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मप्र के जानापाव में परशुराम मंदिर बनाने की घोषणा

भगवान विष्णु के छठे अवतार भगवान परशुराम का भव्य मंदिर का निर्माण जानापाव (मध्य प्रदेश) में होगा। यह संकल्पबद्ध घोषणा रविवार को राष्ट्रीय परशुराम...

मप्र के जानापाव में परशुराम मंदिर बनाने की घोषणा
हिन्दुस्तान टीम,वाराणसीSun, 20 Nov 2022 11:00 PM
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वाराणसी। कार्यालय संवाददाता

भगवान विष्णु के छठे अवतार भगवान परशुराम का भव्य मंदिर का निर्माण जानापाव (मध्य प्रदेश) में होगा। यह संकल्पबद्ध घोषणा रविवार को राष्ट्रीय परशुराम परिषद के उद्घोष कार्यक्रम में की गई। भिखारीपुर स्थित सूर्या गुरुग्राम सोसाइटी में आयोजित कार्यक्रम में परिषद के संस्थापक संरक्षक व राज्यमंत्री पं. सुनील भराला ने कहा कि सात साल के शोध के बाद भगवान परशुराम की जन्मस्थली का निर्णय हुआ है।

उन्होंने कहा कि श्रीकाशी विश्वनाथ की नगरी से महाकालेश्वर के नजदीक परशुराम मंदिर के निर्माण की घोषणा परिषद की प्रतिबद्धता का प्रमाण है। परिषद की शोध पीठ के अध्यक्ष आचार्य केवी कृष्णन ने कहा कि उज्जैन से इंदौर के बीच जानापाव में ऐतिहासिक तथ्यों के आधार पर परशुराम की जन्मस्थली तय की गई है। उनके युद्धस्थल के रूप में महिष्मति, तपोस्थल के रूप में महेन्द्र पर्वत को ही सर्वाधिक प्रामाणिक पाया गया।

विशिष्ट अतिथि सुमेरु पीठाधीश्वर स्वामी नरेंद्रानंद सरस्वती ने कहा कि भारतीय संस्कृति की रक्षा हर व्यक्ति का धर्म है। परशुराम मंदिर भारत की नई पहचान बनेगा। इस दौरान बीएचयू के प्रो. केएन द्विवेदी, प्रो. कृष्ण मोहन ओझा, संस्कृत विवि के पूर्व कुलपति प्रो. राजाराम शुक्ल ने भी विचार रखे। अध्यक्षता प्रो. कामेश्वर उपाध्याय ने की। इश मौके पर केके पाण्डेय, अभिषेक पाण्डेय आदि रहे।

परशुराम के नाम पर राजनीति करने वालों का सफाया

वाराणसी। कार्यालय संवाददाता

श्रम कल्याण परिषद के अध्यक्ष व राज्यमंत्री सुनील भराला ने कहा कि भगवान परशुराम के नाम पर राजनीति करने वालों का सफाया हो रहा है। रविवार को पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि जिन्होंने परशुराम के नाम का राजनीतिकरण करना चाहा वह अपने ही गढ़ में परास्त हो रहे हैं। रामपुर और आजमगढ़ इसके उदाहरण हैं। उन्होंने कहा कि गाजीपुर के जमनिया, जलालाबाद भी परशुराम से जुड़े रहे हैं। ऐसे में इन स्थानों पर भी मंदिर, प्रतिमाओं का निर्माण कराया जाएगा। एक सवाल पर उन्होंने कहा कि चुनाव से इसका कोई संबंध नहीं है। भगवान परशुराम की जन्मस्थली को लेकर जो संशय था उसके लिए साल 2016 में परिषद ने शोध शुरू किया था। ऐतिहासिक तथ्यों के आधार पर अब उनकी जन्मस्थली मिल गई है।

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