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19 जनवरी, 2021|5:19|IST

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हिन्दुस्तान मिशन शक्ति : शिक्षा और अधिकारों के प्रति जागरूक बनें बेटियां

हिन्दुस्तान मिशन शक्ति : शिक्षा और अधिकारों के प्रति जागरूक बनें बेटियां

सिद्धार्थनगर | हिन्दुस्तान टीम

किसी भी विकसित समाज के लिए बालिकाओं का शिक्षित होना बहुत जरूरी है। ग्रामीण क्षेत्रों में बालिका शिक्षा में कमी दर्ज की गई है। शिक्षा एक ऐसा माध्यम है जो एक लड़कियों को बेहतर भविष्य चुनने और बनाने में मदद करता है। शिक्षा के माध्यम से हम एक विकसित राष्ट्र का निर्माण कर सकते हैं। परिवार को लड़कियों की शिक्षा और उनके अधिकारों के प्रति जागरूक होना चाहिए।

ये बातें गुरुवार को डुमरियागंज क्षेत्र के अमौना पाण्डेय गांव स्थित राजकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में हिन्दुस्तान मिशन शक्ति अभियान के तहत आयोजित स्कूल संवाद में शख्सियतों ने कहीं। पैनलिस्ट ने अपने जीवन से जुड़ी तमाम उतार-चढ़ाव वाली बातों को छात्राओं से साझा करते हुए आगे बढ़ने के गुर बताए। शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा आत्मनिर्भर बनने के लिए छात्राओं द्वारा पूछे गए सवालों का जवाब देकर उनकी जिज्ञासा को शांत किया। छात्रा संध्या व सुधा देवी ने पूछा कि क्या हमारे देश में महिलाओं को पुरुषों के समान अधिकार मिला है। पैनलिस्ट ने बताया कि भारतीय संविधान में पुरुष और महिला में कोई भेदभाव नहीं किया गया है। दोनों को एक समान अधिकार मिले हैं। मिशन शक्ति के तहत प्रदेश सरकार इन अधिकारों से अवगत करा रही है। मुस्कान कसौधन ने पूछा कि महिला सशक्तिकरण का अर्थ क्या है। सरकार क्यों इतना अधिक जोर दे रही है? इस पर पैनलिस्ट ने बताया कि बालिकाओं और महिलाओं को उनके अधिकारों व कर्तव्यों के प्रति जागरूक करना और उनको सुरक्षा, सम्मान व स्वावलंबन की ओर प्रेरित करना सशक्तिकरण है।

गुड्डी ने पूछा कि मैं डॉक्टर बनकर ग्रामीणों की सेवा करना चाहती हूं। पैनलिस्ट ने बताया कि लगन, मेहनत से शिक्षा ग्रहण की जाए तो वह चिकित्सक जरूर बन जाएंगी। छात्रा सुमन, गुडि़या, कल्पना, संध्या, दीपा, कविता, आरती ने शिक्षक, इंजीनियर, एएनएम व पुलिस बनने के बारे में सवाल पूछे। सीओ उमेश शर्मा ने कहा कि कुछ भी बनना आसान है लेकिन उसके लिए स्कूल के अलावा घरों पर पढ़ाई जरूरी है। छात्रा आरती और प्रिती ने कहा कि महिलाओं के उत्थान की बात तो होती है लेकिन उनके लिए प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए मुफ्त कोचिंग की व्यवस्था नहीं की जाती है। आर्थिक रूप से कमजोर छात्राओं के लिए बाहर जाकर कोचिंग करना असंभव होता है। सरकार की ओर से अगर छात्राओं के लिए मुफ्त कोचिंग की व्यवस्था कर दी जाए तो गांव की प्रतिभाएं भी बड़े फलक पर पहुंच देश का नाम रोशन कर सकती हैं।

शख्सियतों की सलाह

मानसिक रूप से मजबूत बनें बेटियां: बीडीओ

बीडीओ डुमरियागंज सुशील कुमार अग्रहरि ने कहा कि जब तक बेटियां मानसिक रूप से सशक्त नहीं बनेंगी, उन्हें जीवन में आगे बढ़ने का साहस नहीं मिलेगा। हर बेटी को सशक्त और सुरक्षित बनने के लिए सबसे पहले खुद को मानसिक रूप से मजबूत बनाना है। सफलता के लिए लक्ष्य तय करना है। हमें मानसिक और शारीरिक तौर से खुद को मजबूत बनाना है। सरकार की ओर से छात्राओं को सेल्फ डिफेंस का नि:शुल्क प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

हर जगह सतर्क रहने की जरूरत: मानसी

एडीओ आईएसबी मानसी पटेल ने कहा कि गुड टच और बैड टच के अंतर को समझें। इसे नजरअंदाज न करें। क्योंकि नजरअंदाज करना आपकी मुश्किलें बढ़ाना शुरू कर देता है। उन्होंने कहा कि छात्राओं की सुरक्षा के लिए सबसे अधिक जरूरी हमारा जागरूक होना है। आप अपने अधिकार, ताकत और कानून के बारे में जागरूक होंगे तो अपनी सुरक्षा के लिए चिंतित नहीं होना होगा। सुरक्षा हो या शिक्षा, आपको हर जगह सतर्क रहना बेहद जरूरी है।

परिस्थितियों से डरें नहीं, डट कर मुकाबला करें : सरिता

शिक्षिका सरिता यादव ने कहा कि बेटियां किसी भी परिस्थितियों में न डरें। न उन्हें हार मानने की जरूरत है। विषम परिस्थितियों का डटकर सामना करते हुए अपने भविष्य का लक्ष्य चुनें। याद रखें कि किसी भी लक्ष्य तक पहुंचने के लिए परेशानियों का सामना करना पड़ता है। कहीं कोई अड़चन आ रही है तो वह अपने गुरुजनों व अभिभावकों से साझा करें। जीवन में आगे बढ़ना है तो लक्ष्य का होना जरूरी है वरना शिक्षा उद्देश्यहीन होकर रह जाती है।

सुबह उठने व रात में सोने का समय तय करें: सोनी

शिक्षिका सोनी ने कहा कि छात्राएं सुबह उठने और रात में सोने का समय निर्धारित कर लें। स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मस्तिष्क निवास करता है। स्वस्थ नहीं रहेंगे तो दूसरों की बात छोडि़ए, अपनी ही मदद नहीं कर पाएंगी। हरी सब्जियों और दूध-दही का भरपूर सेवन करें। दाल खाएं, जंक फूड से बचें। परिवार व पड़ोस में रहने वाले लोगों को भी प्रेरित करें। घर से स्कूल या कहीं जा रही हैं तो इसकी सूचना अपने अभिभावक को जरूर दें।

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  • Web Title:Hindustan Mission Shakti daughters should become aware of education and rights