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गोलघर का लेजर शो: रंगीन रोशनी सुनाती हैं कहानियां

प्रकाश की सीधी किरणें यानी लेजर बीम जब पर्दे से टकराती हुई चित्रों के माध्यम से कहानियां सुनाने लगती हैं तो दर्शकों का उत्साह चरम पर होता है। हम बात कर रहे हैं लेजर शो की। आज यह ज्ञान के साथ मनोरंजन का माध्यम बन रहे हैं। राजधानी के गोलघर में चल रहे लेजर शो को दर्शक काफी पसंद कर रहे हैं। इस शो में हेडफोन के जरिये जब कानों में ध्वनि गूंजती है तो लोग रोमांच से उछल पड़ते हैं। यह शो पिछले चार वषार्ें से गोलघर में काफी लोकप्रिय हो चुका है। वर्ष 2015 से यहां लेजर शो चलाया जा रहा है। इसके माध्यम से दर्शकों को गौरवशाली पाटलिपुत्र का इतिहास और  गोलघर की कहनियां बताई जाती है। गोलघर में प्रतिदिन सात शो सुबह 11 बजे से शाम के 5 बजे तक चलता है। एक शो 25 मिनट का होता है। एक शो को देख भी 25 लोग ही सकते हैं और संयोग की बात है कि इसका टिकट भी 25 रुपए प्रति दर्शक है। आइए, अब आपको लेजर बीम का इतिहास बताते हैं। अमेरिका के थेओडोर मैमेन ने 16 मई, 1960 को  कैलिफोर्निया की ह्यूज रिसर्च लेबोरेट्री में पहली बार इसका प्रदर्शन किया था। लेजर किरण के आविष्कार के बारे में माना जाता है कि थेओडोर मैमेन ने कैमरे के लेंस के ऊपर रूबी क्रिस्टल का एक टुकड़ा रखा था। इससे एक लाल रंग की प्रकाश किरण उत्पन्न हुई। लैब में इन किरणों के अध्ययन से पता चला कि फ्लैश से पतले रूबी क्रिस्टल को आवेशित कर इससे ऊर्जा उत्पन्न की जा सकती है। आज लेजर आधारित तकनीक का प्रयोग मनोरंजन शो के अतिरिक्त सजर्री, हाइटेक गैजेट, ऑप्टिकल फाइबर सहित कई काम की चीजों में हो रहा है। 

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  • Web Title:Patnas Golghers Laser Show