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खेल से खिलवाड़: स्कूलों में नही बजती है खेल की घंटी

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सरकारी स्कूलों में अब खेल की घंटी नहीं बजती। न ही खेल को लेकर अब शिक्षक सजग हैं। इन स्कूलों में बच्चों की संख्या भी गिनी-चुनी ही होती है। इसलिए उनको भी खेलने-कूदने से ज्यादा मतलब नहीं रह जाता। जबकि स्कूल जाने वाले बच्चों के लिए खेलना-कूदना बहुत जरूरी है। इससे न सिर्फ शारीरिक बल्कि मानसिक विकास भी होता है। पर अब माहौल ऐसा नहीं रहा। 

पहले स्कूलों में खेल की घंटी बजाते हीं बच्चों के चेहरे खिल उठते थे। आठवीं घंटी का इंतजार बच्चे बेसब्री से करते थे। वजह, यह खेल की घंटी होती थी।
वैसे तो बच्चे अपने घर के आसपास भी खेलते थे, लेकिन अपने सहपाठियों के साथ खेलने का मजा ही कुछ अलग था। पर अब ऐसा नहीं होता। राजधानी के स्कूलों में खेल पर ब्रेक लगा हुआ है।  सरकार की उदासीनता, अभिभावकों की अदूरदर्शिता और कई अन्य वजहों से सरकारी स्कूलों में खेल की गतिविधियां एकदम सी ठप पड़ गई हैं। 

राजधानी के स्कूलों में बड़ा मैदान तो है, पर खेल नहीं होता
राजधानी के अधिकांश सरकारी स्कूलों में खेलकूद की कोई नियमित गतिविधि नहीं होती है। कई प्राथमिक विद्यालयों के पास अपनी भूमि या भवन नहीं है।  लेकिन जिन स्कूलों के पास अपना बड़ा मैदान है, वहां भी कुछ नहीं हो रहा। मिलर हाईस्कूल के पास अपना बड़ा मैदान है। लेकिन वहां फिजिकल टीचर नही है। स्कूल के प्राचार्य डॉ. आजाद चंद्रशेखर प्रसाद चौरसिया ने बताया कि टीचर ही नहीं हैं तो खेल कैसे होगा। मंत्री जी से फिजिकल टीचर की मांग की गई है।

पटना हाईस्कूल के पास है बड़ा मैदान
पटना के सरकारी स्कूलों में सबसे बड़ा मैदान पटना हाईस्कूल के पास है।  बावजूद इसके उस मैदान में स्कूल के बच्चे खेलते नहीं देखे जाते। खेल की गतिविधियां नाम मात्र की ही हैं।  स्कूल के बच्चे बताते हैं कि कभी-कभी प्रतियोगिताएं आयोजित होती हैं। रूटीन के हिसाब से खेल की घंटी नहीं बजती। 
गर्दनीबाग स्थित कमला नेहरू उच्च माध्यमिक विद्यालय : यहां भी खेल की गतिविधियां कभी-कभी ही होती हैं। हर शुक्रवार को खेल के लिए छात्राओं को समय दिया जाता है। एक कमरे में शतरंज, टेबल टेनिस के साथ कुछ अन्य खेल छात्राएं खेलती हैं। 

स्कूल का अपना बड़ा मैदान है, लेकिन वहां खेल नहीं होता है। मैदान में बाहरी बच्चे आकर क्रिकेट खेलते रहते हैं। रूटीन के हिसाब से हम लोगों के लिए खेल की घंटी होनी चाहिए। 
-गोलू कुमार, छात्र मिलर हाईस्कूल     

इस बार अभी रूटीन नही बना है। वैसे यहां नियमित रूप से खेल की घंटी नही बजती है। कभी-कभी कबड्डी और अन्य खेलों की प्रतियोगिताएं आयोजित होती रहती हैं।
-अमित कुमार, छात्र पटना हाईस्कूल

सप्ताह में एक दिन शुक्रवार को हम लोगों को मौका मिलता है कि कुछ खेल सकें। जिम की सुविधा है हमारे स्कूल में। वैसे खेल जरूरी है। प्रत्येक दिन कुछ न कुछ होते रहना चाहिए।
-वैष्णवी, छात्रा कमला नेहरू

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  • Web Title:Sports activities stalled in government schools