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स्मार्ट पड़ताल: वेंटिलेटर पर इमरजेंसी

प्रदेश के सबसे बड़े सरकारी अस्पतालों पीएमसीएच, एनएमसीएच और आईजीआईएमएस में रात होते ही इमरजेंसी इलाज की व्यवस्थाएं वेंटिलेटर पर चली जाती हैं। इमरजेंसी में डॉक्टर मिल भी जाएं तो इलाज के नाम पर सिर्फ प्राथमिक उपचार किया जा रहा है। एम्स को टक्कर देने वाले पटना के सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल आईजीआईएमएस का हाल सबसे खराब है। यहां इमरजेंसी हमेशा हाउसफुल रहती है। जिसके कारण मरीजों को स्ट्रेचर पर लिटाकर इलाज किया जाता है और कोशिश की जाती है कि वे किसी तरह दूसरे अस्पताल चले जाएं। 

ये है ऑपरेशन 9 से 12 
हमारे तीन रिपोर्टर रात में 9 बजे तीनों अस्पताल में पहुंचे। उन्होंने तीन घंटे अस्पताल में बिताए। इमरजेंसी से लेकर वार्ड तक की पड़ताल की। जैसे-जैसे रात ढलती गई अस्पताल में अव्यवस्थाएं बढ़ती गईं। मरीजों के साथ जिस तरह का व्यवहार किया जा रहा था, वह मरहम लगाने की जगह उनका दर्द बढ़ा रहा था।

आईजीआईएमएस: जाओ, सुबह आना
रात में जो भी मरीज इमरजेंसी में आ रहे थे, उन्हें पहले यह कहकर भगाया जा रहा था कि सुबह 8 बजे आइएगा। अभी कोई बेड खाली नहीं है। इमरजेंसी में 70 बेड हैं। सभी पर मरीज थे। बाहर 8 स्ट्रेचर थे, उन पर भी मरीज लेटे हुए थे। जिनके तीमारदार अधिक हो हल्ला मचाते, सिर्फ उनका इलाज किया जा रहा था। नए मरीजों को भर्ती करने के लिए पुराने मरीजों को स्ट्रेचर से हटाया जा रहा था। 

पीएमसीएच: बेड नहीं 
इमरजेंसी में मरीजों के परिजनों से साथ बहुत ही गंदा व्यवहार किया जा रहा था। मरीजों को बेड न मिलने पर जमीन पर ही एक कोने में लिटाया जा रहा था। कुछ मरीजों को तो हाथ में ड्रिप की बोतल पकड़ा दी गई थी। यह बोतल एक ऊंचाई पर होनी चाहिए। अगर वह हाथ के लेवल में आ जाए और खून का प्रवाह उल्टा हो जाए तो मरीज की जान भी जा सकती है। 

एनएमसीएच: बेहाल
तीसरी मंजिल पर सर्जिकल वार्ड है। यहां 100 मरीज थे। जब उनसे समस्या पूछी गई तो 4-5 ने एक स्वर में कहा-पिछले कई दिनों से कोई डॉक्टर नहीं आया। कुछ दर्द से कराह भी रहे थे लेकिन वहां कोई रेजीडेंट डॉक्टर, नर्स, वार्ड ब्वॉय नहीं था।  पूरी मंजिल पर पीने का पानी नहीं था और बाथरूम में गंदगी का अंबार लगा था। 

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  • Web Title:Emergency on ventilator