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पटना में हांफ रहीं धूल उठाने वाली मशीनें

शहर में धूल की मात्रा कितनी घातक है, इसका अंदाजा मशीनों द्वारा की जा रही सफाई से लगाया जा सकता है। पटना की सड़कों की सफाई करने में मशीनें जाम हो जा रही हैं। सड़कों पर धूल इतनी अधिक है कि 50 किलोमीटर के बदले रातभर (आठ घंटे) में महज 20 से 25 किलोमीटर ही सड़कों की सफाई हो पा रही है। राजधानी में जहां हर दिन 440 किलोमीटर सड़कों की सफाई की योजना तैयार कर 16.70 करोड़ रुपए खर्च किए गए। अब इसे लगातार झटका लग रहा है। 

इस तरह समझें कितनी परेशानी 
इस संबंध में हमने बेली रोड पर रात्रि में चल रही मशीनों की पड़ताल की। आयकर गोलंबर से राजाबाजार फ्लाईओवर (गोल्फ क्लब) गेट तक पहले दोनों तरफ डिवाइडर की सफाई की जाती है। इसके बाद सड़क के किनारे धूल उठाया जाता है। इस टीम में सफाई निरीक्षक प्रमोद कुमार की ड्यूटी लगी है। उन्होंने बताया कि सात किमी में ही तीन से चार चक्कर धूल उठाते-उठाते सुबह हो जाती है। दिन में गाड़ियों के अधिक दबाव के कारण इसे चलाना संभव नहीं होता। इसी तरह दूसरी रात गाड़ी मालरोड से ईको पार्क के पीछे वाली गली में चलती है। इसमें धूल इतनी अधिक होती है कि रातभर में 25 किमी से अधिक सफाई नहीं हो पाती। यहीं पर हार्डिंग रोड सतमूर्ति से पटेल गोलंबर के बीच महज 16 से 18 किमी सड़कों की सफाई हो पाती है। पाटलिपुत्र में कुर्जी से दीघा हाट तक सड़कों की सफाई के लिए छोटी मशीनें चल रही हैं। इसे हर रात आठ घंटे में 35 किलोमीटर की सफाई करनी है, लेकिन महज 15 से 20 किलोमीटर में ही मशीनें हांफ जा रही हैं। 

क्यों कमजोर हुआ काम
सड़कों की सफाई के लिए फरवरी में दिल्ली की जिस टीम को रखा गया था, उसने गाड़ियों को खराब करना शुरू कर दिया था। इसकी सूचना जैसे ही नगर निगम के अफसरों को मिली तो इसकी जांच की गई। तुर्की और इटली की मशीनों को ऑपरेट करने में टीम फेल हो गई। इनके संचालक प्रशिक्षित नहीं थे। इस कारण निगम ने तत्काल प्रभाव से एजेंसी को हटा दिया है। अब दूसरी एजेंसी को इसकी जिम्मेदारी सौंपी गई है।

इन इलाकों में नहीं हो रही सफाई
स्टेशन गोलंबर से जीपीओ, राजाबाजार फ्लाईओवर, एग्जीबिशन रोड फ्लाईओवर, चिरैयाटाड़ फ्लाईओवर, रुपसपुर फ्लाईओवर की सफाई रोस्टर के हिसाब से नहीं हो रही है। अशोक राजपथ में भी सफाई के बाद भी धूल अधिक है। बारीपथ सहित बाजार समिति तक गाड़ी कम ही पहुंचती है। बेली रोड, बोरिंग रोड, मैंगल्स रोड, सर्कुलर रोड सहित दिनकर गोलंबर से राजेंद्र नगर, 90 फीट तक सड़कों की सफाई नियमित हो रही है।

अभी सात मशीनें चल रही हैं, 90 करोड़ रुपए हर महीने हो रहा है खर्च
राजधानी की सड़कों को डस्ट फ्री करने के लिए इटली और तुर्की से नगर निगम ने स्वीपिंग मशीन मंगाई है। निगम के पास 10 में से सात गाड़ियों की डिलिवरी जनवरी में ही हो गई थी। चार बड़ी और तीन छोटी गाड़ी सड़कों की धुलाई और झाड़ू लगाने के लिए मंगायी गई थीं। फरवरी के अंत से शुरू हुई सड़कों की सफाई ने मार्च के पहले हफ्ते में ही दम तोड़ना शुरू कर दिया था। गाड़ियों के ऑपरेट करने और इससे शहर की सफाई करने के लिए दिल्ली की जिस एजेंसी (राजा महेश्वरी इंटरप्राइजेज) को रखा गया था। उनके एक्सपर्ट गाड़ियों को ऑपरेट नहीं कर पाए। गाड़ियों में खराबी आने लगी। इसके बाद आनन-फानन में अब दक्षिण भारत की दूसरी लायंस सर्विसेस को ठेका दिया गया है। इन गाड़ियों को चलाने और मेंटेन करने के लिए हर महीने 90 लाख रुपए खर्च करने की योजना है। 

अपर नगर आयुक्त सफाई शीला ईरानी ने बताया है कि रोस्टर के हिसाब से शहर की सफाई हो रही है। प्रतिदिन रात 10 से सुबह छह बजे तक सड़कों की सफाई और धुलाई हो रही है। बड़ी मशीन से प्रतिदिन 50 किलोमीटर और छोटी मशीन से 35 किलोमीटर सड़क की सफाई हो रही है। इस हिसाब से सात मशीन हर दिन औसत 305 किलोमीटर सड़कों की सफाई कर रही है। लेकिन, राजधानी की सड़कों पर धूल इतनी अधिक है कि हर दिन लक्ष्य से आधी दूरी भी गाड़ियां तय नहीं कर पा रही हैं। वहीं 2500 घंटे चलने के बाद मशीन के झाड़ू सहित अन्य दूसरे पार्ट बदलने की जरूरत होती है।  

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  • Web Title:Cleaning of main roads only in Patna