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शुक्ल और कृष्ण पक्ष में बदलता है हथेलियों का रंग

पंचांग में आने वाले कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष के अनुसार हाथों की रेखाओं में बदलाव होता है। इसके साथ ही हथेली का रंग भी बदलता है। हथेली के बदले रंग और हाथ की रेखाओं से ही जातक का भाग्योदय होता है। 

माना जाता है कि हाथ की रेखाओं से व्यक्ति के भूतकाल, वर्तमान और भविष्य तीनों का पता चलता है। वहीं यह भी मान्यता है कि जिस तरह समय बदलता है, उसी तरह कर्म और समय के अनुसार व्यक्ति की हाथों की रेखाएं और रंग भी बदल जाते हैं। हाथ में होने वाले बदलाव अक्सर शुक्लपक्ष में देखे जा सकते हैं। शुक्लपक्ष में रेखाएं बढ़ती हैं और कृष्णपक्ष में हाथ की रेखाओं का कटना, धुंधला होना और छोटा होना देखा जा सकता है। इसके अलावा हथेली के रंग भी बदलते हैं। कभी यह लाल दिखाई देती हैं, तो कभी सफेद, भूरी और पीली भी दिखती है। इसके अलावा हथेली में कभी-कभी हल्का सा कालापन भी दिखाई देता है। लाल, गुलाबी व सफेद हथेलियों के प्रभाव को शुभ व अन्य रंगों का हथेलियों पर दिखना अशुभ माना जाता है। 

जानें आखिर क्यों बदलता है हथेलियों का रंग 
इंसान के कर्मों और उसके मन की इच्छाओं के आधार पर हथेलियों का रंग भी बदलता रहता है। जीवन के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण और धार्मिक विचार व्यक्ति के मन में ऐसा बदलाव कर देते हैं कि शरीर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बढ़ने लगता है। जिससे हाथों में ही नहीं, बल्कि व्यक्तित्व में भी बदलाव होने लगता है।

आध्यात्मिक होते हैं सफेद हथेली वाले 
ऐसा माना जाता है कि जिन लोगों की हथेली का रंग सफेद होता है, वे धर्म को मानने वाले व दिव्य शक्तियों में रुचि रखने वाले होते हैं। ऐसे लोग शांति प्रिय होते हैं। एकांत में रहना भी इनकी आदत हो सकती है। ऐसे लोग न तो दुख में दुखी होते हैं और न ही सुख में ज्यादा खुश होते हैं। ये लोग एक जैसे स्वभाव वाले होते हैं। यही वजह होती है कि ऐसे लोग सुख दुख के अंतर बहुत महत्व नहीं देते हैं। 

गुलाबी रंग की हथेलियों वाले होते हैं आशावादी
ऐसे लोगों के जीवन में धन की कमी नहीं होती है। हथेली अत्यधिक गुलाबी होने पर व्यक्ति का स्वभाव परिवर्तन पसंद करने वाला होता है। ये लोग परिवर्तन चाहते हैं। गुलाबी रंग की हथेलियां जिन लोगों की होती हैं, वे क्षमाशील व सौम्य व्यक्तित्व के होते हैं। हमेशा प्रसन्नता चेहरे पर दिखाई देती है। आत्मविश्वासी होते हैं। कलात्मक रुझान होता है। 

क्या कहता है हथेलियों का लाल रंग 
जिन लोगों की हथेली लाल रंग की होती है, उन्हें सबसे अधिक धन प्राप्त होता है। शास्त्रों के अनुसार लाल हथेलियों की प्रशंसा की गई है। जबकि नीली व काली हाथेलियों को अच्छा नहीं माना गया है। 

चंद्रमा की कलाओं के हिसाब से बांटा गया कृष्ण पक्ष व शुक्ल पक्ष
पांच कारकों तिथि, योग, करण, वार और नक्षत्र के अनुसार गणना करने के साथ ही कार्य करने वाली पत्रिका को पंचांग कहा जाता है। इस पंचाग की सनातन धर्म एवं उसमें आस्था रखने वाले लोगों के बीच में खासी मान्यता होती है। पंचांग के अनुसार तिथि, माह एवं दिन तय किया जाता है।

अंग्रेजी वर्ष के कैलेंडर की तरह ही पंचांग में भी एक साल में 12 महीने होते है। लेकिन पंचांग में एक दिन को एक तिथि कहते है, जिसकी अवधि 19 से 24 घंटों तक की हो सकती है। हर माह में तीस दिन होते है और इन महीनों की गणना सूरज और चंद्र की गति के अनुसार ही की जाती है। चंद्रमा की कलाओं के ज्यादा होने या कम होने के अनुसार ही महीने को दो पक्षों में बांटा गया है, जिन्हें शुक्ल पक्ष या कृष्ण पक्ष कहा जाता है।

हथेली के रंगों में छिपे भविष्य के रहस्य
हस्तरेखा विज्ञान के साथ ही हथेलियों के रंगों में भी भविष्य के संकेत छिपे हुए होते हैं। बस जरूरत है इन्हें जानने की। हथेली का रंग लाल और पीला, सफेद और गुलाबी हथेली के साथ ही कालापन लिये भी होता है। ज्योतिष विज्ञान के विशेषज्ञों से संपर्क करके हथेलियों से और उसके रंग से भाग्य के बारे में महत्वपूर्ण जानकारियां मिल सकती हैं। यह बात शायद आपको पता होगी कि सारे ग्रह और ग्रहों की रेखाएं, हथेलियों में ही होते हैं। यही वजह है कि हथेलियों के रंग से व्यक्ति के स्वभाव, स्वास्थ्य और आर्थिक स्थिति के बारे में आसानी से जाना जा सकता है। लेकिन हथेलियों को जब भी किसी को दिखाएं तो सुबह के वक्त ही दिखाएं, क्योंकि हथेलियों को देखने के लिए सुबह का ही समय सबसे अच्छा होता है। ज्योतिष के जानकारों के मुताबिक अन्यथा न तो रंग जान पायेंगे और न ही रेखा।

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  • Web Title:The color of hands palms that shifts in Shukla and Krishna Paksha