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22 नवंबर, 2019|1:27|IST

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बनना था कुछ, बन गया कुछ

किसी  ग्राहक पर आए गुस्से को चिप्स की शक्ल मिल गई तो किसी की लापरवाही ने प्रिंटर बनाने का प्रिंसिपल तैयार कर दिया। ऐसे और भी बहुत से आविष्कार हैं, जो हुए तो अनजाने में, लेकिन आज हमारी अहम जरूरतों में तब्दील हो चुके हैं। कुछ ऐसे आविष्कारों के किस्से सुना रहीं है स्वाति शर्मा...

तुम्हारी सुबह का पसंदीदा नाश्ता 124 साल पुराना है और वो भी बनाया कुछ और ही जा रहा था और बन गया फ्लेक्स। हुआ यूं कि जॉन और केथ केलॉग नाम के दो भाई डाइटिंग के हिसाब से कुछ पोषण से भरा खाद्य तैयार करना चाहते थे। ऐसा खाना जिसे शाकाहारी भी आराम से खा सकें। ऐसा ही कुछ बनाने की कोशिश में उन्होंने उबले गेहंू का आटा तैयार किया। एक भाई ने इसको तैयार कर सूखने रख दिया और भूल गया। जब वापस इसकी सुध ली और आटे की लोई तैयार करनी चाही तो वह छोटे-छोटे फ्लेक्स में टूट गई। उन्होंने इन फ्लेक्स को ओवन में बेक कर दिया। ऐसे तैयार हो गए गेहूं वाले फ्लेक्स, लेकिन वक्त के साथ इनमें बदलाव यूं आया कि इनको गेंहू नहीं मक्के से तैयार किया जाना शुरू कर दिया गया। तभी तो तुम इन्हें कॉर्न फ्लेक्स बुलाते हो।

और बन गया कोका कोला
बनाई तो जा रही थी सिर दर्द की दवा, मगर बन गया कोका कोला। फॉर्मासिस्ट जॉन पेम्बर्टन कोला नट और कोला की पत्तियों का इस्तेमाल दवा बनाने के लिए कर रहे थे। इसके बाद उन्होंने इसे कार्बोनेटेड वॉटर के साथ मिला दिया। बाद में जब उन्होंने इस मिश्रण को देखा तो परिणाम कोला के रूप में सामने आया। 

केमिकल चिपका और माचिस तैयार
ब्रिटेन के एक केमिस्ट जॉन वॉकर एक बार सल्फर के साथ कुछ दूसरे रसायनों को लकड़ी की एक डंडी की मदद से मिला रहे थे। तभी उन्होंने गौर किया कि रसायन उनकी डंडी में चिपकता जा रहा था। जब उन्होंने इसे रगड़कर छुड़ाने की कोशिश की तो ये केमिकल जलने लगा। ये देख उनको ख्याल आया कि ये लोगों के काम आने वाला है और उन्होंने ऐसी बहुत सारी स्टिक तैयार कर दीं, जिन्हें तुम माचिस के नाम से जानते हो। 

ग्राहक से मजाक करने में बना चिप्स
यमी चिप्स जिनको देखते ही तुम्हारे मुंह में पानी आ जाता है, दरअसल एक ग्राहक के नखरे दिखाने का नतीजा है। 1853 में न्यूयॉर्क के एक रेस्त्रां में एक बार एक ग्राहक फ्राई पोटैटो के मोटे कटे होने की शिकायत लगातार कर रहा था। और हर बार नए कट के आए आलू को वापस भिजवा देता। इस बार शेफ को गुस्सा आ गया और उसने आलू को पतली स्लाइस में काटा और तलकर, नमक बुरककर भेज दिया। किसी ने सोचा भी नहीं था कि इस बार ग्राहक खुश हो जाएगा। और देखो न ये उस ग्राहक को ही नहीं, सभी को पसंद आने लगा। जानते हो, उस शेफ का नाम जॉर्ज क्रम था।

बनाना था वॉल क्लीनर बन गया प्लेडो
रंग-बिरंगी क्ले से तुम कितना खेलते हो। इनकी मदद से तुम मॉडलिंग सीखते हो। ये नहीं होता तो तुम भी मिट्टी से क्ले मॉडलिंग कर रहे होते। तुम्हारा ये डोह दरअसल एक कम्पनी का असफल उत्पाद है। उस कम्पनी ने दीवारों की सफाई के लिए ये उत्पाद तैयार किया था। इसको बेचा भी लेकिन ये कामयाब नहीं हुआ और कम्पनी को इससे बहुत नुकसान हुआ। लेकिन कम्पनी को इससे उबरने का तरीका यूं आया कि उसने इसे स्कूली बच्चों को खेलने के लिए बेचना शुरू कर दिया। और आज ये तुमहें खेलने के साथ कला भी सिखा रहा है।

लापरवाही के कारण बना इंकजेट प्रिंटर
सोचो प्रिंटर नहीं होते तो तुम किताबें कैसे पढ़ते? अखबार कैसे आता? तुम जितने भी कागज देखते हो सभी छपे हुए होते हैं, वो तुम्हारी कॉपी भी जिसमें तुमने अभी लिखना भी शुरू नहीं किया। लेकिन तुम्हें ये छपी हुई किताबें पढ़ने को नहीं मिली होती, अगर कैनन कम्पनी की एक इंजीनियर ने गलती से अपनी गर्म इस्त्री फाउन्टेन पेन पर न रखी होती। इंजीनियर के ऐसा करने से कुछ देर बाद पेन की स्याही अपने आप बाहर आ गई। ये देखकर उन्हें प्रिंटर बनाने का आइडिया आया। और इसी प्रिंसिपल पर तैयार हुआ इंकजेट प्रिंटर।

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