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स्मार्टफोन पर्यावरण के लिए खतरा

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आपको ऐसा लगता होगा कि स्मार्टफोन पर्यावरण अनुकूल है। यह न सिर्फ पेपर बचाकर पर्यावरण को सुरक्षित रखता है बल्कि आने-जाने में होने वाले कॉर्बन उत्सर्जन को भी कम करता है। लेकिन, हालिया शोध में यह पता चला है कि एक घंटे में स्मार्टफोन उतना ही कॉर्बन उत्सर्जित करता है जितना चार फ्लाइट से उत्सर्जित होता है। 

रिपोर्ट तैयार की 
यूके के एक उत्पादक वेसमैन ने एक रिपोर्ट तैयार की है जिसमें प्रतिदिन के कार्यों से और चीजों से होने वाले कार्बन उत्सर्जन की सूची तैयार बनाई गई है। रिपोर्ट के अनुसार एक बर्तन में पानी उबालने से 70 ग्राम कॉर्बन उत्सर्जित होता है। वहीं एक सामान्य गाड़ी में 1 मील का सफर तय करने पर 710 ग्राम कार्बन निकलता है। वहीं, एक रात मनोरंजन साधनों के साथ होटल में बिताने पर 25 किलो कार्बन का उत्सर्जन होता है। इस शोध के दौरान यह खुलासा हुआ कि प्रतिदिन 1 घंटे स्मार्टफोन उपयोग करने से हम सालभर में 1.25 टन कार्बन उत्सर्जित करते हैं। वेस्ट मैन के अनुसार यह लंदन से गाल्सगाओ आने वाली 4 फ्लाइट के बराबर है जो 500 किलो कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जित करती है। 

ऐसे होता है कार्बन का उत्सर्जन 
स्मार्टफोन सीधे कार्बन का उत्सर्जन नहीं करता। लेकिन,  स्मार्टफोन को चलाने के लिए जो डाटा सेंटर और सर्वर काम करते हैं,  उनके संचालन से बड़ी मात्रा में कार्बन का उत्सर्जन होता है। इन डाटा सेंटर्स की बदौलत ही हम फोन पर विभिन्न एप का प्रयोग करते हैं और दुनियाभर की सारी जानकारी प्राप्त करते हैं। इसके अलावा मैसेज करना, वीडियो और फोटो शेयर करना आदि भी इन्हीं डाटा सेंटर्स और सर्वर की बदौलत हो पाता है। यूके में 95 फीसदी घरों में मोबाइल फोन है। नेशनल स्टैटिसटिक्स रिपोर्ट के अनुसार यूके में  18.9 मिलियन लोगों के पास स्मार्टफोन है। वहीं, भारत में 299 मिलियन स्मार्टफोन मौजूद हैं। इन से बड़ी मात्रा में कार्बन का उत्सर्जन होता है। 

विभिन्न स्रोतों से होता है कार्बन का उत्सर्जन 
सिर्फ स्मार्टफोन को चलाने में ही नहीं बल्कि उसको चार्ज करने में भी कार्बन का उत्सर्जन होता है। इसके साथ ही टेलीकॉम इंफ्रास्ट्रक्चर के संचालन, स्मार्टफोन के निर्माण और उनमें लगने वाले धातुओं के खनन से भी कार्बन का उत्सर्जन होता है। इसके अलावा लोग हर एक से दो साल में अपना फोन बदलते हैं। ऐसे में बेकार हुए फोन में से एक फीसदी से भी कम फोन रिसाइकल हो पाते हैं। ऐसे में ज्यादातर स्मार्टफोन लैंडफिल्स में ही जाते हैं जिससे कार्बन का उत्सर्जन और भी ज्यादा बढ़ जाता है।

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  • Web Title:Threat to smartphone environment