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20 जनवरी, 2021|3:25|IST

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हिन्दुस्तान मिशन शक्ति : कोरोना के खिलाफ खीरी की नीलम बनी योद्धा


हिन्दुस्तान मिशन शक्ति : कोरोना के खिलाफ खीरी की नीलम बनी योद्धा

1 / 3शहर में रहने वाली नीलम बेसिक शिक्षा विभाग में शिक्षिका हैं। बेटियों व महिलाओं में हौसला भरने वाली नीलम ने उस समय जिले के लोगों को कोरोना से बचाव की...


हिन्दुस्तान मिशन शक्ति : कोरोना के खिलाफ खीरी की नीलम बनी योद्धा

2 / 3शहर में रहने वाली नीलम बेसिक शिक्षा विभाग में शिक्षिका हैं। बेटियों व महिलाओं में हौसला भरने वाली नीलम ने उस समय जिले के लोगों को कोरोना से बचाव की...


हिन्दुस्तान मिशन शक्ति : कोरोना के खिलाफ खीरी की नीलम बनी योद्धा

3 / 3शहर में रहने वाली नीलम बेसिक शिक्षा विभाग में शिक्षिका हैं। बेटियों व महिलाओं में हौसला भरने वाली नीलम ने उस समय जिले के लोगों को कोरोना से बचाव की...

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लखीमपुर-खीरी। शहर में रहने वाली नीलम बेसिक शिक्षा विभाग में शिक्षिका हैं। बेटियों व महिलाओं में हौसला भरने वाली नीलम ने उस समय जिले के लोगों को कोरोना से बचाव की मुहिम शुरू की जब लॉकडाउन लग गया। लोग कोरोना से डरे थे। ऐसे समय में उन्होंने घर में सिलाई मशीन निकाली और मास्क बनाना शुरू कर दिया। अपने पति वाईडी कालेज के चीफ प्राक्टर डा. सुभाषचन्द्रा के साथ मिलकर 12 हजार मास्क तैयार किए। वह घर में मास्क बनातीं और डॉ. सुभाष चन्द्रा शहर सहित गांवों में जाकर बांटते हैं। उनका अभियान अभी भी जारी है। वह बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए मुहिम चला रहीं हैं। नीलम ने शादी के बाद घर के कामकाज से समय निकालकर कंपटीशन की तैयारी की और शिक्षिका बनीं।

पति के निधन के बाद भी न हारी हिम्मत, बना रहीं हुनरमंद

लखीमपुर-खीरी। शहर के मोहल्ला बहादुरनगर में रहने वाली सुधा श्रीवास्तव के पति का निधन हो चुका है। ऐसे हालात में जब हर कोई टूट जाता है, सुधा ने जीवन की नई शुरुआत की। वह बेटियों को सिलाई-कढ़ाई सिखा रही हैं। पिपराकरमचंद गांव में सिलाई सेंटर चला रही हैं। यहां बेटियों को सिखाती हैं। वह बताती हैं कि बेटियां सिलाई सीखने के बाद स्वावलम्बी बन सकती हैं। इसके अलावा सम्मान सेवा संस्थान से जुड़कर समाजसेवा के लिए भी सक्रिय रहती हैं। दिव्यांगों को उपकरण बांटने के साथ ही उनकी सहायता करती हैं। लॉकडाउन के दौरान गांवों में जाकर लोगों को जागरूक किया। पति के निधन के बाद दो बच्चों की परवरिश की। बच्चों को पढ़ाने के साथ ही वह समाज की बेटियों को आगे बढ़ाने के लिए प्रेरित रहती हैं। सम्मान सेवा संस्थान में उपाध्यक्ष हैं।

छोटे कस्बे की हिचक छोड़ सुष्मिता ने पाई मंजिल

गोला गोकर्णनाथ-खीरी। गोला जैसे छोटे कस्बे की बेटी सुष्मिता ने अपने जीवन की राह खुद चुनी। उन्होंने अपनी कोशिशों से न सिर्फ अवार्ड हासिल किया, बल्कि हुनर को नया आयाम दिया। सुष्मिता ने घर की अनुपयोगी चीजें व कूड़ा-करकट के समाधान का मॉडल राष्ट्रीय मंच पर प्रस्तुत किया। आर्ट एंड क्राफ्ट के माध्यम से कूड़ा समस्या के निदान का ऐसा उदाहरण प्रस्तुत किया गया जिससे लगातार तीन वर्षों से बड़े मंचों से सम्मानित किया गया। कोलकाता में आयोजित पंचम भारतीय अंतर्राष्ट्रीय विज्ञान महोत्सव- 2019 में बेस्ट अपकमिंग आर्टिसन अवार्ड से नवाजा गया है। सुष्मिता का कहना है कि बेटियां अगर खुद ठान लें तो कोई राह मुश्किल नहीं है। अगर लक्ष्य तय हो तो कुछ भी मुश्किल नहीं।

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  • Web Title:Hindustan Mission Shakti Kheri 39 s Sapphire became a warrior against Corona