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आज देश में वैचारिक क्रान्ति की जरूरत: सुधासागर महाराज

ललितपुर। यह ऋषि मुनियों का देश रहा। जहां प्रभु की शरण, मंदिरों में ईश्वर का

आज देश में वैचारिक क्रान्ति की जरूरत: सुधासागर महाराज
आज देश में वैचारिक क्रान्ति की जरूरत: सुधासागर महाराज
हिन्दुस्तान टीम,झांसीThu, 21 Jul 2022 11:46 PM
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ललितपुर। यह ऋषि मुनियों का देश रहा। जहां प्रभु की शरण, मंदिरों में ईश्वर का वास है। गर दोवारा मानव जन्म मिले तो फिर से यही जिनालय और प्रभु शरण हो। अगर देश की संतान ठान ले कि जिस देश ने सब कुछ दिया हम उसको जी जान देंगे तो भारतीय संस्कृति अक्षुण्य हो जाएगी।

क्षेत्रपाल मंदिर में धर्मसभा को सम्बोधित करते हुए निर्यापक श्रमण सुधासागर महाराज ने देश की धरती को अनमोल बताते हुए कहा यह वह भूमि है जहां तीर्थंकरों ने जन्म लिया गुरूओं का सानिध्य मिला। जिन्होंने गुरुकुलों के माध्यम से शिक्षा दी। आज कुछ स्वार्थों की खातिर अपनी संस्कृति माता पिता गुरुओं को छोड़कर देश को बेचने में लगे हुए हो। यह सरासर गलत है। मुनिश्री ने चिन्ता व्यक्त करते हुए कहा आज हमारी शिक्षा को आर्थिक सम्पन्न विदेशी देश आकर अच्छे अच्छे विद्यार्थियों को ले जाकर अपने देश में नौकरी करा रहे हैं। इसमें दोष उन विदेशियों का नहीं बल्कि कमी हमारी है, जो हमने मात्र रुपयों के लिए अपने मंदिर गुरू माता पिता और संस्कृति को छोड़ दिया। अरे गांधी जी के उन विचारों को देखो जब उन्होंने कहा था मैं नरक जाने को तैयार हूं लेकिन वहां पुस्तकाल हो। आज देश में वैचारिक क्रान्ति की जरूरत है।

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