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माइग्रेन से गर्भपात का खतरा

जिन महिलाओं को माइग्रेन की शिकायत है उनको गर्भावस्था के दौरान कई तरह की मुसीबतें झेलनी पड़ सकती हैं। एक शोध में पता चला है कि माइग्रेन से पीड़ित गर्भवती महिलाओं में गर्भपात, समय से पहले बच्चा होना और घातक रूप से प्री-एक्लेमप्सिया (यह एक ऐसी स्थिति है जो गर्भावस्था के दौरान उत्पन्न होती है) विकसित होने की संभावना अधिक होती है। 

गर्भवती महिलाओं पर किया शोध 
डेनमार्क के शोधकर्ताओं ने 2,50,000 महिलाओं पर एक शोध किया। इसमें उन महिलाओं की संख्या ज्यादा थी, जिनका माइग्रेन के चलते गर्भपात हो गया या समय से पहले बच्चे का जन्म हो गया। शोधकर्ताओं के मुताबिक, जिन महिलाओं को बहुत अधिक सिरदर्द होता है उनमें गर्भावस्था के दौरान उच्च रक्त चाप से प्रभावित होने की आशंका 50 फीसदी अधिक होती है।

वहीं उनमें प्री-एक्लेमप्सिया होने की संभावना 40 प्रतिशत अधिक होती है, जो एक घातक स्थिति है। इसमें मां और बच्चे दोनों की जिंदगी को खतरा होता है। ब्रिटेन की 80 लाख में से 60 लाख महिलाएं माइग्रेन की शिकार हैं। जिनमें चार महिलाओं में से एक को यह स्थित प्रभावित करती है। 

शिशुओं पर भी पड़ सकता है प्रतिकूल प्रभाव 
डेनमार्क की आरहूस यूनिवर्सिटी हॉस्पिटल के शोधकर्ताओं ने माइग्रेन की शिकार गर्भवती महिलाओं और सामान्य गर्भवती महिलाओं के बीच एक तुलनात्मक अध्ययन किया। इसमें उन्होंने पाया कि माइग्रेन से पीड़ित महिलाओं में गर्भपात होने की संभावना दस फीसदी अधिक और समय से पहले बच्चे को जन्म देने की संभावना 21 फीसदी अधिक होती है। शोधकर्ताओं के मुताबिक, उन शिशुओं को 20 प्रतिशत अधिक गहन देखभाल की जरूरत होती है जिनकी माताओं को माइग्रेन होता है। उन शिशुओं में सांस लेने की परेशानी और  दौरा पड़ने की संभावना ज्यादा होती है। शोध की प्रमुख लेखक निल्स स्केजा का कहना है कि माइग्रेन एक अक्षम स्थिति है। गर्भवती महिलाओं में यह एक सामान्य बात है। उन्होंने कहा, सभी सबूतों से पता चलता है कि गर्भावस्था में माइग्रेन से मां और बच्चे पर कई प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकते हैं। लेकिन, उपचार से इन खतरों को कम किया जा सकता है। 

माइग्रेन के उपचार से भी कम नहीं होती समस्याएं
माइग्रेन का उपचार करने से गर्भावस्था की इन परेशानियों को कम नहीं किया जा सकता। उनका मानना है कि माइग्रेन उच्च रक्तचाप जैसी अंतर्निहित समस्याओं के लिए खतरे की निशानी है। इसका मतलब है कि गर्भावस्था की समस्याएं माइग्रेन से जुड़ी हैं जो एक जैविक समस्या हो सकती है। आनुवंशिकी एक कारक है जो बताती है कि कुछ महिलाओं को माइग्रेन क्यों होता है और दूसरों को क्यों नहीं होता। शोधकर्ताओं का कहना है कि गर्भावस्था में माइग्रेन की वजह से बच्चे का वजन कम, अपरिपक्व, सिजेरियन डिलीवरी, सांस की समस्या, तेज बुखार जैसे खतरे बढ़ जाते हैं।

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  • Web Title:Risk of miscarriage from migraine