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ऑटो, ई-रिक्शा के घटते ही सिटी बसें खचाखच

शहर में यातायात चालान अब लोगों पर सितम बनकर टूट रहा है। सार्वजनिक परिवहन के तहत चलने वाली गाड़ियां जांच के डर से सड़कों पर नहीं आ रही हैं। इसका सबसे अधिक असर इसके सहारे शहर में अपने काम के लिए निकलने वाले लोगों पर पड़ रहा है। जहां राजधानी की सड़कों पर हर मिनट लोगों को गाड़ी मिलती थी, अब घंटों इंतजार के बाद भी न तो ऑटो मिल रहे हैं न ही ई-रिक्शा। जो चल रहे हैं, वे भी उस रूट पर जाने से मना करते हैं, जहां पुलिस की जांच चल रही हो। शहर में एक बार फिर रिक्शे वापस सड़कों पर दिखने लगे हैं। यात्रियों की मजबूरी का फायदा उठाकर यह भी मनमाना किराया वसूल रहे हैं। जो अधिक पैसा नहीं दे पाते हैं, उनके पास सिर्फ एक ही विकल्प होता है-सिटी बसें। बसों का हाल ऐसा है कि वे दोगुनी, चारगुनी तक सवारी भरकर चल रहे हैं।

हर जगह यात्रियों को भारी परेशानी
- परिवहन निगम की 40 सीट वाली बसों में 60 से भी अधिक सवारियां करती हैं सफर। 
- पीली सिटी बसों में 12 सीटें होती हैं, जबकि 30 से भी अधिक सवारियों को बैठाया जा रहा है।
- ऑटो में तीन, चार और सात यात्रियों की जगह क्रमश: पांच, छह और 10 पैसेंजर बैठाए जा रहे हैं।
- धूप में घंटों खड़े रहने वाले यात्रियों को बैठने के लिए पड़ाव तक नहीं हैं। लोग हर जगह बिलबिला रहे हैं। 

मनमानी शुरू
राजधानी में जिन ऑटोवालों के पास 2021 तक का परमिट है, उन्होंने लाल पट्टी के साथ अपना परमिट नंबर भी लिखवा लिया है। ये ही ऑटो शहर में चल रहे हैं। संख्या कम होने के कारण ये ऑटोवाले लंबी दूरी के ही सवारियों को बैठाते हैं और अपने मनमुताबिक किराया वूसलते हैं।

जुगाड़ की यात्रा
राजधानी में जिन स्थानों पर जांच चल रही हैं। वहां से ऑटो नहीं ले जा रहे हैं। हड़ताली से सीधा गोला रोड तक यात्री बैठा रहे हैं। किराया 15 के जगह 20 रुपए निर्धारित कर रहे हैं। पहले ही तय हो जाता है कि गोल्फ क्लब से पुल के ऊपर-ऊपर जाएंगे। नीचे से नहीं जाएंगे। जांच चल रही है। 

ठगे जा रहे यात्री
20 मिनट से आधे घंटे तक खड़े रहने के बाद सामने गाड़ी देख यात्री हर हाल में सीट लूटने को दौड़ रहे हैं। इस बीच जो किराया मांगा जा रहा है। वह देने को मजबूर हैं। जिस ऑटो पर सात लोगों के बैठने की क्षमता है। उस पर 10 लोग आसानी से बैठ रहे हैं। 

ऑटोरिक्शा पर सितम, बस पर करम
राजधानी में हर दिन 25 से 30 ऑटोरिक्शा को जब्त किया जा रहा हैं। परमिट नहीं होने के कारण इन पर चालान भी 10 से 15 हजार तक काटा जा रहा है। सोमवार को 25 टेंपों को सीज किया गया है। जबकि मंगलवार को15 पर कार्रवाई हुई है। वहीं दूसरी नियमों को रौंदते हुए चल रही मिनी सिटी बसों (पीली वाली) पर रोका तक नहीं जा रहा है। पिछले 10 दिनों में महज एक पीली सिटी बस जब्त की गई है, जबकि पिछले पांच दिन से बृहद अभियान भी चलाया जा रहा है। 

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  • Web Title:Public transport system in Patna deteriorated due to fear of invoice