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पैसों की तंगी नहीं छिपा सकी हिमा का हुनर

हिमा  दास का जन्म 9 जनवरी 2000 को असम राज्य के नागाव जिले के ढिंग में हुआ था। हिमा के पिता रोंजित दास किसानी करते हैं, जबकि माताजी जोमाली दास गृहिणी हैं। कुल 16 सदस्यों के घर में आर्थिक हालात शुरू से ही खराब रहे। बस किसी तरह खाने-पीने की व्यवस्था हो जाती है। परिवार में हिमा और उनके माता-पिता के अलावा 5 भाई और बहन हैं। हिमा ने अपनी शुरुआती पढाई गांव से ही की। खेलों में रुचि होने और पैसों की तंगी के चलते हिमा अपनी पढाई जारी नहीं रख सकीं।

अक्सर बाढ़ के चलते नहीं कर पाती थीं तैयारी
नौगांव में अक्सर बाढ़ आती थी। जगह भी विकसित नहीं है। जब हिमा गांव में रहती थी तो बाढ़ की वजह से कई-कई दिन तक प्रैक्टिस नहीं कर पाती थी क्योंकि जिस खेत या मैदान में वह दौड़ की तैयारी करती, बाढ़ में वह पानी से लबालब हो जाता था।

बेहतर कोचिंग के लिए नहीं थे पैसे
जब 2017 में हिमा गुवाहाटी में एक कैम्प में हिस्सा लेने आई थीं तब उनकी मुलाकात एक एथलेटिक्स के कोच से हुई। उन्होंने ही हिमा को एथलीट के गुर सिखाये। बेहतर कोचिंग के लिए गुवाहाटी भेजने के लिए हिमा के माता-पिता सक्षम नहीं थे, ऐसे में वहां हिमा के रहने खाने का खर्चा कोच ने उठाया।

कॉमनवेल्थ गेम्स में भी अच्छा प्रदर्शन
अप्रैल में गोल्ड कोस्ट में खेले गए कॉमनवेल्थ खेलों की 400 मीटर की स्पर्धा में हिमा दास छठे स्थान पर रही थीं। इस टूर्नामेंट में उन्होंने 51.32 सेकेंड में दौड़ पूरी की थी। इन्हीं राष्ट्रमंडल खेलों की 4400 मीटर स्पर्धा में उन्होंने 7वां स्थान हासिल किया था। जबकि गुवाहाटी में अंतरराज्यीय चैंपियनशिप में उन्हें गोल्ड मिला था।

पहले फुटबॉल खेलने का था शौक
शुरुआत में हिमा को फुटबॉल खेलने का शौक था, वे अपने गांव या जिले के आस पास छोटे-मोटे फुटबॉल मैच खेलकर 100-200 रुपये जीत लेती थी। फुटबॉल में खूब दौड़ने से हिमा का स्टैमिना अच्छा रहा, जिस वजह से वह ट्रैक पर भी बेहतर करने में कामयाब रहीं। उनके कोच ने जब हिमा को एथलेटिक्स में आने के लिए तैयार किया तो शुरुआत में 200 मीटर की तैयारी करवाई, लेकिन बाद में उन्हें एहसास हुआ कि वे 400 मीटर में अधिक कामयाब रहेंगी। 

विश्व एथलेटिक्स चैंपियनशिप की ट्रैक स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीत बनाया था रिकॉर्ड
इससे पहले 2018 में फिनलैंड के टैम्पेयर शहर में 18 साल की हिमा दास ने इतिहास रचते हुए आईएएएफ विश्व अंडर-20 एथलेटिक्स चैंपियनशिप की 400 मीटर दौड़ स्पर्धा में पहला स्थान प्राप्त किया था। हिमा विश्व एथलेटिक्स चैंपियनशिप की ट्रैक स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतने वाली पहली भारतीय बन गई थीं। असम की रहने वाली हिमा की इस अंतरराष्ट्रीय कामयाबी की चर्चा ़फिनलैंड से लेकर पूरे हिंदुस्तान में रही। उस समय हिमा ने 400 मीटर की दौड़ स्पर्धा में 51.46 सेकेंड का समय निकालकर स्वर्ण पदक जीता था, उनके पीछे रोमानिया की एंड्रिया मिक्लोस 52.07 सेकेंड के साथ दूसरे और अमरीका की टेलर मैनसन 52.28 सेकेंड के साथ तीसरे स्थान पर रहीं थीं।  

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  • Web Title:Himas skill could not hide the tightness of money