DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

पटना में मौत के 111 मैनहोल

पांच माह पुरानी ही तो बात है। एसकेपुरी नाले में गिरकर दीपक (10 वर्षीय) हमेशा के लिए बुझ गया। तमाम प्रयासों के बाद भी उसे बचाया नहीं जा सका। 10 दिन पहले ही वार्ड नंबर 45 के संजय गांधी नगर के मैनहोल में एक बच्चा गिर गया था। वह खुशकिस्मत था कि उसे बचा लिया गया। राजधानी में इस तरह के एक-दो नहीं, बल्कि दर्जनों मामले हैं। बावजूद इसके नगर निगम सबक नहीं ले रहा है। कुम्हरार मोड़ से बहादुरपुर पुल के बीच करीब डेढ़ किलोमीटर में 111 खूनी गड्ढे नगर निगम ने तैयार किए हैं। अगर आप इस तरफ से निकल रहे हैं तो अतिरिक्त सावधानी बरतिए। ऐसा न हो कि आपका अगला कदम आपके लिए किसी हादसे का कारण बन जाए। दरअसल, नगर निगम ने नाले के ऊपर के स्लैब को जगह-जगह से ऐसा काटा है कि वे खतरनाक हो गए हैं। सफाई के नाम पर स्लैब को काट कर छोड़ दिया गया है। सफाई पूरी होने के बाद भी इन पर ढक्कन नहीं लगाए गए हैं।

20 दिन पहले शुरू हुई सफाई 
नगर निगम के कंकड़बाग अंचल की ओर से करीब 20 दिन पहले बहादुरपुर पुल से लेकर कुम्हरार के बीच बॉक्स नाले की सफाई शुरू की गई। इसके लिए बॉक्स नाले में अंदर प्रवेश करके सिल्ट निकालने के लिए ऊपर लगाए गए स्लैब को जगह-जगह से तोड़ा गया है। मजदूरों ने नालों की सफाई तो कर ली, परंतु स्लैब के खुले हिस्सों को बंद नहीं किया। अब यही खतरनाक हो गए हैं। इसमें कोई भी गिर सकता है।

नाले का पदयात्री करते हैं प्रयोग
कुम्हरार से बहादुरपुर पुल तक यातायात का दबाव रहता है। इसके कारण पैदल चलने वाले बॉक्स नाले का उपयोग करते हैं। बॉक्स नाले से सटे हिस्से में ही व्यावसायिक प्रतिष्ठान, नालंदा मेडिकल कॉलेज, निजी चिकित्सालय, हार्डवेयर की दुकान और कई शॉपिंग कॉम्प्लेक्स हैं। इसलिए आवाजाही लगातार बनी रहती है। अधिकतर लोग बॉक्स नाले के ऊपर से ही आवाजाही करते हैं। ऐसे में नाले का खुला होना खतरे से खाली नहीं है।

हादसे के स्थान
कुम्हरार मोड़ से बहादुरपुर पुल के बीच करीब 111 स्थानों पर नाले का ढक्कन काटकर छोड़ दिया गया है। नगर निगम के अधिकारियों ने इसे काम का अंग बताते हुए अपना बचाव कर लिया। क्षेत्रीय लोगों का कहना है कि सफाई के बाद गड्ढों को खुला छोड़ दिया गया है। 

मासूम की गई थी जान
अगस्त 2018 में अगमकुआं थाना के टीवी टावर के पास एक पांच वर्षीया मासूम बच्ची की मौत मैनहोल में गिरने की वजह से हो गयी थी। मासूम कुमुद अपने घर के बाहर ही खेल रही थी कि खेलते-खेलते मैनहोल में गिर गई। नगर निगम ने यह मैनहोल खुला छोड़ रखा था। 

नहीं भूलता वह हादसा
मार्च 2017 में पटना सिटी क्षेत्र में चेंबर में गिरने से पांच वर्षीय गौरव की मौत ने भी लापरवाही की पोल खोल दी थी। इस हादसे को गौरव के परिजन नहीं भूल पाते। सिटी अंचल के 20 वार्डों में लगभग 99 मैनहोल थे, जबकि दो नहर व नौ बड़े नाले थे। कुछ नालों को ढका गया था, शेष खुले छोड़ दिए गए थे। 

बॉक्स नाले की सफाई के लिए कई स्थानों पर नाले की आरसीसी को तोड़ा गया है। यहां मैनहोल के रूप में चेंबर बनाए जाने हैं। अभी नाले की सफाई चल रही है, इसलिए इसे ढका नहीं जा सका है। 
-प्रकाश कुमार, सिटी मैनेजर, कंकड़बाग अंचल 

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:111 Manholes of Death in Patna