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इसलिए खास हैं दिल्ली के ये सात अजूबे

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वेस्ट टू वंडर पार्क! जहां दुनिया के सात अजूबों को एक  साथ देखना हर किसी के लिए रोमांचक हो सकता है। यह पार्क इसलिए भी खास है, क्योंकि इसे वेस्ट मैटीरियल से तैयार किया गया है। दुनिया के सभी सात अजूबों को पास से जाकर देखना, हर किसी के लिए संभव नहीं हो सकता। फिर भी रोम के कोलोसियम या पेरिस के एफिल टावर के साथ एक सेल्फी लेने का आपका सपना पूरा हो सकता है और वह भी बिना हवाई यात्रा किए। परेशान होने की जरूरत नहीं है? आप ऐसा कर सकते हैं, वास्तविक न सही, उसके रेप्लिका यानी प्रतिरूपों के साथ एक अच्छी सेल्फी तो ले ही सकते हैं। दरअसल, हम बात कर रहे हैं कि दिल्ली के सबसे नए पर्यटन स्थल ‘वेस्ट टू वंडर पार्क’ की। इस पार्क में बेकार और पुरानी चीजों से दुनिया की सबसे खूबसूरत इमारतों की नकल तैयार की गई है। सराय काले खां क्षेत्र के एक लैंडफिल पर इसे बनाया गया है। भारत का यह पहला पार्क है, जिसे कबाड़ के कई टुकड़े जोड़-तोड़ कर तैयार किया है। इसके लिए आप दक्षिण दिल्ली नगर निगम (एसडीएमसी) को धन्यवाद कर सकते हैं, क्योंकि इस परियोजना के पीछे उसी का हाथ है। 

इस पार्क में टहलना दुनिया की सैर की तरह ही है, जिसकी शुरुआत गीजा के महान पिरामिड से होती है और फिर पीसा की मीनार (इटली), एफिल टावर (पेरिस), द कोलोसियम (इटली), ताजमहल (भारत), क्राइस्ट द रिडीमर (ब्राजील) और स्टैचू ऑफ लिबर्टी (न्यूयॉर्क) पर जाकर आपकी यात्रा खत्म होती है। हरेक प्रतिरूप पर जानकारी के लिए बोर्ड लगे हुए हैं, जिसमें इस्तेमाल किए गए कबाड़ सामान की जानकारी दी गई है और साथ में उस रेप्लिका को बनाने वाले कलाकार का नाम भी। पार्क में घूमने आए 30 वर्षीय शोएब सिद्दीकी कहते हैं, ‘यह बहुत बढ़िया आइडिया है, खासकर बच्चों के लिए। वे इन्हें देखकर दुनिया के सात अजूबों के बारे ज्यादा आसानी से समझ सकेंगे।’ पार्क घूमने आए  29 साल के रूबेन थापा और  23 साल की लोला थापा का भी कहना था कि एफिल टावर के पास होने से बेहतर कुछ भी नहीं हो सकता है, भले ही यह असली न हो।’ 

‘इसे देखना इसलिए भी अच्छा है, क्योंकि यह वेस्ट मैटीरियल से बना है। बाहर के देशों में इस तरह के प्रयोग तो काफी देखने को मिलते हैं, पर दिल्ली में यह नया है।’ यह कहना था रूबेन का। वहीं लोला के अनुसार,‘मेरे ख्याल से यह बहुत शानदार तरीका है पुरानी चीजों को फिर से इस्तेमाल में लाने का और इसे एक आकर्षण में बदलने का। जिसका भी यह आइडिया है, है तो शानदार।’ 

ज्यादातर लोगों ने इस पार्क की अवधारणा को लेकर एसडीएमसी के प्रयासों की सराहना ही की है, वहीं कुछ लोगों ने पार्क को बेहतर बनाने के सुझाव भी दिए हैं। 22 साल की साधना मेहरा का मानना है कि यहां पर कुछ फूड प्वॉइंट होने चाहिए जैसे दिल्ली हाट में हैं, इससे ज्यादा-से-ज्यादा लोग आकर्षित होंगे। 21 वर्षीय दृष्टि मुखर्जी कहती हैं,‘यह लोगों को पर्यावरण को बचाने, चीजों को दोबारा इस्तेमाल करने और रीसाइक्लिंग के बारे में बताने का एक दिलचस्प तरीका है। मुझे अक्षय ऊर्जा की अवधारणा पसंद है, जिससे यह पार्क संचालित है। मुझे लगता है कि एसडीएमसी को और जगहों पर भी इसका विकल्प चुनना चाहिए। यह बहुत अच्छा होता अगर ऐसे हर निर्माण या सेल्फी कियोस्क के पास ऑडियो-विजुअल गाइड की भी व्यवस्था होती।’ 

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  • Web Title:these seven wonders of Delhi are special