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पार्थिव शिवलिंग का अभिषेक, भव्य श्रृंगार के बाद महाआरती

ललितपुर/साढ़ूमल। दारिद्र, दुख, कष्ट से मुक्ति दिलाकर मनोकामना पूर्ण करने वाले भगवान भोलेनाथ का...

पार्थिव शिवलिंग का अभिषेक, भव्य श्रृंगार के बाद महाआरती
हिन्दुस्तान टीम,झांसीTue, 02 Aug 2022 12:00 AM
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ललितपुर/साढ़ूमल। दारिद्र, दुख, कष्ट से मुक्ति दिलाकर मनोकामना पूर्ण करने वाले भगवान भोलेनाथ का सावन के तीसरे सोमवार को भक्तों ने सन्ताप हरने के लिए पूजन किया। घर-घर पार्थिव शिवलिंग के साथ विराजे नर्मदेश्वर का विभिन्न दृव्यों से अभिषेक करके मनभावन श्रृंगार किया। महाआरती में शंख, घंटा और घड़िया की ध्वनि सुनकर आसपास रहने वाले लोग भी पूजन में शामिल हो लिए।

देवालयों में पूजन अर्चन के साथ ही घरों में पार्थिव शिविलंग निर्माण करके उनके पूजन की परंपरा आदिकाल से है। जिसका श्रावण मास में भक्त अनुशरण करते हैं। सावन के तीसरे सोमवार को मड़ावरा व आस पास रहने वाले लोगों ने घरों में भगवान भोलेनाथ का पूजन अर्चन किया। अगाध श्रद्धा के साथ शिव परिवार बनाया फिर उनका दूध, दही, शहद, शर्करा, घी, भांग, भस्मी आदि की धारा से अभिषेक किया। इसके बाद शुद्ध जल और फिर पंचामृत भगवान को अर्पित किया गया। मंत्रोच्चार के साथ भोलेनाथ का मनोहारी श्रृंगार हुआ। फिर भगवान को प्रसाद लगाया गया। घंटा, घड़ियाल, ढोल, नगाड़ों के बीच कपूर से भगवान की आरती में लोग डूब गए। हर किसी ने जीवन की बेहतरी के लिए भगवान से प्रार्थना की। इससे पूर्व शिवालयों में दर्शन के लिए लोगों की भारी भीड़ उमड़ी। शिवभक्तों ने जलाभिषेक करके शिवलिग पर बेल पत्र आदि चढ़ा पूजा-अर्चना की। ओम नम: शिवाय मंत्र मंदिर में गुंजायमान होता रहा। सुप्रसिद्ध मंदिर लहरधाम सहित कस्बे में वन रेंज स्थित शिव मंदिर, समुदुआ मोहल्ला स्थित वैद्यजी का मंदिर, शालाजी मंदिर सहित अनेक शिवालयों पर सुबह से ही भक्तों का तांता लगा रहा। छोटे- छोटे बच्चे, महिलाएं व पुरुषों ने जल, दूध आदि से भगवान भोलेनाथ का अभिषेक किया और पूजा- अर्चना करते हुए उनकी महिमा का भी गुणगान किया। पड़ोसी राज्य मध्य प्रदेश स्थित टीकमगढ़ जिले में कुंडेश्वर धाम पर भी भारी संख्या में भक्तों ने भोलेनाथ का अभिषेक किया। उधर, पाली स्थित विंध्याचल पर्वत पर विराजे भगवान नीलकंठेश्वर व बार ब्लाक स्थित भगवान झूमरनाथ की विशेष आराधना सुबह से लेकर देर शाम तक चलती रही। हृदय में मनोकामनाओं के साथ भक्त मंदिर गए और यहां विधि विधान के साथ भगवान का पूजन किया।

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