DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

बच्चों में पनपने न दें भेदभाव का शक

हर समय बच्चों को उपदेश न दें। बच्चों की सभी बातें धैर्य के साथ सुनकर उनकी समस्याओं का समाधान तलाशने की कोशिश करें। दोनों बच्चों के साथ भरपूर क्वॉलिटी टाइम बिताएं। किसी एक के साथ पक्षपात न करें। एक की प्रशंसा करते समय, सचेत ढंग से दूसरे की भी तारीफ करें। बड़ा बच्चा हो या छोटा, गलती करने पर उसे दूसरे बच्चे के सामने न डांटें। उसे अलग से समझाएं। बच्चों को एक-दूसरे के ऊपर हावी न होने दें। उनके आत्मसम्मान की रक्षा करना आपकी जिम्मेदारी है।

आप अगर एक से ज्यादा बच्चों की मां हैं तो क्या आपको एक बच्चा दूसरे से ज्यादा प्यारा है? इसका सीधा सा जवाब होगा- नहीं। पर, बच्चे को भी ऐसा ही लगे, यह जरूरी नहीं। हो सकता है, उसे यह महसूस हो कि उसके साथ पक्षपात होता है। शोध बताते हैं कि अगर बच्चे के मन में ऐसी कोई बात घर करने लगी हो तो उसे दूर करना जरूरी है। उम्र बढ़ने के साथ यह सोच प्रबल होती जाती है। अगर बच्चा पूछे कि आप किसे सबसे ज्यादा पसंद करती हैं तो आपका जवाब दोनों को या सबको होना चाहिए। विशेषज्ञों के अनुसार, बच्चों को समान प्यार की जरूरत होती है। ऐसा न होने पर उन्हें मानसिक और भावनात्मक चोट पहुंचती है। इसके बाद उनमें गुस्सा, होड़ और जलन जैसी भावनाएं जन्म लेती हैं।

समझाएं अहमियत 
अगर उनके बीच झगड़ा खत्म नहीं होता तो उन्हें कुछ समय के लिए एक-दूसरे से अलग रहने की चेतावनी दें। इस बीच दोनों को एक-दूसरे की अहमियत बताएं, समझाएं कि जिसकी तुम शिकायत कर रहे हो, वह तुमसे प्यार भी तो करता है। उन्हें कहें कि वे प्यार से मिल-जुल कर रहें।

बच्चों को करीब लाएं
बच्चों के आपसी प्यार को बढ़ाने की  दिशा में जरूरी कदम उठाएं क्योंकि वे सिर्फ अपने नजरिये से देखते हैं। उन्हें प्यार से समझाएं और उन्हें कुछ समय उनके भाई -बहन के साथ अकेले बिताने दें। इससे उनके बीच प्यार और समझदारी बढ़ेगी और वे धीरे-धीरे एक-दूसरे के करीब आएंगे। 

बच्चे के मन को जानें
बच्चों की बात सुनें और उनसे बात करें। कहानियों और उदाहरणों के जरिये उन्हें समझाएं। अगर बच्चा बार-बार  यह कहे कि आप भाई या बहन को ज्यादा प्यार करती हैं तो यह जानना जरूरी है कि वह ऐसा क्यों सोच रहा है। इस बात को समझने की कोशिश करें कि वह ऐसा क्यों कह रहा है और कोशिश करें कि भविष्य में उसे दोबारा ऐसा महसूस न हो।

शेयरिंग का पाठ पढ़ाएं
बच्चों में शेयरिंग की आदत डलवाएं। खासतौर पर खाने-पीने की चीजें एक-दूसरे से शेयर करने को कहें। उनके लिए अलग-अलग खिलौने लाने के बजाय एक ही खिलौने को आपस में शेयर करने के लिए कहें। इससे बच्चे में किसी चीज पर अधिकार जमाने और उसके लिए लड़ने जैसी भावना विकसित नहीं होगी। बच्चा बड़ा हो जाता है तो उसे पर्सनल स्पेस की जरूरत होती है। तब उसे अपना एक कोना चाहिए ताकि वहां वह शांति से पढ़ाई या अपनी रुचि के काम कर सके। लेकिन अलग-अलग कमरे की बजाय उन्हें एक कमरा दें और उनसे सामान शेयर करने को कहें। 

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:Do not let suspicion of discrimination flourish in children