी। इसके बाद अगस्त 2017 से फरवरी 2019 तक नगर निगम मुख्यालय से लेकर अंचल कार्यालय के चक्कर काटती रहीं। जब कहीं से कोई आर्थिक मदद नहीं मिली तो मार्च 2019 में अली नगर के पांच घरों में चूल्हा—चौका करना शुरू कर दिया। इन घरों से हर महीने 5500 रुपए मिलने लगे। इन घरों से जो कुछ खाने को मिल जाता, उस पर ही दिन काटने लगीं। अप्रैल में इसकी जानकारी वर्तमान पार्षद अभिषेक कुमार को मिली। इन्होंने हमें बुलाकर काम करने से मना कर दिया। जनप्रतिनिधि होने के कारण चार हजार की मदद हर महीने कर रहे हैं। अब मुख्यमंत्री पेंशन योजना के लिए भटक रहे हैं। 

चार सौ में कैसे चले घर
आरती देवी बतातीं हैं कि हाल ही में मुख्यमंत्री वृद्धा पेंशन की योजना शुरू हुई है। 60 वर्ष से अधिक उम्र के व्यक्ति को 400 रुपए सीधा अकाउंट में दिया जाना है। इसी के लिए मंगलवार को ही बैंक गए थे। सभी दस्तावेज जमा कर रहे हैं। लेकिन, रकम बहुत छोटी है। 400 रुपए में भरण—पोषण में कैसे हो? निगम के वर्तमान बोर्ड और मेयर से लेकर सरकार से पेंशन की राशि की मांग कर चुके हैं। 2016 में पति की मौत के बाद परेशानी और बढ़ गई। 

आरती को हरा पाना आसान नहीं था
आरती को यहां से हराना बेहद मुश्किल था, लेकिन जीत हमारी हुई। जब मुझे पता चला कि वे दूसरे के घरों में काम कर जीवन यापन कर रही हैं तो मुझसे उनकी स्थिति देखी नहीं गई। मैं तुरंत उनके सहयोग के लिए आगे आया।  
-अभिषेक कुमार, पार्षद, वार्ड नंबर 9

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