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29 दिसंबर, 2020|12:05|IST

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हिन्दुस्तान मिशन शक्ति : चुप्पी तोड़ो, खुलकर बोलो, बुलंद करो आवाज

हिन्दुस्तान मिशन शक्ति : चुप्पी तोड़ो, खुलकर बोलो, बुलंद करो आवाज

1 / 2हिन्दुस्तान मिशन शक्ति का सफर दूसरे चरण में लंबी दूरी तय कर चुका है। सोमवार को मिशन शक्ति संवाद का आयोजन कुतुबखाना स्थित रामभरोसे लाल गर्ल्स इंटर...

हिन्दुस्तान मिशन शक्ति : चुप्पी तोड़ो, खुलकर बोलो, बुलंद करो आवाज

2 / 2हिन्दुस्तान मिशन शक्ति का सफर दूसरे चरण में लंबी दूरी तय कर चुका है। सोमवार को मिशन शक्ति संवाद का आयोजन कुतुबखाना स्थित रामभरोसे लाल गर्ल्स इंटर...

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हिन्दुस्तान मिशन शक्ति का सफर दूसरे चरण में लंबी दूरी तय कर चुका है। सोमवार को मिशन शक्ति संवाद का आयोजन कुतुबखाना स्थित रामभरोसे लाल गर्ल्स इंटर कालेज में हुआ। मुश्किलों से लेकर समाधान तक, शिक्षा से लेकर सुरक्षा तक और पुरानी रुढ़ियों से लेकर नए चलन तक, सब पर बात हुई।

समाज में अपने काम से पहचान और मुकाम बना चुकीं अतिथियों ने अपनी कहानी साझा की। अपने अनुभव बताए और साथ ही जीवन में आने वाली परेशानियों से न हारने की सीख दी। बेटियों को सिखाया कि पहले खुद की मदद करना सीखना होगा, परिवार-समाज की मदद उसके बाद ही मिलेगी। बेटियों को चुप्पी तोड़कर खुलकर बोलना होगा, अपने अधिकारों के प्रति आवाज बुलंद करनी होगी, तभी अपेक्षित सफलता मिलेगी। शिक्षा के साथ ही आज के दौर में बेटियों की सुरक्षा का मुद्दा जोरशोर से उठा। कार्यक्रम की विशिष्ट अतिथि महिला थाना इंस्पेक्टर ने बेटियों को न केवल सरकार की तरफ से चलाए जा रहे हेल्पलाइन नंबरों की जानकारी दी बल्कि कई ऐसे टिप्स भी बताए जिससे मुसीबत के समय आत्मरक्षा की जा सकती है।

मन से पूछो, क्या सही-क्या गलत

यूट्यूब के जरिये शिक्षा की अलख जलाने वाली टीचर पूनम तोमर ने कहा कि किसी भी काम को सही-गलत के पैमाने पर जरूर परखना चाहिए। और इसके लिए किसी और से पूछने की जगह पहले अपने मन से इसका जवाब मांगना चाहिए। क्या जो हम कर रहे हैं, करने जा रहे हैं, वो सही है या गलत। शुरू में जब मैनें सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर टीचिंग की योजना परिचितों के साथ साझा की तो अधिकांश ने इससे असहमति जताई। आज के दौर में जहां सोशल मीडिया पर फोटो-वीडियो शेयर करने में सौ बार सोचना पड़ता है, ऐसे समय में एक महिला होकर अपना सोशल मीडिया पर पढाई के वीडियो शेयर करना, चैनल बनाना तो किसी को सही नहीं लग रहा था। पर मैने अपने मन की बात सुनीं। आज लोग इसकी सराहना करते हैं तो अच्छा लगता है। नारी शक्ति का मतलब लड़ने से नहीं बल्कि गलत सोच के खिलाफ खड़े होने से है।

स्कूल के प्रांगण में था गोबर, मुझे सफाई पसंद थी

शिक्षिका शालिनी गुप्ता ने कहा कि कमजोरी को पहचानकर उसे उजागर करना चाहिए तभी उसे सही किया जा सकता है। जिस स्कूल में मेरी तैनाती हुई, उसके प्रांगण में गोबर पड़ता था। कुछ ऐसी गंदगी थी कि लोग उसे गोबर वाला स्कूल कहते थे। ऐसे में पढ़ाई भला क्या होती। मैं सफाई पसंद थी तो स्कूल में पहले ही दिन गंदगी देखकर मैने ठान ली कि इसे साफ कराना है। कुछ लोग वहां कब्जा किए हुए थे। काम आसान नहीं था, लेकिन लोगों की मदद से इसे किया जा सकता था। मैंने यही किया, स्थानीय लोगो के साथ ही अपने संगठन की मदद ली। आखिरकार वहां से गोबर हट गया। यह महज एक उदाहरण मात्र है। बेटियों को अगर कोई चीज बदलनी है, सुधार करना है तो उसके लिए मुखर स्वर में आवाज देनी होगी।

दिशाहीन नहीं, लक्ष्य बनाने से मिलेगी सफलता

स्वयं सहायता समूह बनाने वाली शिक्षिका सारिका सक्सेना ने कहा कि सफलता के लिए जरूरी है निर्धारित लक्ष्य की तरफ निरंतर मेहनत करना। एक दिन में न तो चीजें बदलती हैं और न ही सफलता मिलती है। कोई भी काम हो, उसके लिए निरंतर लगातार कर्म करना होता है। यही सफलता का मंत्र है। कोई चीज असंभव नहीं है। वो दिन अब चले गए जब बेटियां विज्ञान और गणित विषय से दूर रहती थीं। अब नया दौर है और इस समय बेटियों के पास पर्याप्त अवसर है। अगर सफलता चाहिए तो 5 डी हमेशा याद होना चाहिए। पहला डायरेक्शन (दिशा), डेडिकेशन (समर्पण), डिटर्मिनेशन (दृढ़ निश्चय), डिसिप्लिन (अनुशासन) और डेडलाइन (समयसीमा)। असफलता को सफलता की सीढ़ी बनानी चाहिए।

शिक्षा के साथ सुरक्षा के प्रति रहें सजग

महिला थाना इंस्पेक्टर लोकेश शरण ने बेटियो को सुरक्षा के टिप्स दिए। उन्होंने कहा कि सरकार की तरफ से कई हेल्प लाइन बेटियों और महिलाओं के लिए चलाई जा रही है। इन नंबरो को हमेशा याद रखना चाहिए और मुसीबत के समय तत्काल फोन करें। किसी प्रकार का भय या संकोच मन में न रखें। पुलिस आपकी मदद के लिए है और बिना किसी डर के फोन करें। इसके लिए 1090, 112 हेल्प लाइन है, जिस पर फोन करते ही 5 मिनट में पुलिस मदद के लिए पहुंच जाती है। इसके साथ ही अपनी सरक्षा के प्रति खुद भी सजग होना पड़ेगा। पेन, चाबी जैसी चीजों का आत्मरक्षा के लिए, मुसीबत के समय हथियार की तरह इस्तेमाल करना आना चाहिए। किसी सोच में डूबे हुए, किसी बात में मगन होकर सड़क पर कतई न चलें। दिमाग बिलकुल चौकन्ना होना चाहिए। और सबसे बड़ी बात है कि अगर छेड़खानी या इस तरह की कोई भी घटना हो तो उसे छिपाएं नहीं, खुलकर विरोध करें।

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