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23 जनवरी, 2021|4:44|IST

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हिन्दुस्तान मिशन शक्ति : खुद से प्यार करेंगी तो किसी के झांसे में नहीं आएंगी

हिन्दुस्तान मिशन शक्ति : खुद से प्यार करेंगी तो किसी के झांसे में नहीं आएंगी

देवरिया | निज संवाददाता

हमारे अंदर खुद के प्रति लगाव कम है तो आत्मविश्वास भी कम होगा। इसकी वजह से निश्चित ही हम निर्णय लेने में दुविधा का सामना करेंगे। इसलिए खुद से प्यार करें, किसी के झांसे या तारीफ में न आएं। इससे आप अपना आत्मविश्वास बढ़ा सकेंगी और अपने अंदर निर्णय लेने की क्षमता विकसित कर पाएंगी। ये बातें 'हिन्दुस्तान मिशन शक्ति' अभियान के तहत देवरिया सीनियर सेकंडरी स्कूल में सोमवार को आयोजित स्कूल संवाद में विशेषज्ञ महिलाओं ने कहीं। नारी सुरक्षा, सम्मान और स्वावलंबन पर स्कूल की छात्राओं ने आगे बढ़कर प्रश्न पूछे। विशेषज्ञों ने पूरी संजीदगी से छात्राओं की जिज्ञासा का समाधान किया।

संवाद के दौरान छात्रा अनुषिका मणि त्रिपाठी ने कहा कि कोई ऐसा कार्यक्रम होना चाहिए, जिसमें लड़कों को जागरूक और प्रशिक्षित किया जाए। इसका जवाब देते हुए विशेषज्ञों ने कहा कि मिशन शक्ति कार्यक्रम पहले आपको जागरूक करने के लिए है। आपको कहां से और कब मदद मिल सकती है, इसकी जानकारी देने के लिए है। लड़का तो किसी न किसी का भाई, बेटा है। उसे सबसे पहले घर में ही समझाएं। किसी लड़की को घूरे, सीटी बजाये तो आप सबसे पहले मना करें। छात्रा प्रसिद्धि ने कहा कि महिला सशक्तिकरण की अनेक योजनायें सरकार चला रही है। फिर भी हममें डर है। क्योंकि उन लोगों पर कार्रवाई नहीं हो रही है, जो इस डर के कारक हैं। सरकार को उनके लिए भी कोई कार्यक्रम शुरू करना चाहिए।

छात्रा अनुष्का गुप्ता ने कहा कि यह आम समस्या है कि अभिभावक लड़कियों पर विश्वास नहीं करते हैं। हम विश्वास बढ़ाने के लिए क्या करें। इस पर पैनलिस्ट ने कहा कि आप पहले खुद को परखें कि आप जो कर रहे हैं, वह सही है। अगर सही है तो माता-पिता को समझाएं, वे अवश्य विश्वास करेंगे। आप पढ़ाई में सबसे अच्छा करने की कोशिश करें। कहीं जाएं तो घर पर बताकर जाएं।

छात्रा अन्नपूर्णा मिश्रा ने पूछा कि प्रियंका रेड्डी, निर्भया आदि अनेक महिलाएं हेल्पलाइन के बावजूद मारी गईं। उनका उत्पीड़न हुआ। उन्हें सहायता नहीं मिली। उन्होंने यह भी पूछा कि अगर कोई अचानक से पकड़ लेगा तो फोन कर सहायता कैसे मांगेंगे। छात्रा श्रेयांसी गुप्ता ने पूछा कि बहुत सारे लड़के मिलकर अगर छेड़ते हैं। तो हम क्या करें। इस पर विशेषज्ञों ने कहा कि आप चिल्ला सकती हैं। जोर-जोर से बोल सकती हैं। उसे काट सकती हैं। मौका मिले तो भागिये। कहीं कोई आपकी सुनेगा और मदद को आगे आयेगा। अगर घटना घट जाये तो भी आप चुप न बैठें। महिला हेल्पलाइन 181, पुलिस को 112 या चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 पर शिकायत करें। जरूर मदद मिलेगी।

छात्रा सना ने पूछा कि अधिकांश अभिभावक कहते हैं कि पढ़ने जाते समय रास्ते में ज्यादा लड़के दिखें तो रास्ता बदल दो। कोई रास्ता न दिखे तो लौट आओ। उनसे बात मत करो। इस पर पैनलिस्ट ने कहा कि डरने की जरूरत नहीं है। अगर आप कहीं अकेले पड़ जाएं तो 112, 181, 1098 पर फोन कर मदद मांग सकती हैं।

सृष्टि मौर्या ने पूछा कि लड़कों को क्यों नही जागरूक किया जाता है, केवल लड़कियों को ही क्यों जागरूक करते हैं। इस पर पैनलिस्ट ने कहा कि जागरूकता कार्यक्रम आपके लिए एक अवसर है। आप इसको सकारात्मक रूप से लें। जहां तक लड़कों की बात है तो आपकी जागरूकता ही उनके लिए सबक होगी। वह खुद-ब-खुद सुधर जाएंगे। सुचिति सिंह ने पूछा कि किसान आंदोलन में महिला पत्रकार से छेड़छाड़ की घटना होती है। आखिर यह हेल्पलाइन कहां थीं, उनकी मदद क्यों नहीं की जा रही है। इस पर पैनलिस्ट ने कहा कि यह मामला अलग तरह का है। इस पर स्थानीय स्तर पर कार्रवाई हो रही होगी।

शख्सियतों की सलाह

बेटा भी बढ़ेगा और बेटी भी पढ़ेगी : शाइस्ता

महिला उद्यमी शाइस्ता परवीन ने कहा कि हम पढ़ने तो आते हैं। पर हमारा लक्ष्य स्पष्ट नहीं होता है। पहले अपना लक्ष्य स्पष्ट कर हासिल करें। उन्होने कहा कि समय के साथ बहुत बदलाव आया है। पहले बेटा-बेटी की पढ़ाई में भी भेदभाव होता था। अब कहते हैं कि बेटा भी पढ़ेगा और बेटी भी पढ़ेगी। इसका मतलब अब घर में भेदभाव कम हुआ है।

अनजान फोन या मैसेज से सावधान रहें : नीतू

महिला हेल्पलाइन आशा ज्योति केंद्र की प्रबंधक नीतू भारती ने छात्राओं से कहा कि आपको फोन पढ़ने के लिए दिया गया है। इसका सही प्रयोग करें। कोई आपको मैसेज करता है। आपकी तारीफ करता है तो सावधान हो जाएं। हेल्पलाइन 181, 112 हमेशा मदद को तैयार रहती है। आठ किलोमीटर के दायरे में टीम रहती है। जरूरत पड़ने पर फौरन मौके पर पहुंच जाते हैं।

अपने पर भरोसा रखें : डॉ. तूलिका पांडेय

संत विनोबा पीजी कालेज में असि. प्रोफेसर डॉ. तूलिका पांडेय कहा कि कोई दूसरा हमें इवैल्यूएट करता है तो आप समझें कि आपका अपने ऊपर विश्वास नहीं है। कक्षा नौ से 12 तक की लड़कियां मां-बाप के रोक-टोक पर विद्रोह कर देती हैं। उसे दुश्मन समझती हैं। इस बीच बाहरी आदमी चाहे पड़ोसी, रिश्तेदार या दोस्त हो उसे अपना लगता है। कोई तारीफ करे तो टोकें। कहें कि मैं अपने बारे में तुमसे बेहतर जानती हूं।

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