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पटना में चमकी के बाद अब डंसने लगा डेंगू का डंक

चमकी बुखार की मार अभी ठंडी भी नहीं पड़ी कि पटना में डेंगू का डंक लोगों को डंसने लगा है। पटना मेडिकल कॉलजे में अधूरी तैयारी के बीच तीन मरीजों में इसकी पुष्टि हुई है। यह मरीज 48 घंटे में इलाज के दौरान चिन्हित किए गए हैं। बात पटना में इलाज को लेकर तैयारी की करें तो अभी तक कोई व्यवस्था नहीं की गई थी। आनन-फानन में पटना मेडिकल कॉलेज में कवायद की जा रही है। अब डेंगू, मलेरिया, चिकनगुनिया जैसी बीमारियों लड़ाई को लेकर बड़ा सवाल है। 

व्यवस्था पर सवाल   
पटना मेडिकल कॉलेज में डेंगू वार्ड तो बनाया गया है लेकिन यहां संसाधन नहीं है। दवा से लेकर अन्य व्यवस्था नहीं है। कर्मचारियों से लेकर नर्श तक की तैनाती नहीं है। इमरजेंसी में तैनात स्वास्थ्य कर्मियों से ही काम चलाया जा रहा है। जिम्मेदार व्यवस्था नहीं होने के पीछे मरीज नहीं आने का तर्क देते हैं। अब सवाल यह है कि जब सीजन निर्धारित होता है तो पटना मेडिकल कॉलेज में व्यवस्था पहले से क्यों नहीं कराई गई। बीमारी के समय में व्यवस्था में देरी मरीजों की जान पर खतरा बन सकती है। 

जांच रिपोर्ट आते मचा हड़कम्प 
पटना मेडिकल कॉलेज के माइक्रोबायोलॉजी विभाग के वायरोलॉजी लैब प्रभारी डा. सच्चिदानंद कुमार का कहना है कि जिन मरीजों में डेंगू की पुष्टि हुई है, उसकी सूचना अस्पताल और कॉलेज प्रशासन को दे दी गई है। जांच रिपोर्ट आने के बाद हड़कम्प मच गया। अस्पताल प्रशासन का दावा है कि माइक्रोबायोलॉजी विभाग डेंगू, चिकनगुनिया, हेपेटाइटिस, मिजिल्स जैसी बीमारियों की जांच नि:शुल्क हो रही है। बीमारी को देखते हुए एक्सपर्ट की संख्या और बढ़ा दी गई है। 

इलाज की नहीं है व्यवस्था 
पटना मेडिकल कॉलेज में मलेरिया और चिकनगुनिया के मरीजों की अलग से वार्ड में रखकर इलाज करने की व्यवथा नहीं की गई है। इन बीमारियों के मरीजों को मेडिसिन विभाग के वार्ड में रखने की व्यवस्था है। हालांकि अस्पताल प्रशासन का कहना है कि दवा और सुविधा पर्याप्त है। मरीज आने पर उन्हें वार्ड में रखकर उपचार किया जाएगा। अभी तक पीएमसीएच को छोड़ पटना के शेष अन्य अस्पतालों में डेंगू वार्ड चिह्नित नहीं किया गया है। पिछले साल एक हजार से अधिक डेंगू के मरीज मिले थे। पांच मरीजों की मौत भी डेंगू के डंक से हुई थी। 

इन मरीजों में मिला डेंगू  
पीएमसीएच में वैशाली, भोजपुर और बेगूसराय के एक-एक मरीज में डेंगू की पुष्टि हुई है। भोजपुर के जिस मरीज में डेंगू की पुष्टि हुई है, वह बेंगलुरु में काम करता है। वहीं रहने के दौरान वह इस बीमारी की चपेट में आ गया। हालांकि दो अन्य मरीज जो वैशाली और बेगूसराय के रहने वाले हैं, उन्हें यह बीमारी घर पर ही हुई है। डॉक्टरों का कहना है कि अब संकेत मिल रहा है और डेंगू के मच्छरों का प्रकोप अब धीरे-धीरे बढ़ सकता है। 

24 घंटे में एईएस के 17 मरीज भर्ती 
पीएमसीएच में पिछले चौबीस घंटे में एईएस के 11 मरीज भर्ती कराए गए हैं। यहां के भी माइक्रोबायोलॉजी विभाग में प्रत्येक दिन एईएस के मरीजों के ब्लड सैंपल एकत्रित किए जा रहे हैं। हालांकि पीएमसीएच प्रशासन का कहना है कि अभी तक एईएस से पीड़ित दो बच्चों की मौत हुई है। ज्यादातर बच्चों को उपचार के बाद घर भेज दिया गया है। जो बच्चे आ रहे हैं वे गंभीर जरूर हैं लेकिन डॉक्टरों की टीम उन्हें उसी गंभीरता से उपचार कर रही है। इसीलिए कम मौतें हो रही हैं। 

अस्पतालों में डेंगू मरीजों के उपचार की सुविधा है, प्लेटलेट्स चढ़ाने की व्यवस्था है। डेंगू के मरीज अभी नहीं आ रहे हैं, इसीलिए अस्पतालों में इसकी तैयारी चल रही है। जल्द ही यह सुविधा बढ़ा दी जाएगी। 
- डॉ. आरके चौधरी, सिविल सर्जन, पटना। 

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  • Web Title:Patna Medical College confirmed dengue three patients