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दारोगा से लेकर सिपाही के पद पड़े हैं खाली, कैसे हो छापेमारी

शराबबंदी कानून का पालन कराने में उत्पाद विभाग की हालत खराब हो रही है। संसाधन के साथ टीम में भी पदाधिकारियों की भारी कमी है। जिले में छापेमारी करनी हो या फिर किसी सूचना की पड़ताल, टीम पूरी नहीं होने की वजह से कार्रवाई नहीं  हो पाती। दारोगा, सिपाही से लेकर चालक तक के पद खाली पड़े हैं। गाड़ी से लेकर अन्य संसाधनों के लिए कई बार प्रस्ताव भेजा गया लेकिन इस पर अमल नहीं हो सका है। गाड़ियां किराए की हैं और चालक भी उधार के ही हैं।      

गाड़ियों के साथ चालक भी उधार के
उत्पाद विभाग में छापेमारी के लिए गाड़ी बहुत जरूरी होती है, लेकिन पटना उत्पाद विभाग में गाड़ियों की भी कमी है। पांच गाड़ियां किराए पर प्राइवेट में ली गईं हैं उसका भी हर माह किराया दिया जाता है। विभाग की चार गाड़ियां 10 साल पुरानी हैं। इसमें कई की हालत खराब हो चुकी है। इसके बाद भी छोपमारी की जाती है। इन गाड़ियों को चलाने के लिए विभाग में महज एक चालक है। सूत्र बताते हैं कि चालकों को पर्यटन विभाग से लेकर उत्पाद विभाग में काम चलाया जा रहा है।     

ईंधन का पैसा भी मिलता है महीनों बाद
उत्पाद विभाग में ईंधन का पैसा भी मिलने में महीनों लग जाता है। सूत्रों की मानें तो छह-छह महीने तक ईंधन का पैसा फंसा रहता है। 

बड़ी जिम्मेदारी, फिर भी ध्यान नहीं
प्रदेश में शराबबंदी कानून का पालन कराना बड़ी चुनौती है। शराब के तस्करों की सक्रियता के साथ कारोबारियों पर अंकुश लगाने में बड़ी मशक्कत करनी पड़ती है। सूचना तंत्र को मजबूत करना और फिर इसपर काम करना होता है। लेकिन संसाधन और बल की कमी के कारण ऐसा नहीं हो पाता है। विभागीय सूत्रों की मानें तो विभाग में गाड़ियों की कमी से कार्रवाई पर असर पड़ रहा है। 

जो संसाधन है उसमें बेहतर काम किया जा रहा है। शराबबंदी कानून का पालन सख्ती से कराया जा रहा है। गिरफ्तारी और शराब की बरामदगी में भी कोई कमी नहीं पड़ी है। टीम की छापेमारी के साथ सूचना तंत्र को भी मजबूत किया गया है। 
- प्रहलाद प्रसाद भूषण, सहायक उत्पाद आयुक्त

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  • Web Title:reduction from driver to constable in product department