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सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल का परीक्षण

नौसेना ने शुक्रवार को सतह से हवा में मार करने वाली मध्यम दूरी की मिसाइल का पहली बार दो युद्धपोतों में परस्पर सहयोग के जरिये सफल परीक्षण किया। पश्चिमी समुद्री तट पर यह परीक्षण नौसेना के युद्धपोतों आईएनएस कोच्चि और चेन्नई द्वारा किया गया। 

इन दोनों युद्धपोतों से दागी गई मिसाइलों को परस्पर सहयोग के जरिये एक ही युद्धपोत से नियंत्रित किया गया और अलग अलग लक्ष्यों पर निशाना लगाया गया। नौसेना ने यह परीक्षण रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) तथा इजरायल एयरोस्पेस इंडस्ट्रीज के सहयोग से किया। सतह से हवा में मार करने वाली ये मिसाइलें कोलकाता श्रेणी के विध्वंसक युद्धपोतों में लगी हैं और भविष्य में बनाए जाने वाले सभी युद्धपोतों पर भी लगाई जाएंगी। यह परीक्षण संबंधित एजेंसियों और संगठनों की वर्षों की कोशिशों का परिणाम है। डीआरडीओ की हैदराबाद स्थित प्रयोगशाला डीआरडीएल ने इजरायल एयरोस्पेस इंडस्ट्रीज लिमिटेड के साथ मिलकर यह मिसाइल विकसित की है। देश में यह मिसाइल भारत डायनामिक्स लिमिटेड ने बनाई है। 

देश की बढ़ेगी धाक 
मिसाइल दागने में दो युद्धपोतों के सहयोग के इस परीक्षण के सफल होने के साथ ही भारतीय नौसेना यह तकनीक हासिल करने वाली दुनिया की गिनी-चुनी नौसेनाओं में शुमार हो गई है। इससे नौसेना की मारक क्षमता बढे़गी और उसे अपने प्रतिद्वंद्वियों पर बढ़त हासिल होगी। 

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  • Web Title:Surface to air missile test