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8 अप्रैल, 2021|7:54|IST

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जानलेवा भी हो सकता है विषाक्त भोजन

जब खाना हमें पोषण और ऊर्जा देने के बजाय बीमार बना दे तो इसे फूड पॉयजनिंग कहते हैं। फूड पॉयजनिंग तब होती है, जब हमारा भोजन बैक्टीरिया, वायरस व दूसरे रोगाणुओं या विषैले तत्वों से संक्रमित होता है। वैसे फूड पॉयजनिंग के अधिकतर मामलों में स्टेफायलोकोकस या एस्चेरेचिया कोले (ई. कोलाई) बैक्टीरिया का संक्रमण पाया जाता है। यह रक्त, किडनी और तंत्रिका तंत्र को प्रभावित करता है। इसके अलावा सालमोनेला, स्टेफाइलोकोकाई और क्लॉसट्रिडियम बोट्युलियम जैसे रोगाणु भी खाद्य पदार्थों को संक्रमित करते हैं। क्लॉसट्रिडियम बोट्युलियम द्वारा उत्पन्न संक्रमण को बॉट्युलिज्म कहते हैं। यह गंभीर फूड पॉयजनिंग माना जाता है, क्योंकि इसमें रोगाणु सीधे तंत्रिका तंत्र पर हमला करते हैं।

फूड पॉयजनिंग होने पर क्या करें
फूड पॉयजनिंग अक्सर 48 घंटे में बिना उपचार के अपने आप ठीक हो जाती है। हालांकि इन 48 घंटों में अपने आपको डीहाइड्रेशन से बचाना होगा और कुछ बातों का ध्यान रखना होगा। मसलन, कुछ घंटों के लिए कुछ भी खाना-पीना बंद कर दें। एक साथ ज्यादा पानी न पीकर थोड़ी-थोड़ी मात्रा में पानी पीते रहें। फूड पॉयजनिंग होने के 24 घंटे बाद कम वसा युक्त, पचने में आसान और हल्के भोजन का सेवन करें। अगर जी मिचलाने लगे तो खाना बंद कर दें। जब तक आप बेहतर महसूस न करें, तब तक कुछ खाद्य पदार्थों का सेवन न करें, जिनमें डेयरी उत्पाद, कैफीन, वसा युक्त और तला-भुना भोजन शामिल है। फूड पॉयजनिंग और डीहाइड्रेशन के कारण कमजोरी और थकान हो सकती है, इसलिए आराम करें।

ऐसे करें बचाव 
हमेशा ताजे और उचित प्रकार के खाने का ही सेवन करें।  खाना बनाने, परोसने और खाने से पहले हाथ ठीक से धोएं। किचन में इस्तेमाल होने वाले बर्तनों और बाकी वस्तुओं को अच्छी तरह से धोकर ही इस्तेमाल करें। मांस, मछली और चिकन को पूरी तरह पकाएं कि सारे रोगाणु मर जाएं। सड़क किनारे लगी रहड़ियों और ढाबों पर न खाएं, क्योंकि इस तरह के भोजन से संक्रमण का खतरा अधिक होता है। एक्सपाइरी डेट के खाद्य पदार्थों का सेवन कतई न करें।

इन चीजों से होगा फायदा
फूड पॉयजनिंग का कोई भी लक्षण दिखाई दे रहा हो तो अदरक की चाय का सेवन तत्काल शुरू कर दें। एक चम्मच नीबू के रस में एक चुटकी चीनी डालकर दिन में दो-तीन बार पिएं। लहसुन की दो कलियों को सादे पानी के साथ निगल लें। दिन में तीन बार एक चम्मच शहद लेने से पेट की गड़बड़ी में आराम मिलता है।

सामान्य लक्षण
- पेट में दर्द और मरोड़ होना 
- भूख न लगना 
- डायरिया 
- सिरदर्द, चक्कर आना, जी मचलाना और उल्टी होना 
- ठंड लगकर बुखार आना 
- आंखों के आगे धुंधलका छा जाना 
- बेहोश हो जाना 
- कमजोरी महसूस होना 

गंभीर लक्षण
- सांस लेने में तकलीफ होना 
- आंखों और त्वचा का पीला पड़ना 
- जोड़ों में सूजन 
- खून की उल्टियां होना 
- तीन दिन से अधिक समय तक डायरिया 
- देखने और बोलने में परेशानी होना 
- पेट फूलना।

...तो डॉक्टर से संपर्क करें
- बार-बार उल्टी होने पर 
- तरल पदार्थ गले से नीचे उतारने में परेशानी आने पर 
- खून की उल्टी होने पर 
- मल में रक्त आने की स्थिति में 
- तीन दिन से अधिक डायरिया होने पर 
- पेट में तेज दर्द और मरोड़ रहने की स्थिति में