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शराब तस्करों का मयखाना बन गया है बाढ़-बड़हिया रेलखंड

शराबबंदी भले ही बिहार सरकार का बेहतरीन फैसला था, लेकिन दुर्भाग्य से सिस्टम की खामियों का फायदा उठाकर शराब तस्कर अब चांदी काट रहे हैं। मोकामा-बाढ़-बड़हिया रेलखंड क्षेत्र में पिछले छह महीनों के आंकड़े इसी ओर इशारा करते हैं। विभिन्न प्रशासनिक और पुलिसिया विभागों के बीच आपसी सामंजस्य की कमी का फायदा शराब तस्कर उठा रहे हैं। 

मसलन, इस क्षेत्र में बंगाल और झारखंड से आने वाली ट्रेनों से शराब की तस्करी होती है। ट्रेन में लाई जा रही शराब सहित अन्य सामान की जांच का जिम्मा जीआरपी पर है, लेकिन पूर्वी बिहार से जब ट्रेनें बिहार में प्रवेश करती हैं तो जीआरपी की मौजूदगी के बाद भी शराब मोकामा-बाढ़ तक पहुंच जाती है।

सूत्रों का कहना है कि बंगाल-झारखंड के जिन स्टेशनों पर ट्रेन में शराब लादी जाती है, वहां भी उचित जांच और निगरानी का अभाव है, क्योंकि ट्रेन में दर्जनों कार्टन शराब लादना गैरकानूनी है। यानी पड़ोसी राज्यों मे रेल अधिकारी उदासीन हैं। वहीं, ट्रेन में जब गश्ती दल के जवान तस्करों पर कार्रवाई करते हैं, तब कई बार तस्करों का गिरोह आम यात्रियों को निशाना बनाकर गश्ती दल को पीछे हटने का मजबूर कर देता है।

बड़हिया-हाथीदह-मोकामा-बाढ़ के बीच आए दिन ट्रेनों से शराब जब्त होने या शराब तस्करों के साथ झड़प होने की घटनाएं सामने आती हैं। यह इस सच की ओर भी इशारा करता है कि बिना राजनीतिक-प्रशासनिक संरक्षण के शराब की तस्करी और बिक्री संभव नहीं है। सरकार के शराबबंदी के निर्णय को प्रशासन व शराब माफियाओं के गठजोड़ ने मोकामा,बाढ़ क्षेत्र में असफल सा बना दिया है। सूत्रों की मानें तो सहरी हॉल्ट अवैध शराब की तस्करी करने वालों का सॉफ्ट टारगेट बन चुका है। झारखंड और बंगाल से आने वाली ट्रेनों को वैक्यूम कर शराब को उतारा जाता है। बाढ़ के शहरी और ग्रामीण इलाकों में अवैध शराब पहुंचाने वालों के लिए यह एक सुलभ जगह बन गया है। सहरी हॉल्ट के पास दो रास्ते हैं तथा दोनों रास्ते से अवैध शराब की तस्करी करने वाले निकल भागते हैं। ट्रेनों की बोगियों में शराब छुपाकर लाई जाती है और वहां शराब के बोरों को उतारा जाता है। ट्रेन को रोककर शराब उतारते अवैध शराब तस्करों पर गश्ती पार्टी के जवानों द्वारा कार्रवाई का प्रयास करने पर वे लोग पथराव करने लगते हंै।

देखा जाय तो इस वर्ष जनवरी से अभी तक कई बार शराब उतारने का विरोध करने पर यात्रियों को निशाना बनाया गया है। पर छह महीने के अंदर शराब कारोबारी के खिलाफ बाढ़ जीआरपी में तीन और बाढ़ थाने में दो मामले दर्ज किये गए है। कुल पांच मामले एक में बाढ़ थाना की पुलिस ने छह को गिरफ्तार किया है। हाल के घटना को देखा जाए तो दस दिन पूर्व सहरी हॉल्ट पर विभूति एक्स से शराब उतारने में  आरपीएफ जवानों के साथ भिड़न्त हो गई, जिसमें दोनों तरफ से गोली चलाई गई।

स्थानीय थानों से मांगी मदद
ट्रेन से शराब की बड़ी खेप ढोने की शिकायत से आजिज आरपीएफ ने स्थानीय थानों और जीआरपी से मदद मांगने की बात कही है। इन्होंने बताया कि मुख्य रूप से शराब के मामले में कार्रवाई के लिए जीआरपी अधिकृत है। आरपीएफ के अनुसार शराब उतारने के दौरान ट्रेन वैक्यूम कर रोक दिया जाता है। विरोध करने पर बदमाश ट्रेन पर पथराव कर देते हैं।

रेलकर्मियों की भूमिका संदिग्ध!
धंधेबाजों की मानें तो रेल कर्मचारियों की मिलीभगत से ट्रेन से शराब की खेप बिहार लाई जाती है। शराब की खेप ट्रेन में जिस जुगाड़ से लाई जाती है, वाकई संदेह के घेरे में है। प्रत्यक्षदर्शी बताते हंै कि ट्रेन के बैट्री बॉक्स से लेकर बाथरूम में लगे सनमाईका के अंदर शराब रखकर लाया जाता है। यह सब बिना मिलीभगत के कैसे संभव हो सकता है।

शराब की तस्करी पर लगाम लगाने के लिए टीम गठित कर दी गई है। लगातार सर्च ऑपरेशन चलाए जा रहे हैं, जिसका परिणाम है कि बुधवार को बाढ़ जीआरपी ने सहरी हॉल्ट पर शराब उतारने वाले मुख्य तस्कर भूषण यादव को गिरफ्तार कर लिया है। 
-सुजीत कुमार, रेल एसपी 

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  • Web Title:Big consignments of liquor being seized in trains