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बच्चों पर सोशल मीडिया का नहीं पड़ता बुरा असर

माना जाता है कि सोशल मीडिया पर घंटों समय बिताने से किशोरों में निराशा और चिंतित रहने की आशंका रहती है। वो दुख की भावनाओं से घिर जाते हैं। लेकिन एक अध्ययन के मुताबिक, किशोरों के जीवन पर सोशल मीडिया का कोई दुष्प्रभाव नहीं पड़ता है और न ही उनकी खुशी कम होती है। 

अभिभावकों के समूहों ने ट्िवटर, फेसबुक और इंस्टाग्राम जैसी सोशल साइट्स पर बच्चों के ज्यादा से ज्यादा समय बिताने को लेकर चिंता जाहिर की। लेकिन ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने एक अध्ययन में इस बात के बेहद कम सबूत पाए कि स्क्रीन के आगे घंटों बैठने से किशोरों पर सोशल मीडिया का बुरा प्रभाव पड़ रहा है। शोधकर्ताओं का कहना है कि माता-पिता को यह चिंता करनी बंद कर देनी चाहिए कि उनके बच्चे फेसबुक और स्नैपचैट जैसे प्लेटफॉर्म पर कितना समय बिताते हैं। यह विचार अपने दिमाग से बिल्कुल निकाल दें कि स्क्रीन पर अधिक वक्त बिताने से बच्चों पर बुरा असर पड़ रहा है। उनके मुताबिक, इसके बजाय उनसे उनके अनुभवों के बारे में बात करें, ऑनलाइन व्यवहार या कोई कंटेंट कितना नुकसानदायक है, इस पर ध्यान दें। 

सोशल मीडिया का असर जानने के लिए लड़के और लड़कियों, दोंनों पर अध्ययन किया गया। अध्ययन में पाया गया कि सोशल मीडिया पर बिताए समय का बहुत थोड़ा-सा नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। हालांकि, सिर्फ लड़कियों ने असंतोष की भावना के चलते सोशल मीडिया का उपयोग कम कर दिया। अध्ययन के मुताबिक, सोशल मीडिया पर बिताए गए समय का प्रभाव लड़कों की तुलना में लड़कियों पर ज्यादा होते हैं, लेकिन यह प्रभाव बहुत ही मामूली से होते हैं। हालांकि, ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के शोध के सह-प्राध्यापक प्रोफेसर एंडी प्रेजबल्स्की का कहना है युवाओं के जीवन की संतुष्टि का इससे कोई लेना-देना नहीं है कि वे सोशल मीडिया का उपयोग कम या ज्यादा कर रहे हैं।

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  • Web Title:Social media does not affect kids