Eclipse beautification of Mauryalok - मौर्यालोक के सौंदर्यीकरण को लगा ग्रहण DA Image

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मौर्यालोक के सौंदर्यीकरण को लगा ग्रहण

मार्च में शुरू मौर्यालोक के सौंदर्यीकरण का काम नियमत: जून अंत तक पूरा हो जाना चाहिए था, लेकिन करीब 6 महीने बीत जाने के बाद भी निगम के महात्वाकांक्षी मौर्यालोक मुख्यालय को स्मार्ट लुक देने का सपना पूरा नहीं हो सका है। अब तो इसके सौंदर्यीकरण के काम को भी पिछले एक सप्ताह से ब्रेक लग गया है, जिसकी वजह से एक तरफ निगम के कर्मचारी तो दूसरी ओर इस परिसर में कारोबार करने वाले सैकड़ों दुकानदारों के बीच असमंजस की स्थिति उत्पन्न हो चुका है। 

मौर्यालोक परिसर और नगर निगम मुख्यालय की इमारत के सौंदर्यीकरण के लिए करोड़ों रुपए का बजट तैयार किया गया। इसमें 6.5 करोड़ की लागत से बाहरी और 3 करोड़ की लागत से आंतरिक संचरना का सौंदर्यीकरण किया जाना था। इसके लिए निगम के तत्कालीन आयुक्त अनुपम सुमन ने 3 महीने का समय निर्धारित किया था। मार्च महीने में काम शुरू हुआ। मौर्यालोक के चतुर्थ फ्लोर, द्वितीय फ्लोर और कुछ फर्स्ट फ्लोर पर काम भी शुरू किया गया। कार्यालयों को पास के मौर्या टॉवर में स्थानांतरित किया गया, लेकिन इन दिनों मौर्यालोक बिल्डिंग और उसके आसपास चल रहे निर्माण कार्य पर रोक लगा हुआ है। इस संबंध में विभागीय अधिकारी कुछ भी बोलने की स्थिति में नहीं हैं। 

जीर्णोद्धार की बाट जोह रही  है प्रतिमा
मौर्यालोक परिसर में निगम के पार्क का भी सौंदर्यीकरण किया जाना था। इसमें स्वामी विवेकानंद की प्रतिमा लगी हुई है। कुछ दिन पहले काम शुरू हुआ, लेकिन खुदाई के बाद सौंदर्यीकरण का काम बंद कर दिया गया, जिसकी वजह से इस पार्क में आने वाले लोगों के प्रवेश पर रोक लग गई है। साथ ही रास्ते के किनारे इस तोड़-फोड़ और खुदाई की वजह से लोगों का आवागमन भी प्रभावित हो रहा है। पार्किंग की सुविधा न होने से रोज घंटों जाम यहां जाम लगता है।

नुकसान उठा रहे यहां के दुकानदार
मौर्यालोक परिसर में संचालित करीब 500 दुकानों के मालिक हर दिन हजारों रुपए का नुकसान उठा रहे हैं। यह नुकसान उनकी दुकानों में ग्राहकों की पहुंच सुनिश्चित नहीं होने की वजह से उठाना पड़ जा रहा है। नगर निगम ने परिसर के सौंदर्यीकरण कार्य के दौरान प्रवेश और निकास द्वारों पर रोक लगा दी गई थी, जिसकी वजह से हर रोज आने वाले हजारों ग्राहकों के इस इलाके में प्रवेश ही प्रभावित हो चुका था। औसतन हर रोज 50 हजार से तीन लाख तक का कारोबार करने वाले दुकानों में देर शाम तक बोहनी होने तक की समस्या खड़ी हो गई। दुकानों में काम करने वाले कर्मचारियों के वेतन, मेंटेनेंस खर्च आदि की समस्या दुकानदारों के समक्ष उत्पन्न हो चुकी है। दुकानदारों का कहना है कि बिना पूर्व रणनीति नगर निगम के द्वारा इस तोड़फोड़ की वजह से अभी तक 50 करोड़ से अधिक का कारोबार का नुकसान हो चुका है।

सौंदर्यीकरण कार्य पर रोक नहीं है। अभी शहर में जल जमाव की समस्या है। इसलिए निगम का फोकस उसी पर है। इसके बाद मौर्यालोक के विकास के काम को गति मिलेगा। 
-संजय कुमार,  जन संपर्क अधिकारी नगर निगम पटना

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