Inspector started opposing system in Bihar - पुलिस महकमे में दागदार पर बगावत DA Image

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पुलिस महकमे में दागदार पर बगावत

पुलिस में बगावत की आग जल रही है। गुस्सा जहर की तरह फैल रहा है, जो कभी भी फूट सकता है। अनुशासन वाले विभाग में अब आंदोलन का खतरा मंडरा रहा है। दागदार बताकर कार्रवाई करना गहरा जख्म दे रहा है। अब दारोगा सार्वजनिक रूप से सिस्टम का विरोध करना शुरू कर दिए हैं। फेसबुक पर दारोगा अब दागदार अफसरों पर सवाल खड़ा करने लगे हैं। कार्रवाई की जद में आए थानेदारों का कहना है कि जब दागदार दारोगा थाना पर नहीं रह सकता तो अधिकारी कैसे बड़ी जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। थानेदारों की प्रतिक्रिया के बाद डीजीपी भी सख्त तेवर में हैं। अधिकारियों और थानेदारों के बीच चल रहे इस मामले में 25 अगस्त को पुलिस एसोसिएशन की बैठक में रणनीति तैयार हो सकती है।

दागदार शब्द से मचा बवाल
शासन के निर्देश पर पुलिस मुख्यालय ने दागदार दारोगा और इंस्पेक्टरों को अहम पदों की जिम्मदारी से हटा दिया। प्रदेश में पहली खेप में चार सौ से अधिक थानेदारों की कुर्सी छीनकर उन्हें पुलिस लाइन में भेज दिया गया। पटना में दो दर्जन थानेदार और पदाधिकारी इस जद में आए। अनुशासन वाले विभाग में कार्रवाई तो आम बात है, लेकिन दागदार बताकर कार्रवाई करने को थानेदारों ने दिल पर ले लिया। फिर क्या था वह सार्वजनिक तौर पर अपनी जुबान खोलने लगे। कार्रवाई हुए अभी दो दिन भी नहीं हुआ कि विभाग का माहौल पूरी तरह से गर्म हो गया। पटना पुलिस कार्यालय से लेकर प्रदेश पुलिस कार्यालय तक दागदार शब्द पर प्रतिक्रिया शुरू हो गई।

बताएं कौन हैं ईमानदार
कार्रवाई की जद में आए थानेदार ही नहीं अन्य दारोगा और इंस्पेक्टर भी दागदार शब्द से पीड़ित होकर अधिकारियों से सवाल कर रहे हैं कि ईमानदार की परिभाषा क्या है? दारोगा का कहना है कि अधिकारी द्वेष में आकर थानेदारों पर कारर्वाई कर देते हैं और उन्हें दागदार घोषित कर दिया जाता है। दो दिन के लिए छुट्टी पर गया दारोगा लेट से पहुंचा तो उसके खिलाफ कार्रवाई हो जाती है। नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर कई दारोगा ने बताया कि बेहतर काम करने वाले भी दागदार हो गए हैं।

संगठन के कारण बढ़ सकती है उलझन 
पुलिस विभाग में अनुशासन पर संगठन के भारी पड़ने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता है। सूत्रों की मानें तो अंदर ही अंदर इस मामले में आक्रोश की आग जल रही है। दारोगा और इंस्पेक्टर अब अधिकारियों को दागदार बताते हुए उन्हें हटाने की बात कर रहे हैं। दबी जुबान से आने वाली आवज अब सोशल मीडिया से वायरल हो रही है। कई थानेदार सोशल मीडिया के अलग-अलग प्लेटफार्म पर दागदार पर अपनी प्रतिक्रया लिख रहे हैं। दागदार का मामला दिन-प्रति-दिन तूल पकड़ता जा रहा है।

शराब और बालू सहित अन्य कारोबार बंद करने होंगे
डीजीपी ने सोमवार को कहा कि पुलिस माफियागिरी कर रही है। अब यह नहीं चलेगी। शराब और बालू के साथ अन्य कारोबार करने वाले थानेदारों का राज खत्म होगा। सरकार के संकल्प के अनुसार ही काम हो रहा है। अगर दागी नहीं होते तो उन्हें हटाया नहीं जाता है। 

थानेदारों के सवाल पर भड़के डीजीपी 
थानेदारों ने पुलिस के आला अधिकारियों के खिलाफ चल रही जांच को लेकर सार्वजनिक रूप से सोशल मीडिया पर सवाल खड़ा किया तो डीजीपी भी भड़क गए। डीजीपी ने कहा है कि जिन्हें आपत्ति है वे शुक्रवार को आवेदन करें उनके मामलों की जांच करा ली जाएगी। डीजपी ने यह भी कहा है कि शासन की मंशा है कि थानों पर दागदार थानेदार की तैनाती नहीं होगी। शासन के आदेश का अक्षरस: पालन किया जा रहा है। 

अब माफियागिरी किसी  कि नहीं चलेगी। मनमानी करने वालों पर कार्रवाई की जाएगी। बेहतर काम करने वाले पुलिस कर्मियों और पदाधिकारियों को पुरस्कृत  भी किया जाएगा। 
- गुप्तेश्वर पांडेय, डीजीपी  

दागदार बताकर जिम्मेदारी से हटाना गलत है। ऐसे थानेदारों का बेहतर काम भी नजर अंदाज कर दिया गया है। इसपर 25 को प्रांतीय कार्यालय में बैठक होगी। 
- मृत्युंजय कुमार सिंह प्रदेश अध्यक्ष, बिहार पुलिस एसोसिएशन

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