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6 दिसंबर, 2019|11:23|IST

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यहां तो अब भी नाव से चल रहे लोग

राजधानी के रामकृष्णा नगर में आज भी एक लाख से अधिक की आबादी पानी से घिरी है। कई इलाके ऐसे भी हैं, जहां दस हजार से अधिक लोगों को घर से सड़क तक आने में नाव की आवश्यकता पड़ती है। दुश्वारियों में रह रहे लोगों को बीमारी से लेकर कई तरह का खतरा है। हिन्दुस्तान स्मार्ट से अपना दर्द साझा करते हुए पीड़ितों ने बताया कि जिम्मेदारों का कोई ध्यान ही नहीं है। क्षेत्र में कोई भी गाड़ी आती है तो आस बंध जाती है, लेकिन अब तक मदद के हाथ नहीं बढ़ सके हैं। 

समस्या से लड़ती पचास हजार की आबादी 
रामकृष्णा नगर के पिपरा शाहपुर का इलाका पानी से भरा है। यहां अधिक संख्या में ऐसे घर हैं, जहां से हर दिन लोगों को बच्चों को स्कूल छोड़ने और नौकरी करने जाना होता है। चारों तरफ से पानी घिरने से उनका घर से निकलना मुश्किल हो गया है। पहले तो लोगों ने मदद की गुहार लगाई, लेकिन प्रशासन ने कोई ध्यान ही नहीं दिया। लोग डेंगू और अन्य जलजनित बीमारियों के साथ दुर्घटना का शिकार होने के खतरे में रह रहे हैं। 

जलजमाव की बड़ी वजह 
क्षेत्र के लोगों का कहना है कि जलजमाव की बड़ी वजह क्षेत्र में नौबतपुर से पुनपुन तक जाने वाले बादशाही पईन पर अतिक्रमण कर अवैध रूप से घर बनाना है। पूरे पईन पर अतिक्रमण है, जिस कारण से क्षेत्र का पानी नहीं निकल पाता है। इस कारण रामकृष्णा नगर, जगनपुरा, खेमनीचक, नंदलाल छपरा, चमनचक, जीरो माइल, बाइपास का इलाका जलजमाव से ग्रसित होता है। राजधानी से सटे इस क्षेत्र की दशा से लोगों को काफी मुश्किल होती है। क्षेत्र के लोगों का कहना है कि प्रशासन अतिक्रमण को लेकर अभियान चला दे तो क्षेत्र में जलजमाव का संकट कभी होगा ही नहीं, लेकिन लोगों की समस्या से जिम्मेदारों का कोई वास्ता नहीं है। क्षेत्र के लोगों का तो आरोप है कि पिपरा में दो मंजिला और तीन मंजिला मकान तक अतिक्रमण कर बना लिया गया है। इस कारण से समस्या जटिल हो गई है। 

खुद बनानी पड़ी नाव 
घर से कई दिनों तक बच्चों को स्कूल नहीं भेजा गया। कई घरों में दूध और अन्य खाने-पीने के सामान तक नहीं पहुंच पाए। नौकरीपेशा लोग घर में ही कैद होकर रह गए। वह दफ्तरों में भी डांट-फटकार सुनने लगे। बच्चों से लेकर बड़े तक बीमार होने लगे। पानी से बदबू आने लगा और शौचालय तक चॉक हो गया। इसके बाद क्षेत्र के लोगों ने आपस में बातचीत की और फिर टायर और ट्यूब पर लकड़ी का पटरा रखकर नाव बनाया। नाव के सहारे ही लोग घर से बाहर सड़क पर आते-जाते हैं। 

रस्सी के सहारे चलती है जुगाड़ की नाव 
क्षेत्र में 20 से अधिक जुगाड़ वाली नाव तैयार की गई है, जिससे लोगों का काम चल रहा है। क्षेत्र के लोगों का कहना है कि इस नाव से काफी सहारा मिला है। हालांकि दुर्घटना का भी डर लगा रहता है। नाव में दोनों तरफ से रस्सी होती है, जिस तरफ जाना होता है उस तरफ से रस्सी से खींचना होता है। जुगाड़ की नाव से ही लोग घर से बाहर निकल कर अपना काम काज कर पा रहे हैं। 

जलजमाव से कमर तोड़ रही महंगाई 
रामकृष्णा नगर क्षेत्र के कई इलाकों में पानी जमा होने से वहां रह रहे लोगों को महंगाई की मार झेलनी पड़ रही है। सब्जी से लेकर हर सामान काफी महंगा है। समस्या के साथ-साथ लोगों की जेब भी ढीली हो रही है। 

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