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स्मार्ट पड़ताल: दिल्ली अभी दूर है...

दिल्ली अभी दूर है। इस कहावत से हम सब वाकिफ है। हर कहावत के पीछे कोई न कोई मतलब होता है।  जी हां, कुछ यही हाल है पटना से गाजियाबाद के बीच शुरू की गई लग्जरी बसों का। परिवाहन विभाग द्वारा  लाव-लश्कर के साथ शुरू की गई  चार लग्जरी  बसों की हालत अब ये है कि इन्हे यात्री नहीं मिल रहे है ।  स्थिति ये है की दिल्ली से पटना के लिए हर रोज़ महज दो से तीन यात्री ही इन बसों पर सवार होते हैं। इन गिने चुने यात्रियों को लेकर ही बसों को दिल्ली के लिए रवाना होना पड़ता है।  ऐसा हम नहीं पटना से गाजियाबाद के बीच तामझाम के साथ शुरू की गई लग्जरी बसों की हालत कह रही है। दावे ऐसे कि मानों पटना से दिल्ली की दूरी अब हवाई जहाज से भी आरामदायक हो गई है। पर परिवहन विभाग चार बसों को अबतक समय पर नहीं पहुंचा पाया है ।  

पटना से निकलते ही शुरू होती है मनमानी
राजधानी से खुलने के बाद ये बसें मीठापुर बस स्टैंड जाती हैं। इसके बाद गांधी सेतु पार कर मुजफ्फरपुर, गोपालगंज, लखनऊ, आगरा होते हुए गाजियाबाद पहुंच जाती है। यात्री बताते हैं कि सेतु पर जाम झेलने के बाद बसों को दूसरे शहरों में एक से डेढ़ घंटे तक खड़ा रखा जाता है। हर हाल में पैसेंजर लेने की इनकी चाहत के कारण पटना से समय पर निकलने के बाद भी पांच से छह घंटे देरी से गाजियाबाद पहुंचाती है। इसके बाद गाजियाबाद से पटना के लिए अपने आप ही चार घंटे तक लेट हो जाती है। 

किराया अधिक होना वजह
हमने फेल होते इन बसों की जानकारी बांकीपुर बस डिपो से लेनी चाही। वहां मौजूद कर्मचारी बताते हैं कि ऑफ सीजन में प्राइवेट बसें आठ से नौ सौ रुपए में ही यात्रियों को दिल्ली पहुंचा दे रही हैं। यहां भाड़ा फ्लैक्सिबलिटी के कोई चांस नहीं हैं। बैठकर जाने के 1650 रु व सोकर जाने के 1900 रुपए सामान्य यात्रियों के लिए बहुत अधिक है। दिल्ली की ओर कमाने जाने वाले मजदूरों की संख्या अधिक है। एक साथ 30 से 40 लोग बस डिपो पहुंच जाते हैं। लेकिन, अफसरों से बातचीत के बाद 1200 से कम भाड़ा नहीं किया जाता है। ऐसे में एक से दो पैसेंजर के साथ भी बसों को रवाना करना पड़ रहा है। 

यह है रूट 
बांकीपुर स्टैंड से रवाना होने के बाद मीठापुर बस स्टैंड होते हुए बस मुजफ्फरपुर, कांटी, पिपरा कोठी, गोपालगंज, कुशीनगर, गोरखपुर, लखनऊ, आगरा, नोएडा, गाजियाबाद पहुंचती है। इसी रूट से गाजियाबाद से निकलने के बाद बस पटना के बांकीपुर स्टैंड पहुंचती है।

लोगों की बातों से जाहिर हुई परेशानी
विपिन कुमार बताते हैं कि 27 मार्च को आनंद विहार से पटना जाने और आने की टिकट एक साथ बुक करायी थी। हालांकि दोनों बुकिंग के पैसे स्थानीय डिपो में ही जमा करने पड़े।  दिल्ली से 11 बजे निकलने वाली गाड़ी तीन बजे रवाना हुई। क्योंकि पटना से ही लेट पहुंची थी। इसके बाद पटना में भी ऐसा ही हुआ। 11 बजे सुबह निकलने वाली गाड़ी एक बजे के बाद पटना पहुंची। यात्रियों के सामने ही गाड़ी की धुलाई करायी गई। इसके बाद चार बजे पटना से रवाना हुई। 

यात्रियों के इंतजार में खड़ी रहेती हैं बसें 
नौ अप्रैल को पटना से आगरा के लिए पहली बार गाड़ी की बुकिंग करायी थी। बिहार पहली बार जाना हुआ था। हमें सुबह साढ़े छह बजे आगरा पहुंचाने की बात कहते हुए गाड़ी में बुकिंग दी गई। लेकिन, गोपालगंज के पास यात्रियों के इंतजार में डेढ़ घंटे गाड़ी खड़ी रही। इस कारण सुबह साढ़े छह के बदले साढ़े 11 बजे गाड़ी आगरा पहुंची। हमारा दफ्तर छूट गया। 

घंटों जाम में फंस जाती है बस 
गांधी सेतु, पीपराकोठी के बाद लखनऊ व आगरा में जाम में औसतन चार घंटे गाड़ी फंस जा रही है। इसमें सबसे ज्यादा जाम गांधी सेतु पर होता है। एक लेन निर्माणाधीन होने से सबसे अधिक समय यहीं लगता है। बस के कर्मचारी भी इसी को मुख्य वजह बताते हैं। अपनी डायरी में इसकी हर दिन की डिटेल भी नोट करने की बात कहते हैं। 

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  • Web Title:Hindustan Smart Patna Ghaziabad bus service was started without government homework